वास्तु दोष और उनका निराकरण

श्रीमद्भागवत पुराण, वाराह पुराण, वायुपुराण एवं पाराशर संहिता आदि में कहा गया है कि समस्त धन, जन, विद्या, यश एवं शरीर जो कुछ भी सहेज कर रखा गया है, उन सबका अति शीघ्र क्षय हो जाता है यदि आपका निवास स्थान वास्तुदोष से पीड़ित है। सूर्य वेध- तीन वर्ष में, चंद्रवेध- एक वर्ष में, व्योमक- छह माह में, भंजक- पांच वर्ष में, प्लावक-दश वर्ष में, वातक-बीस वर्ष में तथा छिन्नक एक माह बीतते ही अपना पूरा प्रभाव दिखा देता है।

आज कल शहरों में बसने की होड़ में वास्तु दोष को ताक पर रख कर आवास बनाते चले जा रहे है। थोथे सामाजिक उन्नयन एवं दिखावे के लोभ-पाश में बंध कर गृह निर्माण की शास्त्रीय कला की उपेक्षा होती चली जा रही है। किन्तु परिणाम क्या होता है? जब वास्तु दोष का बेआवाज़ डंडा दिन रात पड़ना शुरू होता है, पारिवारिक कलह, अति जटिल रोगों, धनक्षय एवम बदनामी कलंक आदि से जीवन नरक बन जाता है। चारो तरफ हाथ पाँव मारने एवं हर संभव सारे प्रयत्न करने के बावजूद भी जब कोई राह दिखाई नहीं देती है। दिन का चैन एवं रात की नींद हराम हो जाती है। तब आती है बारी पंडितो की। और पढेलिखे या अनपढ़ पंडितो की चांदी हो जाती है। तब जो बचा खुचा धन घर में बचा होता है वह जादू-टोना, यंत्र-मन्त्र एवम भूत-प्रेत भगाने में चला जाता है।

वास्तु दोष के आगे किसी की नहीं चलती है। यदि घर में वास्तु दोष है तो चाहे आप कोटि उपाय कर लीजिये कुछ भी हाथ नहीं लगने वाला। यह मात्र एक शास्त्रीय कथन ही नहीं बल्कि वर्त्तमान विज्ञान भी इसे मान चुका है।

कुछ लोग कतिपय पंडितो के कहने पर बने बनाए घर में तोड़ फोड़ करके इसे सुधारने की कोशिस करते है। किन्तु इस प्रकार मात्र ज्रम्भक या विषपात दोष ही शांत हो सकता है। इसके बावजूद भी यदि क्रान्तिपात दोष उत्पन्न हो जाता है- जो प्रायः तोड़ फोड़ करने के बाद हो ही जाता है, तो और ज्यादा भयंकर स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

अकसर हमारे घरो  में कई छोड़ी-बड़ी परेशानियों रहती हैं। जिन्हें हम भाग्य को दोष देकर नजर अंदाज कर दिया करते है । लेकिन बहुत से लोग अनजाने में यह भूल जाते हैं कि  उनकी  इन परेशानियों का मुख्य कारण घर का वास्तु दोष भी हो सकता है। घर में ऐसे कई वास्तु दोष होते हैं जो परेशानियों का मुख्य कारण बनते हैं अगर इनका निराकरण समय पर नहीं किया जाए तो यह भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बनते हैं। हम सब की यही चाह रहती है कि हम घर में बिना परेशानियों के जीवन व्यतीत करें। आज  हम चार ऐसे वास्तु दोष बताने जा रहें हैं जो  परेशानियों के मुख्य कारण बनते हैं। 

घर के एक वास्तु दोष के कारण आपके समक्ष कोई ना कोई परेशानी रहती है। अगर आपकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है या अच्छी नहीं रहती है तो वास्तु अनुसार इसका मुख्य कारण नैऋत्य कोण में घर का मुख्य द्वार नहीं होना है। इसके लिए आपको मुख्य द्वार सही करवाना होगा और दक्षिण-पश्चिम दिशा के मध्य द्वार का स्थान करना होगा। इन्ही दिशा को नेऋत्य कोण कहा जाता है।

आप कितनी भी कमाई कर रहें हो लेकिन आप कर्ज से मुक्त नहीं हो पा रहें हैं तो इसका कारण भी वास्तु दोष  हो सकता है । इस परेशानी का मुख्य कारण आपका वायव्य कोण में दोष हो सकता है। इसका समाधान आपको जल्द से जल्द करवाना होगा और इसी दोष के कारण आपके संबंध अपने मित्रों, रिश्तेदारों एवं पड़ोसियों से अच्छे नहीं होंगे।

किसी के  वैवाहिक जीवन को कई वर्ष बीतने के बाद भी अगर उनके यंहा  बच्चा नहीं हो रहा है तो यह वास्तु दोष का भी कारण हो सकता है। चाहे जितने प्रयास कर लो अगर उनके  घर का यह वास्तु दोष ठीक नहीं होगा तो उनके  यहां किलकारी नही गुंजेगी। यह वास्तु दोष आपके मकान के मध्य का भाग सही ना होना या थोड़ा सा उठा हुआ होने से उत्पन्न होता है। इसलिए आपको अपने घर के इस भाग को जल्द से ठीक करवाना होगा। जिससे आपकी यह समस्या खत्म हो जाएगी। 

आपके बने बनाए काम अगर बार बार  रूक रहें है या वे पूरे नहीं हो रहे हैं यह भी एक वास्तु दोष का कारण है। यह वास्तु दोष एक गंभीर दोष है जो आपको विनाश की और भी ले जा सकता है। आपके घर के मध्य में भारी सामान, सीढ़िया, शौचालय होने पर इस तरह की परेशानियों आपको परेशान कर रही है। आप इस स्थान को तुरंत ही सही करवाइए जिससे जल्द ही समस्या का अंत हो जाएगा एवं आपके घर के बह्म स्थान का दोष निवारण हो जाएगा। 

वास्तु शास्त्र के अनुसार हमारे घर में वास्तु दोष के लिए कुछ हद तक हम स्वयं जिम्मेदार रहते है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की सुख, शांति व समृद्धि के लिए रसोई घर बहुत ही खास माना गया है। अगर आपके घर में रसोई घर गलत स्थान पर है तो अग्निकोण में बल्ब लगा दें। जिससे रसोई घर का वास्तु दूर हो जाएगा। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में घोड़े की नाल टांगना बड़ा ही शुभ माना गया है। इसलिए अपने मुख्य द्वार पर काले घोड़े की यू आकार की नाल लगा दें। जिससे आपको सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा मिलती रहेगी। इसी तरह घर के मुख्य द्वार पर सिंदूर का बड़ा स्वास्तिक चिन्ह बना दें। क्योंकि हमारी संस्कृति में स्वास्तिक का विशेष महत्व है। घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने से वास्तु दोष हट जाएगा। 

वास्तु के अनुसार आपको घर में दक्षिण दिशा में सोना चाहिए। जिससे आपके स्वभाव में बदलाव होगा। ध्यान रखें कि पश्चिम की और सिर रख कर नहीं सोये। घर के उत्तर व पूर्व में कभी भी कचरा इकट्ठा ना होने दें और ना ही इधर भारी मशीनें रखें। यह आपके घर में वास्तु दोष का कारण बन सकता है। आप घर के उत्तर-पूर्व में कचरा पेटी रख दें। यदि आपके घर के पूर्व कोने में टॉयलेट है तो सीट को इस तरह लगाएं कि उस पर उत्तर या दक्षिण की और मुंह करके बैठ सके। इससे आपके घर का वास्तु दूर होगा और आपको हर काम में अवश्य ही सफलता मिलेंगी।

घर के उत्तर-पूर्व कोने पर एक कलश रख दें और अगर वह कलश मिट्टी का होगा तो ज्यादा बेहतर रहेगा। ध्यान रखें की कलश कभी खंडित ना हों। वास्तु शास्त्र की मानें तो आपके घर के हॉल में या जहां आप बैठते है वहां पीछे पर्वत का चित्र लगाना चाहिए। ऐसा करने से आपका आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति बढ़ती ही जाएगी। इन उपायों से आप आसानी से अपने घर का वास्तु दोष दूर कर सकते है। 

 यदि शयन कक्ष अग्नि कोण  में हो तो पूर्व-मध्य दीवार पर शांत समुद्र का चित्र लगाना चाहिए। सिर हमेशा पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर ही रखना चाहिए। 

यदि ईशान दिशा में किसी भी प्रकार का दोष है तो आप इस दिशा को खाली करके इस दिशा में एक पीतल के बर्तन में जल भरकर रख दें या तुलसी का पौधा लगाकर उसमें नित्य जल देते रहें। पीतल के बर्तन का पानी नित्य बदलते रहें। 

घर में किसी भी प्रकार से वास्तु दोष है तो घर को स्वास्तिक चिन्ह, मांडने और पौधों से सजाएं। पीले, गुलाबी और हल्के नीले रंग का उपयोग करें। दक्षिण की दिशा में भारी सामान रखें जैसे लोहे की अलमारी, पलंग, फ्रीज आदि। घर की वस्तुओं के स्थान को बदलकर भी वास्तु दोष ठीक किया जा सकता है।

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