कौन बनेगा भारत का राष्ट्रपति ? — राष्ट्रपति चुनाव 2017

Presidential Election

भारत के राष्ट्रपति केंद्र के कार्य-पालक अध्यक्ष हैं। संघ के सभी कार्यपालक कार्य उनके नाम से किये जाते हैं। अनुच्छेद 52 के अनुसार केंद्र की कार्यपालक शक्ति उनमें निहित है। वह तीनो  सशस्त्र सेनाओं का सर्वोच्च सेना नायक भी होता है। सभी प्रकार के आपात काल लगाने व हटाने वाला, युद्ध/शांति की घोषणा करने वाला होता है। वह देश के प्रथम नागरिक है। भारतीय राष्ट्रपति का भारतीय नागरिक होना आवश्यक है।

सिद्धांततः राष्ट्रपति के पास पर्याप्त शक्ति होती है। पर कुछ अपवादों के अलावा राष्ट्रपति के पद में निहित अधिकांश अधिकार वास्तव में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रिपरिषद् के द्वारा उपयोग किए जाते हैं।  

आईये जाने कैसे होती है  राष्ट्रपति  चुनाव  की वोटिंग ।

भारतवर्ष  में राष्ट्रपति चुनाव अप्रत्यक्ष मतदान से होता है। लोगों की जगह उनके चुने हुए प्रतिनिधि राष्ट्रपति को चुनते हैं। राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचन मंडल या इलेक्टोरल कॉलेज करता है। इसमें संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं। इसमें राज्यसभा में राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य मतदान में हिस्सा नहीं लेते हैं। दो केंद्रशासित प्रदेशों, दिल्ली और पुडुचेरी के विधायक भी चुनाव में हिस्सा लेते हैं जिनकी अपनी विधानसभाएं हैं।

वोट का मूल्य

राष्ट्रपति चुनाव में अपनाई जानेवाली आनुपातिक प्रतनिधित्व प्रणाली की विधि के हिसाब से प्रत्येक वोट का अपना मूल्य होता है | सांसदों के वोट का मूल्य निश्चित है मगर विधायकों के वोट का मूल्य अलग-अलग राज्यों की जनसंख्या पर निर्भर करता है | जैसे  देश में सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य उत्तर प्रदेश के एक विधायक के वोट का मूल्य 208 है तो सबसे कम जनसंख्या वाले प्रदेश सिक्किम के वोट का मूल्य मात्र  7 प्रत्येक सांसद के वोट का मूल्य 708  है |

भारत में अभी 776 सांसद हैं|  543 लोकसभा सांसद और 233 राज्य सभा सांसद.

776 सांसदों के वोट का कुल मूल्य है – 5,49,408 (लगभग साढ़े पाँच लाख)

भारत में विधायकों की संख्या है 4120

इन सभी विधायकों का सामूहिक वोट है 5,49,474 (लगभग साढ़े पाँच लाख)

इस प्रकार राष्ट्रपति चुनाव में कुल वोट हैं – 10,98,882 (लगभग 11 लाख)

किसी भी दल या व्यक्ति  को इस चुनाव में जितने के लिए  जीतने के लिए 5,49,442 मत की जरूरत है।

भारत के  राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 25  जुलाई 2017 को समाप्त हो रहा है। 25  जुलाई से पहले भारत का नया राष्ट्रपति चुन लिया जाएगा। मोदी सरकार और विपक्ष ने फिलहाल अपने पत्ते नहीं खोले है। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में एनडीए का पलड़ा भारी नजर रहा है। दूसरी ओर सोनिया गांधी ने विपक्षी एकता का आह्वान किया। राजनीतिक जानकारों के अनुसार अगले कुछ दिनों में सरकार और विपक्ष जल्द ही अपने उम्मीदवारों का नाम तय कर लेगी।

एनडीए सरकार के पास फिलहाल 5,37,614  वोट हैं। उसे वाईएसआर कांग्रेस के 9  सांसदों का समर्थन मिल गया है। इसके अलावा एनडीए की नजर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी पर है। इन दोनों दलों में से कोई एक अगर एनडीए के साथ आ जाता है तो उनका उम्मीदवार आसानी से जीत जाएगा। दूसरी और कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, सीपीएम, बीएसपी, आरजेडी जैसे प्रमुख विपक्षी दल संयुक्त उम्मीदवार उतारने की कवायद में है। इनके पास फिलहाल  4,02 ,230 वोट है। इसके अलावा गैर यूपीए-एनडीए दलों के पास करीब 1.60 लाख मत हैं। जीतने के लिए 5,49 ,442  मत की जरूरत है। यानी की एनडीए सरकार को केवल   11828 मतों की आवश्यकता हैं अपना  उम्मीदवार निर्वाचित करवाने के लिए ।   कहते हैं की जंग और  राजनीती में सब जायज होता है  । देखना  है की आने वाली 17 जुलाई को ऊंट किस करवट बैठता हैं

नए राष्ट्रपति के लिए मतदान 17 जुलाई को होगा और 20 जुलाई को मतगणना होगी।

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