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भोजेश्वर महादेव मन्दिर - Digital World Updates

भोजेश्वर महादेव मन्दिर

भोजेश्वर महादेव मन्दिर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से तक़रीबन  ३० किलोमीटर दूर स्थित भोजपुर नामक गाँव में बना एक शिव मन्दिर है। इसे भोजपुर मन्दिर भी कहा जाता  हैं। यह शिव मन्दिर बेतवा नदी के तट पर विन्ध्य की  सूंदर पर्वतमालाओं के मध्य एक पहाड़ी पर स्थित है। मन्दिर का निर्माण एवं इसके शिवलिंग की स्थापना धार के प्रसिद्ध परमार वंश राजा भोज (१०१० – १०५३ ई॰) ने करवायी थी। उनके नाम पर ही इसे भोजपुर शिव  मन्दिर या भोजेश्वर मन्दिर भी कहा जाता है, हालाँकि कुछ किंवदंतियों के अनुसार इस स्थल के मूल मन्दिर की स्थापना पाँडवों द्वारा की गई मानी जाती है।किवदंत्तियों के अनुसार  “उत्तर भारत का सोमनाथ” भी कहा जाता है। 

भोजपुर की पहाड़ी पर एक अद्भुत और विशाल, परंतु अधूरा शिव मंदिर है। यह भोजपुर शिव मंदिर या भोजेश्वर मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हैं। इस प्राचीन शिव मंदिर का निर्माण परमार वंश के प्रसिद्ध राजा भोज (1010 ई-1055 ई) द्वारा किया गया था। मंदिर 115 फीट (35 मी॰) लंबे, 82 फीट (25 मी॰) चौड़े तथा 13 फीट (4 मी॰) ऊंचे चबूतरे पर खड़ा है। 

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है यहां का विशाल शिवलिंग, अपने-आप में अनूठे और विशाल आकार वाले इस शिवलिंग के कारण भोजेश्वर मंदिर को उत्तर भारत का सोमनाथ भी कहा जाता है। चिकने लाल बलुआ पत्थर  के बने इस शिवलिंग को एक ही पत्थर से बनाया गया है जो अद्वितीय है और यह दुनिया  का सबसे बड़ा प्राचीनतम  शिवलिंग माना जाता है। 

आधार सहित इस  शिवलिंग की कुल ऊंचाई 40 फीट (12 मी॰) से भी अधिक है। शिवलिंग की लंबाई इसकी ऊंचाई 7.5 फीट (2.3 मी॰) तथा व्यास 5.8 फीट (2 मी॰) है। यह शिवलिंग एक 21.5 फीट (6.6 मी॰) चौड़े वर्गाकार आधार (जलहरी) पर स्थापित है। मंदिर से प्रवेश के लिए पश्चिम दिशा में सीढ़ियां हैं। गर्भगृह के दरवाजों के दोनों ओर नदी देवी गंगा और यमुना की मूर्तियां लगी हुई हैं 

यहाँ के शिलालेखों से ११वीं शताब्दी के हिन्दू मन्दिर निर्माण की अद्वितीय स्थापत्य कला का ज्ञान होता है व पता चलता है कि गुम्बद का प्रयोग भारत में इस्लाम के आगमन से पूर्व भी होता रहा था। इस अपूर्ण मन्दिर की वृहत कार्य योजना को निकटवर्ती पाषाण शिलाओं पर बड़ी सुंदरता से उकेरा गया है। इन मानचित्र आरेखों के अनुसार यहाँ एक वृहत मन्दिर परिसर बनाने की योजना थी, जिसमें ढेरों अन्य मन्दिर भी बनाये जाने थे। इसके सफ़लतापूर्वक सम्पन्न हो जाने पर ये मन्दिर परिसर भारत के सबसे बड़े मन्दिर परिसरों में से एक होता। परन्तु इसका निर्माण रोक दिया गया था 

साथ ही भोजेश्वर मंदिर की छत गुम्बदाकार हैं। कुछ विद्धान इसे भारत की प्रथम गुम्बदीय छत वाली इमारत मानते हैं। और यह एक सशक्त प्रमाण है कि भारत में गुम्बद निर्माण का प्रचलन इस्लाम के आगमन के पहले भी था। इस मंदिर का निर्माण भारत में इस्लाम के आगमन के पहले हुआ था अतः इस मंदिर के गर्भगृह के ऊपर बनी अधूरी गुम्बदाकार छत भारत में गुम्बद या शिखर निर्माण के प्रचलन का प्रत्यक्ष प्रमाण है। 

इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है और बहुत ही आश्चर्य भी होता है कि आखिर इतने भारी भरकम  पत्थर, इतनी ऊंचाई पर कैसे पहुंचाए गए होंगे? परंतु मंदिर के ठीक पीछे के भाग में एक ढलान बना है, जिसका उपयोग निर्माणाधीन मंदिर के समय विशाल पत्थरों को ढोने के लिए किया गया होगा । 

परन्तु  यह अद्भुत मंदिर अपने आप में एक अबूझा, अनसुलझा रहस्य समेटे है।

भोजेश्वर मंदिर का निर्माण अधूरा हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि निर्माण कार्य एकदम से ही रोक दिया गया होगा। इसका निर्माण अधूरा क्यों रखा गया इस बात का इतिहास में कोई पुख्ता प्रमाण तो नहीं है पर जनश्रुति है कि इस मंदिर का निर्माण एक ही रात में होना था, परन्तु छत का काम पूरा होने के पहले ही सुबह हो गई, इसलिए निर्माण अधूरा रह गया।

भोजपुर     भोजेश्वर मंदिर     भोजपुर शिव  मन्दिर 

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