खेती की आधुनिक तकनीक ” हाइड्रोपेनिक्स “

यंहा हम आप को बताने जा रहें है कि बगैर मिटटी के खेती करके लोगो ने कैसे लाखो रूपये कमाएँ हैं। ये कौन-सी तकनीक है और इसे क्या कहते है। आइये जानते क्या है इसकी तकनीक। बगैर मिटटी के बहुत ही कम पानी में की जाने वाली खेती को Hydroponics कहते हैं। दूसरे शब्दों में जिस खेती में मिट्टी की ज़रूरत नहीं होती और जिसे बहुत ही कम पानी में उगाया जा सकता है, उसे Hydroponics खेती कहते हैं।

इस आधुनिक तकनीक में फसल के लिए पानी का स्तर उतना ही रखा जाता है जितना किसी फसल को ज़रूरी होता है। इसमें पानी की संतुलित मात्रा और सूर्य की रोशनी से पौधे को पर्याप्त पौषक तत्व मिल जाते हैं। इस अत्याधुनिक Hydroponics खेती में मिट्टी की जगह पानी ले लेता है, लेकिन ध्यान रहे पानी ऐसा होना चाहिए जिसमें मिट्टी वाले पोषक तत्व हो। जैसे कि खारा पानी नहीं होना चाहिए ।

पोषक तत्वों को रखने के लिए एक पोषण टैंक की आवश्यकता होती है। पोषक तत्वों को पानी के माध्यम से पौधों तक भेजने के लिए एक पंप की भी ज़रूरत होती है। पौधों की आवश्यकतानुसार ज़रूरी पोषक तत्व जिसे पौधों की जड़ो तक पंहुचाया जा सके । एक चैनल की भी आवश्यकता है जिससे पोषक तत्व को क्यारी या नाली बनाकर पौधो तक पंहुचाया जा सकता है। शेष बचे पोषक तत्व दोबारा टैंक में वापस ले लेना चाहिए. पौधों की जड़ों को सपोर्ट भी चाहिए होता है हाइड्रोपेनिक्स  तकनीक में साधारणतः बजरी, प्लास्टिक या बालू का इस्तेमाल पौधों की जड़ों को सपोर्ट देने के लिए होता है।

देशी तरीके से खेती करने पर खेत की मिटटी में जैविक पदार्थ डालकर पोषक तत्व बढ़ाए जाते हैं, लेकिन हाइड्रोपेनिक्स के जरिए खेती करने के लिए पानी के अंदर पोषक तत्वों को संतुलित मात्रा में मिलाया जाना चाहिए.

खेत की मिट्टी में जब खेती की जाती है तब पौधे को ऑक्सीजन मिट्टी से ही मिलती है। लेकिन Hydroponics तकनीक में पानी से पौधे ऑक्सीजन लेकर बड़े होते हैं। ये ठीक उसी तरह से हैं जैसे किसी घर में बनी फिश्पोट में मछलियाँ, टैंक के अंदर ही पानी से ऑक्सीजन लेती हैं।

परम्परागत खेती करने पर पौधों को अपनी जड़ों के प्रसार के लिए मिट्टी से ही पानी लेकर बड़ा होना होता है लेकिन इस अत्याधुनिक Hydroponics तकनीक में इनको पानी की सीधी सप्लाई की व्यवस्था की जाती है। जल का पीएच लेवल इस तकनीक में नियंत्रित किया जाता है। इसलिए पौधे का विकास बहुत तेजी से और संतुलित तरीके से होता दिखाई देता है। परिणाम स्वरुप, फसल से अधिक ऊपज मिलती है। इस अत्यधुनिक हाइड्रोपेनिक्स तकनीक के कारण खेती के सिस्टम को नवीन तथा ऑटोमैटिक तरीके से चलाया जा सकता है।

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