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चन्द्र ग्रहण क्यों होता है

written by Atul Mahajan July 27, 2018
Chandra Grahan

Chandra Grahan क्यों होता है

विज्ञानं  की दृष्टि से चंद्रग्रहण उस खगोलीय स्थिति को कहते है जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रतिछायां  में आ जाता है। तथा ऐसा तभी हो सकता है जब सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा इस क्रम में लगभग एक सीधी रेखा में  उपस्थित हों। इस भौगोलिक प्रतिबंध के कारण chandra grahan केवल पूर्णिमा को घटित हो सकता है। chandra grahan का स्वरूप  एवं अवधि चंद्र आसंधियों के सापेक्ष होने वाली चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करता है ।

साधारणतः chandra grahan को पृथ्वी के रात्रि पक्ष के किसी भी भाग से देखा जा सकता है। जहाँ चंद्रमा की छाया की लघुता के कारण सूर्यग्रहण किसी भी स्थान से केवल कुछ मिनटों तक ही दिखता है, वहीं चंद्रग्रहण की अवधि कुछ घंटों की होती है। चंद्रग्रहण को, आँखों के लिए बिना किसी विशेष सुरक्षा के देखा जा सकता है, क्योंकि चंद्रग्रहण की उज्ज्वलता पूर्ण चंद्र से भी कम होती है।

सदी का सबसे बड़ा चन्द्र ग्रहण

इस सदी का सबसे विशाल  चंद्रग्रहण (longest lunar eclipse) आज यानि  27 जुलाई 2018 को लग रहा है ।  महत्वपूर्ण बात यह है कि यह ग्रहण संपूर्ण भारतवर्ष में दिखाई देगा तथा आरम्भ से  एवं मोक्ष काल तक ग्रहण दिखाई देगा । यह खग्रास चंद्रग्रहण संपूर्ण यूरोप, अफ्रीका, एशिया तथा आस्ट्रेलिया महाद्वीप में  दिखाई देगा न्यूजीलैंड के अधिकांश भाग में, जापान, रूस, चीन, अफ्रीका तथा यूरोप के अधिकांश भागों में दिखाई होगा ।

27 जुलाई 2018 को पड़नेवाला चंद्रग्रहण वर्तमान सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण है। इस ग्रहण का समय लगभग 4 घंटे का है। यह चंद्रग्रहण इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि इस दिन कई ऐसा संयोग बन रहे हैं जो ज्योतिष की दृष्टि से बेहद ही खास हैं।इतिहास उठाकर यदि देखा जाये तो तकरीबन 18 साल के बाद गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को ग्रहण लगने जा रहा है। इससे पूर्व में 16 जुलाई 2000 को गुरु पूर्णिमा के दिन ऐसा चंद्रग्रहण लगा था।

इस चंद्रग्रहण के दौरान मंगल और केतु के बीच त्रिग्रही योग बनेगा। केतु के साथ मकर राशि में चंद्रमा के होने से भी ग्रहण योग बन रहा है। जब चंद्रमा और केतु किसी राशि में एकसाथ होते हैं तब ही ऐसा योग बनता है।

यह चंद्र ग्रहण पूर्ण खग्रास होगा अर्थात पूरा चंद्रग्रहण। यह चंद्रग्रहण इसलिए भी अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है क्योंकि एक ही साल में यह दूसरा ब्लडमून चंद्रग्रहण होगा।

गुरु पूर्णिमा को चंद्रग्रहण होने के कारण आपको गुरु पूजन सूतक लगने से पहले ही कर लेना चाहिए. क्योंकि चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक लगेगा इसलिए बेहतर होगा कि आप दोपहर ढाई बजे तक गुरु पूजन और मंदिर दर्शन कर लें। लगभग दोपहर बाद मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे।

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