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भारत वर्ष  के उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में स्थित एक विश्व धरोहर मक़बरा है जिसे ताज महल के नाम से जाना जाता है । कहा जाता है की  Agra Tajmahal का  निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने, अपनी पत्नी मुमताज़ महल की याद में करवाया था।

ताजमहल अतुलनीय धरोहर

इसकी अद्वितीय सुंदरता को देख कर हर कोई दंंग रह जाता है । Agra Tajmahal मुग़ल वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। इसकी वास्तु शैली और बनावट में   फ़ारसी, तुर्क, भारतीय और इस्लामी वास्तुकला के घटकों का एक शानदार संयोग  है। सन् 1983 में, भारत की यह अतुलनीय धरोहर ताजमहल युनेस्को विश्व धरोहर घोषित किया गया । आपकी जानकारी के लिए बता दें की आगरा के इस ताजमहल को भारत की इस्लामी कला का रत्न भी घोषित किया  जा चूका है । इसका सफ़ेद गुम्बद एवं टाइल आकार में संगमर्मर से ढंका हुवा है। मध्य में बना मकबरा अपनी वास्तु कला में बेजोड़ सौन्दर्य के संयोजन का दर्शन करवाते हैं । Agra Tajmahal का निर्माण सन्  1648 के लगभग पूर्ण हुआ माना जाता है , कहा जाता है की उस्ताद अहमद लाहौरी इसके मुख्य रूपांकनकर्ता है।

ताजमहल का  निर्माण

Agra Tajmahal को आगरा नगर के दक्षिण छोर पर एक छोटे भूमि पठार पर बनाया गया था। कहा जाता है कि शाहजहाँ ने इसके बदले जयपुर के महाराजा जयसिंह को आगरा शहर के मध्य एक बहुत बड़ा महल दिया था। लगभग तीन एकड़ के क्षेत्र को खोदा गया, एवं उसमें कूडा़ कर्कट भर कर उसे नदी सतह से तकरीबन पचास मीटर ऊँचा बनाया गया, जिससे कि सीलन आदि से ईमारत का बचाव हो पाए. मकबरे के क्षेत्र में, पचासों कुँए खोद कर पत्थरों से भरकर नींव डालने का स्थान बनाया गया। सारी निर्माण सामग्री एवं संगमर्मर को नियत स्थान पर पहुँचाने हेतु, एक पंद्रह किलोमीटर लम्बा मिट्टी का ढाल बनाया गया। बीस से तीस बैलों को विशेष निर्मित गाडि़यों में जोतकर शिलाखण्डों को यहाँ लाया गया था। एक विस्तृत पैड़ एवं बल्ली से बनी, चरखी चलाने की प्रणाली बनाई गई, जिससे कि निर्मित  खण्डों को इच्छित स्थानों पर पहुँचाया गया। नदी से पानी लाने हेतु वही पुरानी रहट प्रणाली का प्रयोग किया गया था। उससे पानी ऊपर बने बडे़ टैंक में भरा जाता था। फिर यह तीन गौण टैंकों में भरा जाता था, जहाँ से यह पाइपों के द्वारा ज़रूरत वाले स्थानों पर पहुँचाया जाता था।

ताज का मूल आधार
आगरा ताज महल का मूल आधार एक विशालतम संरचना है। इसका मुख्य कक्ष काफी घनाकार है, जिसका प्रत्येक किनारा तकरीबन 55 मीटर का है। लम्बे किनारों पर एक भारी-भरकम पिश्ताक, या मेहराबाकार छत वाले कक्ष द्वार हैं। यह ऊपर बने मेहराब वाले छज्जे से मिला हुवा है।

ताज महल का प्रमुख मेहराब

ताज के मुख्य मेहराब के दोनों ओर, एक के ऊपर दूसरा शैलीमें, दोनों ओर दो-दो अन्य पिश्ताक़ बने हैं। इसी तर्ज पर, कक्ष के चारों किनारों पर दो-दो पिश्ताक और बने हैं। ताज महल की यह वास्तु रचना इमारत के प्रत्येक ओर पूर्णतया सममितीय है, जो कि इस इमारत को वर्ग के बजाय अष्टकोण बनाती हुई दिखती है, परंतु सभी कोने की चारों भुजाएँ बाकी चार किनारों से बहुत ही छोटी होने के कारण, इसे वर्गाकार कहना ही सही होगा। इस मकबरे के चारों ओर चार मीनारें मूल आधार चौकी के चारों कोनों में, इमारत के दृश्य को एक चौखटे में बांधती हुई दिखाई देती हैं। प्रमुख कक्ष में मुमताज महल एवं शाहजहाँ की नकली कब्रें भी हैं। ये बहुत ही खूबसूरत है, एवं इनकी असल निचले तल पर बानी हुई है।

किरीट कलश

Agra Tajmahal के मुख्य गुम्बद के किरीट पर कलश है। इसका यह शिखर कलश आरंभिक 1800 ई0 तक सोने की धातु का था और दुर्भाग्य से अब यह कांसे का बना हुवा है। यह किरीट-कलश फारसी एवं हिंन्दू वास्तु कला के घटकों का नायब सम्मिलन है। यह हिन्दू मन्दिरों के शिखर पर भी पाया जाता है। इस कलश पर चंद्रमा का चिह्न भी बना है, जिसकी नोक ऊपर स्वर्ग की ओर इशारा करती हैं। अपने नियोजन के कारण चन्द्रमा एवं कलश की नोक मिलकर एक त्रिशूल का आकार बनाती हैं, जो कि हिन्दू भगवान भूतभावन शिव का चिह्न है।

ताजमहल की सैर ( टिकट )

1 अप्रैल 2018 से ताजमहल की सैर महंगी हो गई है । पूर्व ताजमहल में प्रवेश शुल्क 40 रुपये था, जिसे बढ़ाकर 50 रुपए कर दिया गया है। खास बात यह है कि यह टिकट सिर्फ़ तीन घंटे के लिए ही मान्‍य होगा, यानी टिकट लेकर ताजमहल परिसर में केवल तीन घंटे ही रह सकते हैं।

यदि आप मुमताज की कब्र को भी देखना चाहते हैं तो आपको 200 रुपये अलग से देने होंगे। फिलहाल मुख्य मकबरे को देखने के लिए अलग से कोई चार्ज नहीं देना पड़ता है। कहा जाता है कि टिकिट दर में ये बदलाव ताजमहल को बचाने और बेहतर भीड़ प्रबंधन के लिए किए गए हैं।

July 24, 2018 0 comment
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Amarnath Yaatra

श्री अमरनाथ {Amarnath Yaatra} हिन्दुओं का एक मुख्य तीर्थस्थल है। यह भारत के कश्मीर राज्य के श्रीनगर शहर के उत्तर-पूर्व में तथा समुद्रतल से लगभग 13, 600 फुट की ऊँचाई पर स्थित है। इस गुफा की लंबाई तकरीबन 19 मीटर और चौड़ाई लगभग 16 मीटर है। अमरनाथ गुफा 11 मीटर ऊँची है। हिन्दू धर्म में अमरनाथ गुफा भगवान शिव के महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। श्री अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है क्योंकि इसी स्थान पर भूतभावन भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था।

आइये आज हम मुख्य तीर्थ स्थल अमरनाथ यात्रा {Amarnath Yaatra} के बारे में विस्तृत चर्चा करतें है। तीर्थराज केदारनाथ से कुछ आगे है अमरनाथ और उससे आगे है श्री कैलाश पर्वत। श्री कैलाश पर्वत भगवान शिव का प्रमुख समाधिस्थल है वंही श्री केदारनाथ शिव का विश्राम भवन। हिमालय पर्वत के कण-कण में भगवान भोलेनाथ का स्थान है। बाबा श्री अमरनाथ ‘बर्फानी बाबा’ कहा जाता है, जो कि अनुचित है। उन्हें बर्फानी बाबा इसलिए कहा जाता है कि उनके स्थान पर प्राकृतिक रूप से बर्फ का शिवलिंग बन जाता है।

अमरनाथ यात्रा का समय

आषाढ़ माह की पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबंधन तक पूरे सावन महीने में होने वाले पवित्र हिमलिंग (बाबा अमरनाथ) का दर्शन के लिए लाखों लोग यहाँ आते हैं। यहीं पर एक ऐसी जगह है, जिसमें टपकने वाली हिम बूँदों से तक़रीबन दस फुट लंबा शिवलिंग बनता है। चाँद के घटने-बढ़ने के साथ-साथ इस शिव लिंग का आकार भी घटता-बढ़ता रहता है। सावन माह की पूर्णिमा को यह शिव लिंग अपने पूरे आकार में आ जाता है और अमावस्या तक धीरे-धीरे छोटा होता जाता है। चमत्कार वाली बात यही है कि यह शिवलिंग ठोस बर्फ का बना होता है, जबकि गुफा में आमतौर पर जो बर्फ की बुँदे रहती है वह हाथ लगते ही बिखर जाती है।

अमरनाथ यात्रा मार्ग

अमरनाथ यात्रा {Amarnath Yaatra} पर जाने के भी दो रास्ते हैं। पहला पहलगाम होकर और दूसरा सोनमर्ग बालटाल से। अर्थात आप पहलगाम और बालटाल तक किसी भी सवारी से पहुँचें, यहाँ से आगे जाने के लिए आपको अपने पैरों का ही उपयोग करना होगा। रोगी या वृद्धों के लिए सवारियों का बंदोबस्त किया जा सकता है। साधारणतः पहलगाम से जानेवाले रास्ते को अधिक सरल और सुविधाजनक समझा जाता है। हालाकिं बालटाल से अमरनाथ गुफा की दूरी मात्र 14 किलोमीटर है और यह अत्यधिक दुर्गम रास्ता है और सुरक्षा की दृष्टि से भी बहुत ही संदिग्ध रास्ता है। यही कारण है कि भारत सरकार इस मार्ग को सुरक्षित नहीं मानती और अधिकांश यात्रियों को पहलगाम के रास्ते अमरनाथ जाने के लिए आग्रह करती है। लेकिन फिर भी रोमांच और जोखिम लेने का शौक रखने वाले लोग इस मार्ग से यात्रा करना पसंद करते हैं। इस मार्ग से जाने वाले लोग अपने स्वयं के जोखिम पर यात्रा करते है। रास्ते में किसी अनहोनी के लिए भारत सरकार ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।

पहलगाम जम्मू से तकरीबन 315 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह एक सुन्दर पर्यटन स्थल भी है और यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता है। पहलगाम तक जाने के लिए जम्मू-कश्मीर पर्यटन विभाग द्वारा संचालित सरकारी बस भी उपलब्ध रहती है। पहलगाम में दानदाताओं की ओर से लंगर की व्यवस्था की भी जाती है। अमरनाथ तीर्थयात्रियों (Amarnath Yaatra) की पैदल यात्रा यहीं से शुरू होती है।

पहलगाम के बाद यात्रा का पहला पड़ाव चंदनबाड़ी है, जो पहलगाम से लगभग आठ किलोमीटर की दूरी पर है। पहली रात दर्शनार्थी यहीं पर विश्राम करतें है। यहाँ रात को रुकने के लिए कैंप लगाए जाते हैं। पश्चात दूसरे दिन पिस्सु घाटी की चढ़ाई शुरू करतें है। माना जाता है कि पिस्सु घाटी पर किसी समय देवताओं और राक्षसों के बीच घमासान युध्य हुवा जिसमें राक्षसों की सेना की हार हुई. लिद्दर नदी के किनारे की प्रथम चरण की यह यात्रा कुछ सुगम है।

अमरनाथ यात्रा के पड़ाव में पिस्सू घाटी बहुत ही जोखिम भरा स्थल है। पिस्सू घाटी समुद्रतल से लगभग 11120 फुट की ऊँचाई पर है। दर्शनार्थी शेषनाग पहुँच कर ही ताजादम होते हैं। यहाँ पर्वतमालाओं के बीच नीले पानी की बहुत ही खूबसूरत झील है। किंवदंतियों के मुताबिक शेषनाग झील में शेषनाग का वास है और चौबीस घंटों के अंदर शेषनाग एक बार झील के बाहर दर्शन देते हैं, लेकिन यह दर्शन खुशनसीबों को ही नसीब होते हैं। दर्शनार्थी यहाँ रात में विश्राम करते हैं और सुबह यहीं से तीसरे दिन की यात्रा आरम्भ करते हैं।

शेषनाग से पंचतरणी लगभग आठ मील की दुरी पर है। रस्ते में बैववैल टॉप और महागुणास दर्रे को पार करना पड़ता हैं।

बाबा अमरनाथ {Amarnath Yaatra} की गुफा यहाँ से मात्र आठ किलोमीटर दूर रह जाती हैं और बाकी पूरे रास्ते में बर्फ ही बर्फ जमी रहती है। इसी दिन गुफा के नजदीक पहुँच कर पड़ाव डाल रात बिता सकते हैं और दूसरे दिन सुबह पूजा अर्चना कर पंचतरणी वापस आया जा सकता।

July 23, 2018 0 comment
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H-1B

H-1B वीजा एक नॉन-इमिग्रेंट वीजा है। इसके तहत अमेरिकी कंपनियां विदेशी थ्योरिटिकल या टेक्निकल एक्सपर्ट्स को अपने यहाँ रख सकती हैं। H-1B वीजा के तहत टेक्नोलॉजी कंपनियां हर साल हजारों इम्प्लॉइज की भर्ती करती हैं।  USCIS जनरल कैटेगरी में 65 हजार फॉरेन इम्प्लॉइज और हायर एजुकेशन (मास्टर्स डिग्री या उससे ज्यादा) के लिए 20 हजार स्टूडेंट्स को एच-1बी वीजा जारी करता है।

अप्रैल 2017 में यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेस (USCIS) ने 1 लाख 99 हजार H-1B पिटीशन रिसीव किया। अमेरिका ने 2015 में 1 लाख 72 हजार 748 वीजा जारी किए, यानी 103% ज्यादा। ये स्टूडेंट्स यूएस के किसी संस्थान में पढ़े हुए होने चाहिए. इनके सब्जेक्ट साइंस, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और मैथ्स होने चाहिए ।

बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन’ की नीति के अनुरूप अमेरिका में ट्रंप प्रशासन एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रहा है जिससे बड़ी संख्या में भारतीयों को अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्यॉरिटी (डीएचएस) के साथ मेमो के रूप में साझा किया गया यह प्रस्ताव उन विदेशी वर्करों को अपना H-1B वीजा रखने से रोक सकता है जिनके ग्रीन कार्ड आवेदन लंबित पड़े हों।

अमेरिकी सरकार के इस कदम से अमेरिका में हजारों भारतीय एंप्लॉयीज का  H-1B वीजा एक्सटेंड नहीं किया जाएगा क्योंकि अमेरिका में स्थायी निवास की अनुमति देनेवाला उनका ग्रीन कार्ड आवेदन लंबित है। इस नए कानून से प्रभावित होनेवाले भारतीयों में बड़ी तादाद आईटी सेक्टर में काम करनेवाले एंप्लॉयीज की है। मौजूदा नियम में ग्रीन कार्ड आवेदनों के लंबित रहने के मद्देनजर अभी 2-3 साल के लिए  H-1B वीजा की मान्यता बढ़ाने की अनुमित मिली हुई है। अगर नया नियम लागू हो जाता है तो H-1B वीजा धारक 50, 000 से 75, 000 भारतीयों को अमेरिका छोड़कर देश वापस आना पड़ सकता है।

मिडीया में खबर है कि सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री की संस्था नैस्कॉम वीजा सम्बंधी मुद्दों को लेकर अमेरिकी सांसदों और प्रशासन के सामने अपनी चिंता प्रकट कर चुका है और अगले कुछ हफ्तों में प्रस्तावित कानून पर भी बातचीत कर सकता है। दरअसल, अमेरिकी प्रशासन का यह कदम उसके प्रस्तावित ‘Protect and Grow American Jobs (अमेरिकी नौकरियों का संरक्षण और वृद्धि)’ बिल के फलस्वरूप उठाया है। इस बिल में H-1B वीजा के दुरुपयोग रोकने के लिए नए प्रतिबंध प्रस्तावित हैं। इसके तहत, न्यूनतम वेतन और टैलंट के मूवमेंट को लेकर नई पाबंदियां लगाए जाने की बात कही गई है।

न्यूनतम वेतन में बड़ी वृद्धि के साथ नए वीजा नियम में क्लायंट्स को यह बताने को बाध्य किया जा रहा है कि वह नई नियुक्ति से मौजूदा वर्कर के अगले 5 से 6 साल तक की नौकरी पर खतरा नहीं होने की गारंटी दें। अमेरिका हर साल 85, 000 नॉन-इमिग्रंट H-1B वीजा जबकि 65, 000 विदेशियों को विदेशों में नियुक्ति और अमेरिकी स्कूल-कॉलेजों के अडवांस डिग्री कोर्सेज में दाखिले के लिए 20, 000 लोगों को वीजा प्रदान करता है। इन कोटे का 70 प्रतिशत वीजा भारतीयों के हाथ ही लगता है। इनमें ज्यादातर को आईटी कंपनियां नियुक्त करती हैं।

January 8, 2018 0 comment
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Delhi Metro

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  25 दिसंबर को जब मेट्रो की मजेंटा लाइन का उद्घाटन किया तब दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) अपने  15 साल  पूरा कर रही थी । यानि इसकी शुरुआत  25 दिसंबर, 2002 को हुई थी जब शाहदरा से तीस हजारी के बीच 8.5 किलोमीटर के रास्ते का उद्घाटन हुआ था। इन सालों में यह दिल्ली वासियों के जीने का तरीका बन गई है। आज यह 230 किलोमीटर से अधिक के दायरे में फैली है।

आज दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) सार्वजनिक परिवहन की रीढ़ बन चुकी है। इसके 3000 ट्रेन हर दिन 25 लाख लोगों को सवारी कराते हैं। दिल्ली मेट्रो ने न सिर्फ़ लोगों के ट्रैवल के तरीके में ही बल्कि उनके पब्लिक में व्यवहार करने के तरीके में भी बदलाव किया है। उत्कृष्टता, पेशेवराना अंदाज और समय की पाबंदी को लेकर इसने जो बेंचमार्क खड़ा किया है इस वजह से सरकारी संस्थानों को लेकर लोगों के नज़रिए में बदलाव देखने को मिला है। वह तारीफ काबिल है।

बहुत कम लोगों को याद होगा जब कश्मीरी गेट पर एक होर्डिंग लगी होती थी कि ‘दिल्ली मेट्रो जल्द आ रही है’। फ्लाईओवर निर्माण के दौरान जहां हर तरफ सड़कें उधड़ी नजर आती थीं और निर्माण में इस्तेमाल सामग्री बिखरी पड़ी रहती थीं, इसके उलट मेट्रो निर्माण के वक्त दिल्लीवासियों ने बैरिकेड के पीछे से हो रहे काम को देखा। ट्रैफिक को भी इस तरह मैनेज किया गया ताकि लोगों को कम से कम परेशानी हो ।

दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro)  की शुरुआत में इसके पास इंजिनियरिंग से जुड़ी दिक्कतें थीं जब यमुना के ऊपर ब्रिज बनाना था और सुरंगें बनानी थीं। कुछ दुर्घटनाओं के अलावा दिल्ली मेट्रो का रेकॉर्ड इस लिहाज से अच्छा रहा है। दिल्ली मेट्रो ने 15 साल पूरे कर लिए हैं और अब अपने 5वें फेज की शुरुआत की दिशा में देख रही है। अब अगले पांच सालों में दिल्ली मेट्रो विश्व के सबसे लंबे मेट्रो नेटवर्क के बराबर होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने सोमवार २५ दिसम्बर को दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) की 12.64 किलोमीटर लंबी मजेंटा लाइन का उद्घाटन किया । यह लाइन नोएडा के बॉटनिकल गार्डन को दक्षिण दिल्ली के कालकाजी मंदिर स्टेशन से जोड़ती है। नई रूट का उद्घाटन करने के बाद पीएम मोदी मेट्रो ट्रेन में बैठकर ओखला बैराज मेट्रो स्टेशन तक गए थे  । दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) का यह पहला रूट होगा जिसपर आॅटोमैटिक आॅपरेट होने वाली मेट्रो ट्रेनें चलेंगी।

नोएडा के बॉटेनिकल गार्डन से दिल्ली के कालकाजी मंदिर मेट्रो स्टेशन की दूरी मजेंटा लाइन मेट्रो ट्रेन के जरिये महज 19 मिनट में तय की जा सकेगी। यहां से हरियाणा के फरीदाबाद की दूरी भी 14.64 किलोमीटर कम हो जाएगी। सोमवार शाम पांच बजे से जनता के लिए खोले जाने के बाद यह मेट्रो लाइन जहां समय की बचत करेगी, वहीं किराया भी घटाएगी।

December 26, 2017 0 comment
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hill station

मध्य प्रदेश का स्वर्ग पचमढ़ी पर्यटन स्थल (Hill Station)

सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच होने और अपने सुंदर स्थलों के कारण इसे सतपुड़ा की रानी भी कहा जाता है। पचमढ़ी सदाबहार सतपुड़ा पर्वत श्रेणी पर सुंदर पहाड़ियों से घिरा पठार है, जिसे पर्यटक प्यार से सतपुड़ा की रानी कहते हैं। इस पठार का वनक्षेत्र सहित कुल क्षेत्र लगभग ६० वर्ग किमी है। सामान्य मान्यता के अनुसार पचमढ़ी नाम, पंचमढ़ी या पांडवों की पांच गुफा से व्युत्पन्न है, जिनके सम्बंध में माना जाता है कि उन्होंने इस क्षेत्र में अपना अज्ञातवास का अधिकांश समय बिताया था। अंग्रेजों के शासन काल में पचमढ़ी मध्य प्रांत की राजधानी थी। अभी भी मध्यप्रदेश के मंत्रियों तथा उच्च शासकीय अधिकारियों के कार्यालय, कुछ दिनों के लिए पचमढ़ी में लगते हैं। ग्रीष्म काल में यहाँ अधिकारियों की अनेक बैठकें भी होती है। यह आरोग्य निवास के रूप में उपयोगी है।

मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थित पचमढ़ी मध्य भारत का सबसे खूबसूरत तथा पर्यटन स्थल (Hill Station) है। यहाँ के हरे-भरे और शांत वातावरण में बहुत-सी नदियों और झरनों के गीत पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। इसके साथ ही यहाँ शिवशंकर के और भी कई मंदिर भी है, जो आपको तीर्थयात्रा का सुकून देते हैं। वैसे तो ऐसा बहुत कम होता है कि आप कहीं छुट्टी मनाने जाएं और लगे हाथ आपकी तीर्थयात्रा भी हो जाए. लेकिन यकीन मानिए, अगर आप मध्यप्रदेश के एकमात्र पर्वतीय पर्यटन स्थल (Hill Station) पचमढ़ी जाएंगे, तो प्रकृति का भरपूर आनंद उठाने के साथ आपकी तीर्थयात्रा भी हो जाएगी।

कैलाश के बाद पचमढ़ी: दरअसल, आप पचमढ़ी को कैलाश पर्वत के बाद महादेव का दूसरा घर कह सकते हैं। हमारी पौराणिक कथाओं के अनुसार, भस्मासुर (जिसे खुद महादेव ने यह वरदान दिया था कि वह जिसके सिर पर हाथ रखेगा वह भस्म हो जाएगा और भस्मासुर ने यह वरदान खुद शिवजी पर ही आजमाना चाहा था) से बचने के लिए भगवान शिव ने जिन कंदाराओं और खोहों की शरण ली थी वह सभी पचमढ़ी में ही स्थित है। शायद इसलिए यहाँ भगवान शिव के कई मंदिर दिखते हैं। पचमढ़ी पांडवों के लिए भी जानी जाती है। यहाँ की मान्यताओं के अनुसार पांडवों ने अपने अज्ञातवास का कुछ काल यहाँ भी बिताया था और यहाँ उनकी पांच कुटिया या मढ़ी या पांच गुफाएं थीं जिसके नाम पर इस स्थान का नाम पचमढ़ी पड़ा है।

पौराणिक कथाओं से बाहर आकर आज की बात करें तो मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थित पचमढ़ी समुद्रतल से लगभग 1, 067 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

पचमढ़ी  दर्शन

प्रियदर्शिनी प्‍वाइंट: यहाँ से सूर्यास्त का दृश्य बहुत ही लुभावना लगता है। तीन पहाड़ी शिखर बायीं तरफ चौरादेव, बीच में महादेव तथा दायीं ओर धूपगढ़ दिखाई देते हैं। इनमें धूपगढ़ सबसे ऊँची चोटी है।

रजत प्रपात: यह अप्सरा विहार से आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 350 फुट की ऊँचाई से गिरता इसका जल इसका जल एकदम दूधिया चाँदी की तरह दिखाई पड़ता है।

बी फॉल: यह जमुना प्रपात के नाम से भी जाना जाता है। यह नगर से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पिकनिक मनाने के लिए यह एक आदर्श जगह है।

राजेंद्र गिरि: इस पहाड़ी का नाम राष्ट्रपति डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद के नाम पर रखा गया है। सन 1953 में डॉ॰प्रसाद स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के लिए यहाँ आकर रुके थे और उनके लिए यहाँ रविशंकर भवन बनवाया गया था। इस भवन के चारों ओर प्रकृति की असीम सुंदरता बिखरी पड़ी है।

हांडी खोह: यह खाई पचमढ़ी की सबसे गहरी खाई है जो 300 फीट गहरी है। यह घने जंगलों से ढँकी है और यहाँ कल-कल बहते पानी की आवाज सुनना बहुत ही सुकूनदायक लगता है। वनों के घनेपन के कारण जल दिखाई नहीं देता; पौराणिक संदर्भ कहते हैं कि भगवान शिव ने यहाँ एक बड़े राक्षस रूपी सर्प को चट्टान के नीचे दबाकर रखा था। स्थानीय लोग इसे अंधी खोह भी कहते हैं जो अपने नाम को सार्थक करती है, यहाँ बने रेलिंग प्लेटफार्म से घाटी का नजारा बहुत सुंदर दिखता है।

जटाशंकर गुफा: यह एक पवित्र गुफा है जो पचमढ़ी कस्बे से 1.5 किलोमीटर दूरी पर है। यहाँ तक पहुँचने के लिए कुछ दूर तक पैदल चलना पड़ता है। मंदिर में शिवलिंग प्राकृतिक रूप से बना हुआ है। यहाँ एक ही चट्टान पर बनी हनुमानजी की मूर्ति भी एक मंदिर में स्थित है। पास ही में हार्पर की गुफा भी है।

पांडव गुफा: महाभारत काल की मानी जाने वाली पाँच गुफाएँ यहाँ हैं जिनमें द्रौपदी कोठरी और भीम कोठरी प्रमुख हैं। पुरातत्वविद मानते हैं कि ये गुफाएँ गुप्तकाल की हैं जिन्हें बौद्ध भिक्षुओं ने बनवाया था।

अप्सरा विहार: पांडव गुफाओं से आगे चलने पर 30 फीट गहरा एक ताल है जिसमें नहाने और तैरने का आनंद लिया जा सकता है। इसमें एक झरना आकर गिरता है।

November 23, 2017 0 comment
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Vijayasan Dham

मध्य प्रदेश के सलकनपुर का माँ विजयासन धाम (Vijayasan Dham) प्रसिद्ध शक्तिपीठों में शामिल है। इसकी स्थापना का समय स्पष्ट रूप से ज्ञात नहीं लेकिन इतना ज्ञात है कि इस मंदिर का निर्माण 1100 ई. के करीब गौंड राजाओं द्वारा किला गिन्नौरगढ़ निर्माण के दौरान करवाया गया था। प्रसिद्ध संत भद्रानंद स्वामी ने माँ विजयासन धाम (Vijayasan Dham) में कठोर तपस्या की। उन्होंने नल योगिनियों की स्थापना कर क्षेत्र को सिद्ध शक्तिपीठ बनाया था। लाखों देवी भक्त इस तपस्या स्थली पर पहुंचते हैं और मन्नत मांगते हैं।

एक पौराणिक कथा के अनुसार जब रक्तबीज नामक देत्य से त्रस्त होकर जब सभी देवता देवी की शरण में पहुंचे। तो देवी ने विकराल रूप धारण कर लिया और इसी स्थान पर रक्तबीज का संहार कर उस पर विजय पाई. माँ भगवति की इस विजय पर देवताओं ने जो आसन दिया, वही विजयासन धाम (Vijayasan Dham) के नाम से विख्यात हुआ। माँ का यह रूप विजयासन देवी कहलाया।

इसी पहाड़ी पर सैकड़ों जगहों पर रक्तबीज से युद्ध के अवशेष नजर आते हैं। नवरात्र में इस स्थान पर लाखों श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर चढ़ावा-चढ़ाने, जमाल चोटी उतारने और तुलादान कराने पहुंचते हैं। परिसर सर्वसुविधायुक्त है।

सलकनपुर में विराजी सिद्धेश्वरी माँ विजयासन (Vijayasan Dham) की ये स्वयंभू प्रतिमा माता पार्वती की है जो वात्सल्य भाव से अपनी गोद में भगवान श्री गणेश को लिए हुए बैठी हैं। इसी मंदिर में महालक्ष्मी, महासरस्वती और भगवान भैरव भी विराजमान हैं यानी इस एक मंदिर में कई देवी-देवताओं के आशीर्वाद का सौभाग्य भक्तों को प्राप्त होता है।

मध्य प्रदेश के जिला मुख्यालय सीहोर से 90 किमी दूर रेहटी तहसील में स्थित है सलकनपुर। यंहा पहुंचने के लिए भोपाल से 75 किमी की दूरी पर है। होशंगाबाद से 40 किमी की दूरी पर, इंदौर से 180 किमी की दूरी पर माँ विजयासन धाम (Vijayasan Dham) पहुंचा जा सकता है।

सलकनपुर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिये लगभग 1000 से भी कंही  अधिक सीढ़ियों के रास्ते से गुजरना होता है।  किन्तु वर्तमान में सीढ़ियों के अलावा रोप वे मंदिर तक  पहुंचने का साधन है जिसका  कुछ शुल्क देना होता  है । आप कार तथा  बाइक की सहायता से सीधे रोड से भी मंदिर तक  पंहुच सकते है। बरसात के मौसम में यंहा की प्राकृतिक सौंदर्यता  देखते ही बनती है ।

November 20, 2017 0 comment
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kingdom of dixit

इंदौर शहर के सुयश दीक्षित ने सूडान और मिस्त्र के बीच 800 वर्ग मील के क्षेत्र पर अपना झंडा लगाकर उसे ‘किंगडम ऑफ दीक्षित (kingdom of dixit) घोषित किया हुवा है। उन्होंने खुद को इस गैर दावाग्रस्त इलाके का राजा बताते हुए संयुक्त राष्ट्र से उनके नए देश को मान्यता देने की बात कही है। इतना ही नहीं सुयश ने एक वेबसाइट बनाकर लोगों से इस देश की नागरिकता के लेने का आवदेन करने को भी कहा है।

कुछ दिन से सोशल मीडिया पर एक खबर वायरल हो रही थी। जिसमें भारत के यानी इंदौर के एक लड़के ने अपना देश बनाया था। उसने अपने पापा को पीएम और खुद को राजा बना दिया था। सोशल मीडिया पर खबर वायरल हुई तो हर जगह इसकी चर्चा होने लगी। सभी सोच में पड़ गए कि आखिर कोई कैसे अपना देश बना सकता है।

लेकिन यंहा आपको बता दें, देश बनाना इतना आसान नहीं है। सुयश के हिसाब से तो वह जमीन उसकी है लेकिन दुनिया के हिसाब से नहीं। जहां सुयश ने किंगडम ऑफ दीक्षित (kingdom of dixit) बताया है उस जगह का नाम बिर ताविल है।

क्या है और कँहा  है बिर तविल ?

मिडिया के अनुसार ये जमीन सुडान और इजिप्ट के बीच में पड़ती है जहां न सुडान का रूल है और न ही इजिप्ट का। यहाँ किसी भी सरकार का कोई लॉ फॉलो नहीं होता है और अभी तक यहाँ कोई रहता भी नहीं। द गार्जियन की रिपोर्ट की मानें तो सुडान के मैप में ये जगह इजिप्ट के हिस्से में आती है। लेकिन दोनों ही देश इसे अपना मानने से इंकार करते हैं।

मीडिया की अगर मानें तो इजिप्ट के मैप में भी ये जगह उनकी नहीं है। लेकिन फिर भी ये जगह इजिप्ट सरकार के अंतरगत आती है। सुयश के फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि इजिप्ट आर्मी से परमीशन लेकर यहाँ जाना पड़ता है और वहाँ जो वह नियम बताएंगे उनको फॉलो करना पड़ेगा।

सुयश के अनुसार तो वह यहाँ का राजा है लेकिन असल में वह है नहीं। अगर वह जगह किसी की नहीं है तो वह खुद का देश घोषित ही नहीं कर सकता। सुयश दीक्षित ने कहा है कि वह UN से देश बनाने के लिए बात करेगा। वॉशिंगटन पोस्ट को दिए इंटरव्यू में यूएन ऑफिशियल ने बताया था कि नए देश की मान्यता लेने के लिए पड़ोसी देशों को हामी भरना ज़रूरी है। बिना उनके नया देश नहीं बन सकता।

सुयश पिछले दिनों अपनी कंपनी के ऑफिशियल ट्रिप पर इजिप्ट गए थे। उन्होंने बीर तवील के नो मैन्स लैंड के बारे में पहले से जानकारी जुटा रखी थी।

इजिप्ट से एक कार लेकर सुयश बीर तवील के लिए निकले 319 किमी की ड्राइविंग के बाद 5 नवंबर को वह इस इलाके में दाखिल हुए | आगे रेगिस्तानी इलाका था और वहाँ जाने के लिए कोई सड़क भी नहीं थी। फिर सुयश ने कुछ पौधे के बीज बोए | अपनी कार से पानी निकालकर पौधे को सींचा और फिर पूरे इलाके को अपना देश घोषित कर दिया।

इस बात का जिक्र उन्होंने सात नवंबर को अपने फेसबुक (Facebook)पर भी किया है। हम में से किसी को भी नहीं पता है, की भविष्य के गर्भ में क्या छुपा हुवा है, इसीलिए सिर्फ इतना ही कह सकते हैं की आगे-आगे देखिये होता है क्या।

November 18, 2017 0 comment
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Mysterious Places

ज्ञानियों तथा ऋषि-मुनियों और अवतारों की भूमि ‘भारतवर्ष’ एक रहस्यमय (Mysterious Places) देश है। यदि दुनियां में धर्म कहीं है तो सिर्फ़ यहीं है। यदि संत कहीं हैं तो सिर्फ़ यहीं हैं। माना कि आजकल धर्म, अधर्म की राह पर चल पड़ा है। माना कि अब नकली संतों की भरमार है फिर भी यहाँ की भूमि ही धर्म और संत है। भारत भूमि को देवभूमि कहा जाता है। हिन्दुकुश पर्वत माला से लेकर अरुणाचल तक और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भी भूमि को भारत कहा जाता है।

आओ जानते हैं हम भारत के वे प्रमुख रहस्यमय स्थान (Mysterious Places) जिनका ऐतिहासिक और प्राचीन महत्त्व है ही साथ ही जहां जाकर आप महसूस करेंगे कि कुछ अलग जगह पर आ गए हैं। रहस्य और रोमांच से भरे ऐसे हमने 12 स्थान ढूंढे हैं। इन स्थानों का धार्मिक महत्त्व से कहीं ज़्यादा ऐतिहासिक महत्त्व है। इन स्थानों पर अभी और भी शोध किए जाने की आवश्यकता है। इन स्थानों पर जाने से आपको इन स्थानों से जुड़े रहस्यों का पता चलेगा। यह ऐसे स्थान हैं जिनके आसपास कई प्राचीन और रहस्यमय स्थान मौजूद हैं। यदि आप यहाँ जाना चाहते हैं तो इन स्थानों की अच्छे से स्टडी करके जाएं।

पुष्करराज, राजस्थान का रेगिस्तान और सरस्वती नदी

राजस्थान का रेगिस्तान अपने आप में एक रहस्य है। राजस्थान के बीच में से ही सरस्वती नदी बहती थी और यहाँ पर ही दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यता रहती थी। आज भी सरस्वती की सभ्यता खोजी जाना बाकी है। कहा जाता है कि सरस्वती नदी के तट पर ही बैठकर ऋषियों ने वेद और स्मृति ग्रंथ लिखे थे। पुष्कर राजस्थान के लगभग बीचोबीच स्थित है। पुष्कर में ब्रह्माजी के एकमात्र मंदिर है। तीर्थ तो बहुत हैं लेकिन पुष्कर एक तीर्थस्थल है इसलिए इसका जिक्र नहीं किया जा रहा। पुष्कर उस प्राचीन सभ्यता का केंद्र है, जो कभी 4,000 वर्ष पूर्व अर्थात महाभारतकाल तक अस्तित्व में थी।

भारत में झीलें बहुत हैं, जैसे महाराष्ट्र में लोणार की झील, जयपुर और उदयपुर की झीलें लेकिन पुष्कर में स्थित झील का महत्त्व कुछ और ही है। इस रहस्यमय झील और आसपास के क्षेत्र पर शोध किए जाने की आवश्यकता है। अजमेर से मात्र 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है तीर्थस्थल पुष्कर।

महाबलीपुरम: महाबलीपुरम एक ऐतिहासिक रहस्यमय नगर है। यहाँ का प्रथम राजा, राजा बली था इसीलिए इसका नाम महाबलीपुरम है। हालांकि यह नगर कई बार उजाड़ हो गया लेकिन मध्यकाल में इसे पल्लव राजाओं ने फिर से आबाद किया। वामन भगवान ने दैत्यराज बली को पृथ्वी का दान इसी स्थान पर दिया गया था। इससे इस नगर की प्राचीनता का अनुमान लगाया जा सकता है। महाबली राजा बली के 10 रहस्य, जानिए

यह नगर पूर्वोत्तर तमिलनाडु राज्य, दक्षिण भारत में स्थित है। प्राचीनकाल में महाबलीपुरम एक महानगर था। यहाँ पर विशालकाय और अद्भुत मंदिरों की एक शृंखला है जिसका एक भाग अब समुद्र में समा गया है। यहाँ सैकड़ों मंदिर और गुफाएं हैं, जो अपने आप में एक रहस्य हैं। दुनियाभर से लाखों पर्यटक इस शहर को देखने के लिए आते हैं। भारत के 7 आश्चर्यों में से एक महाबलीपुरम में दफन है प्राचीन भारत का रहस्यमय इतिहास।

यह नगर बंगाल की खाड़ी पर चेन्नई (भूतपूर्व मद्रास) से 60 किलोमीटर दूर स्थित है। इसका एक अन्य प्राचीन नाम बाणपुर भी है। महाबलीपुरम तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले में है। इस रहस्यमय नगर पर शोध किए जाने की आवश्यकता है।

हम्पी और किष्किंधा : दक्षिण भारत के कर्नाटक का छोटा-सा गांव है हम्पी, यूनेस्को की विश्व विरासत की लिस्ट में शामिल हम्पी भारत का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। हम्पी कर्नाटक राज्य का हिस्सा है। हम्पी बेलगांव से 190 किलोमीटर दूर, बेंगलुरु से 350 किलोमीटर दूर और गोवा से 312 किलोमीटर दूर है। मंदिरों का यह प्राचीन शहर मध्यकाल में हिन्दू राज्य विजयनगर साम्राज्य की राजधानी था।

हम्पी में बने दर्शनीय स्थलों में सम्मिलित हैं-विरुपाक्ष मंदिर, रघुनाथ मंदिर, नरसिम्हा मंदिर, सुग्रीव गुफा, विठाला मंदिर, कृष्ण मंदिर, हजारा राम मंदिर, कमल महल और महानवमी डिब्बा। हम्पी से 6 किलोमीटर दूर तुंगभद्रा बांध है। हमने हम्पी को इसलिए लिया, क्योंकि यह कभी राम के काल में किष्किंधा क्षेत्र में हुआ करता था। यह किष्किंधा का केंद्र था। आजकल होसपेट स्टेशन से ढाई मील दूरी पर और बेल्लारी से 60 मील उत्तर की ओर स्थित एक पहाड़ी स्थान को किष्किंधा कहा जाता है। रामायण के अनुसार यह वानरों की राजधानी थी। यहाँ ऋष्यमूक पर्वत के आसपास तुंगभद्रा नदी बहती है। ऋष्यमूक पर्वत तथा तुंगभद्रा के घेरे को चक्रतीर्थ कहते हैं। रामायणकाल में किष्किंधा वानर राज बाली का राज्य था। कर्नाटक के दो जिले कोप्पल और बेल्लारी को मिलाकर किष्किंधा राज्य बनता है।

किष्किंधा में घूमने के लिए कई स्थान हैं। ब्रह्माजी का बनाया हुआ पम्पा सरोवर है। हनुमानजी की जन्मस्थली आंजनाद्रि पर्वत है। बाली की गुफा और सुग्रीव का निवास स्थान ऋषम्यूक पर्वत भी यहीं स्थित है। चिंतामणि मंदिर, जहां से राम ने बाली के ऊपर तीर चलाया था, वह भी इसी जगह के अंतर्गत आता है। ये सब किष्किंधा के कोप्पल जिले वाले भाग में आते हैं। बेल्लारी जिले के अंतर्गत आने वाले किष्किंधा के दूसरे भाग में भगवान राम ने जहां चार्तुमास किया था, वह माल्यवंत पर्वत और हनुमान आदि वानरों ने सीता का पता लगाकर लौटते वक्त जिस वन में फल खाए थे, वह मधुवन यहाँ पड़ता है। इसके अलावा भी कई छोटे-बड़े मंदिर और शिवलिंग यहाँ स्थित हैं।

कन्याकुमारी मंदिर, दक्षिण भारत :

कन्याकुमारी प्वांइट को भारत का सबसे निचला हिस्सा माना जा है। यहाँ समुद्र तट पर ही कुमारी देवी का मंदिर है। यहाँ माँ पार्वती के कन्या रूप को पूजा जाता है। यह देश में एकमात्र ऐसी जगह है जहां मंदिर में प्रवेश करने के लिए पुरूषों को कमर से ऊपर के क्लॉथ्स उतारने होंगे। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान पर देवी का विवाह संपन्न न हाे पाने के कारण बचे हुए दाल-चावन बाद में कंकड़-पत्थर बन गए. कहा जाता है इसलिए ही कन्याकुमारी के बीच या रेत में दाल और चावल के रंग-रूप वाले कंकड़ बहुत मिलते हैं। आश्चर्य भरा सवाल तो यह भी है कि ये कंकड़-पत्थर दाल या चावल के आकार जितने ही देखे जा सकते हैं।

यदि आप मंदिर दर्शन को गए हैं तो यहाँ सूर्योदय और सूर्यास्त भी देखें। कन्याकुमारी अपने ‘सनराइज’ दृश्य के लिए काफी प्रसिद्ध है। सुबह हर विश्रामालय की छत पर टूरिस्टों की भारी भीड़ सूरज की अगवानी के लिए जमा हो जाती है। शाम को अरब सागर में डूबते सूरज को देखना भी यादगार होता है। उत्तर की ओर करीब 2-3 किलोमीटर दूर एक सनसेट प्वॉइंट भी यहाँ है।

November 14, 2017 0 comment
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World Tour

अधिकांश लोगों की हमेशा विदेश घूमने (World Tour) की इच्छा रहती है। बहुत से लोग अपने जीवन में  कम से कम एक बार लोग विदेश की सैर (World Tour) करना चाहते हैं। लेकिन ज़्यादा पैसे खर्च होने के डर से लोगों की यह इच्छा पूरी नहीं हो पाती है। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा की कुछ देशों की सैर कम खर्च में भी हो सकती है। दुनिया के कुछ खूबसूरत देश हैं। जहां घूमना इतना सस्ता है कि आप सोच भी नहीं सकते, इन खूबसूरत देशों की सैर करके आप अपनी छुट्टियों को यादगार बना सकते हैं।

आइये जानते है ऐसे कुछ देश जिनकी  सैर आप कम बजट में भी कर सकते हैं ।

सिंगापुर

अगर आप दक्षिण-पूर्व एशिया में सुंदर, सुरुचिपूर्ण और व्यवस्थित देश घूमना चाहते हैं तो सिंगापुर सबसे अच्छी जगह हो सकता है। यह छोटा-सा द्वीप अपनी आधुनिकता से सबको प्रभावित करता है। सैंटोसा आईलैंड, अंडरवाटर व‌र्ल्ड, डॉलफिन शो, जूरोंग बर्ड पार्क, नाइट सफारी आदि इसके खास आकर्षण हैं। सिंगापुर की चार दिन की यात्रा पर आपको लगभग 40 हजार रुपये खर्च करने होंगे। कुछ टूर आपरेटर सिंगापुर-मलेशिया या मलेशिया-थाईलैंड के संयुक्त टूर भी उपलब्ध कराते हैं। जिनकी कीमत में अधिक अंतर न होने से आप चाहें तो इनमें से कोई भी चुन सकते हैं। एक बार में दो देशों के भ्रमण का खर्च 50 हजार रुपये के आसपास आता है। सिंगापुर के प्रसिद्ध चांगी एयरपोर्ट तक सिंगापुर एयरलाइंस या इंडियन एयरलाइंस से पहुंच सकते हैं।

नेपाल

आप नेपाल की सैर (Nepal tour) का प्रोग्राम भी बना सकतें है।

नेपाल का फ्लाइट, घूमने-फिरने, ठहरने और खाने के कुल खर्च को मिलाकर 40 से 45 हजार में नेपाल की सैर का आनंद उठा सकते हैं। नेपाल को देवताओं का घर कहा जाता है। इस देश में 600 रुपये में तीन वक्त का खाना और लगभग 270 रूपये में होटल का कमरा बुक कर सकते हैं।

चीन

चीन में घूमने-फिरने, ठहरने और फ्लाइट का खर्च 40 से 45 हजार के बजट में हो जाएगा। यहाँ एक जगह से दूसरी जगह तक जाने के लिए केवल 66 रुपए खर्च करने होंगे। शंघाई बंड्स, चीन की दीवार, फोरबिडन सिटी और टेराकोटा आर्मी यहाँ के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं। 300 में रुम और 150 रुपए में खाने का आनंद ले सकते है।

थाईलैंड

आप थाईलैंड (Thailand tour) को भी कम बजट में घूमने वाले देशों में गिन सकते हैं।

 

थाईलैंड में दुनिया भर से लोग पहुंचते हैं। यह खूबसूरत होने के साथ-साथ बहुत सस्ता भी है। इस देश में फ्लाइट के खर्च के साथ घूमना, खाना और ठहरना 45 से 50 हजार के बजट में आराम से हो जाएगा। यहाँ आपको 250 रुपये तक रूम मिल जाएगा और 200 रुपये में लजीज खाने का लुत्फ भी उठा सकते हैं।

मलेशिया

यदि आप चाहे तो मलेशिया की सैर (Malaysia tour) की इच्छा भी आपकी पूरी हो सकती हैं।

गर्मियों के मौसम में अगर आप ठंडक और सुकून चाहते हैं तो मलेशिया से बेहतर कोई जगह नहीं है। मलेशिया में रहने, घूमने-फिरने और फ्लाइट के टिकट का खर्चा मिलाकर 40 से 45 हजार के बजट में हो जाएगा। यहाँ स्थित जेटिंग हिल, बाटू केव्स, पेट्रोनॉस ट्विन टॉवर, पेनोग, मलक्का जैसे कई पर्यटन स्थल देखने लायक है।

वियतनाम

आप वियतनाम की सैर भी काम बजट में कर सकते है।

यह साउथ ईस्ट एशिया का एक छोटा और खूबसूरत देश है। यहाँ की सैर महज 45 से 50 हजार में पूरा कर सकते हैं। शांति और सुकून के साथ सस्ता खाना और बढ़िया शापिंग के लिए इससे बेहतर कोई और विकल्प नहीं है। वियतनामी डिश का टेस्ट सिर्फ़ 66 रुपये में ले सकते हैं होटल में 200 रुपये तक कमरा बुक करा सकते हैं।

हांगकांग

आप चाहे तो हांगकांग की सैर (Hong Kong tour ) भी आपके बजट में आ सकती हैं।

हांगकांग को सैलानी अंतरराष्ट्रीय शहर मानते हैं। हांगकांग जाएं तो विक्टोरिया पीक ज़रूर देखें। वहाँ से पूरे हांगकांग का विहंगम दृश्य देखते ही बनता है। इसके अलावा रिपल्स बे ओसियन पार्क, एटोल रीफ एक्वेरियम, मेरीन लैंड भी देखे जा सकते हैं। हांगकांग के चार दिन के टूर पर आपको 35 से 55 हजार रुपये खर्च करने होंगे। यहाँ के लिए इंडियन एयरलाइंस व चाइना एयरलाइंस की नियमित उड़ानें हैं।

November 8, 2017 0 comment
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Mahamana Express

आपकी जानकारी के लिए बता दें की भारतीय रेलवे (Indian Railways ) ने पहली ( Mahamana Express ) महामना ट्रेन 2016 में वाराणसी से नई दिल्ली के बीच शुरू की थी। वर्तमान में  दो महामना एक्सप्रेस वाराणसी-नई दिल्ली और भोपाल-खजुराहो रूट पर चल रही हैं। महामना में मेक इन इंडिया के तहत डेवलप मॉडर्न इंटीरियर लगा हुआ है । बता दें कि हिंदू महासभा के प्रेसिडेंट रहे पंडित मदन मोहन मालवीय के नाम पर महामना ट्रेन शुरुआत हुई थी। क्योंकि श्री मालवीय को महामना की उपाधि मिली थी।

प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी 22 सिंतबर को वाराणसी से वड़ोदरा के लिए महामना सुपरफास्ट एक्सप्रेस  ( Mahamana Express )  को हरी झंडी दिखाएंगे। Mahamana Express का शुभारंभ पीएम मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी से करेंगे। वाराणसी से वड़ोदरा के बीच इस ट्रेन का स्टॉपेज सूरत में रहेगा। यह ट्रेन वडोदरा को बुधवार से चलकर 27 घंटे में पहुंचेगी गुरुवार को वाराणसी पहुंचेगी और शुक्रवार को वाराणसी से चलेगी। इसकी एवरेज स्पीड 55.7 Kmph होगी।

कैंट रेलवे स्टेशन से चलने वाली इस ट्रेन के स्टॉप छिवकी, इटारसी, जलगांव, सूरत आदि स्टेशनों पर होगा। इसमें एसी फर्स्टक्लास का एक कोच और एसी 2 के दो कोच हो सकते हैं। जबकि आठ स्लीपर क्लास, जनरल और दो ब्रेकयान, पेंट्रीकार मिलाकर कुल 18 कोच होने की संभावना है। वर्तमान में आधिकारिक रूप से इस सम्बंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है। ट्रेन शुरू होने के बाद खासकर उत्तर भारतीयों को बड़ी राहत मिलने वाली है।

Mahamana Express में कुल 18 कोच में 1 AC फर्स्ट क्लास, 2 AC सेकंड क्लास, 8 स्लीपर, 4 जनरल, 1 पेंट्री और 2 गार्ड बैन शामिल होंगे। इसमें AC थर्ड क्लास का कोई कोच नहीं होगा।

महामना  ( Mahamana Express )

में मॉड्यूर पैनल, अपर बर्थ पर चढ़ने के लिए खास तरह की सीढ़ियां, आधुनिक मॉडर्न टॉयलेट, प्लेटफॉर्म बॉशबेसिन, वॉटर मशीन, ओडर कंट्रोल सिस्टम, एक्जॉस्ट पंखे, एलईडी लाइट्स, डस्टबिन लगाए गए हैं। पूरी ट्रेन में एलईडी लाइट और रिजर्व कोच में बर्थ इंडिकेटर्स लगे होंगे।

September 22, 2017 0 comment
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