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“Wrap your mother with your love; it’s Mother’s Day”

Mother’s Day – A special day for each one of us, as its celebrated across the world. A relationship with mother is above all the known relationships on the earth. To accept the presence of all mothers around the globe, Mother’s Day is celebrated across more than 48 countries of the world.

From the time of child’s entrance in this world till it is carried by his death, many relationships enter in his life, some are just for while some are with us because of their selfishness. But the one that exist forever is the love and affection of a mother, called as a best trainer and a guide for every child. Mother’s day is a day to reciprocate such love and affection to your mother.

 Mother’s Day 2019 in India, the event will be celebrated on 12th May, Sunday. It falls annually on every second Saturday in the month of May.

Why to Celebrate Mother’s Day — Mother’s Day celebration was initiated by Greek and Romans. The ancient people of such Greek and Romans were highly dedicated towards their maternal goddesses. At that time, this celebration of mother’s  day was extended three days long, including lots of activities along with variety of games. Another history of mother’s day was generated in England by Christians, celebrating such occasion on 4th Sunday in order to respect Virgin Mary.

“On Mother’s Day give your mother the most special gift- your love!”

Through the celebration of mother’s day spend time with your mother to rejoice and give respect by making her feel important in your Life……………..

May 10, 2019 0 comment
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successful

हम सब अपनी ज़िन्दगी में कुछ न कुछ हासिल करना चाहते है। कोई Doctor बनना चाहता है कोई Actor, कोई Dancer बनना चाहता है, तो कोई engineer. सब का Goal एक ही है कि वह successful बनना चाहते है। कितनी सारे किताबे कितनी सारी बाते कही जाती है पर सफलता पाने के कई रस्ते है और इसीलिए यह सभी रास्ते देख कर हम बौखला जाते है। डर जाते है।

दुनिया में दो ही तरह के लोग है एक तो वह जो सफल है और दूसरे वह जो नहीं है जिनकी तादाद सफल लोगो से कंही ज़्यादा है इसका साफ मतलब है जो लोग हमारी तुलना में सफल है वह लोग कुछ तो अलग करते ही है जो असफल होने वाले लोग नहीं करते है और किसी भी व्यक्ति का व्यापार में सफल होने के पीछे एक कहावत है कि ” किसी व्यापार में सफल (Successful) होने के लिए कोई ऐसा तथ्य जानना होता है जो बाकि के लोग नहीं जानते है ऐसे ही सफल होने वाले लोगो के नेचर में भी कुछ खास बातें होती है जो उन्हें सफल बनाती है। लेकिन फिर भी कुछ बुनियादी चीज़े है जिनका ध्यान रखकर अगर हम ज़िन्दगी में आगे बढ़ते है तो काफी हद तक सफलता के करीब पहुँच सकते है क्यों न हम इस बारे में आगे बात करें।

आज हम आपको सफलता के कुछ सूत्र बताएँगे। आप किसी भी क्षेत्र में हो यह सूत्र आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचने में-में हर संभव मदद करेंगे।

* भूतकाल चला गया है। वह जीवन में कभी दोबारा आपके जीवन में नहीं आयेगा। अपने भूतकाल के बारे में सोचकर चिंतित न रहे। उसे भूल जाए क्योंकि भविष्य कभी निश्चित नहीं होता। अपने भविष्य के बारे में ज़्यादा चिंतित न रहे। सिर्फ़ वर्तमान में जीते रहे।

* दूसरो की कमियों को ढूंडना बंद करे। अपने दिल पर हात रखे और अपनी कमियों के बारे में जाने। अपने दिल में आपको बहोत-सी नकारात्मकता और कमिया मिलेगी।

* दूसरो के लिए हमेशा अच्छा करे। आपसे जितनी बन सके उतनी सबकी सहायता करे। मतलबी न बने। अपने मतलब को किसी की सहायता करते समय भूल जाये। आपकी ये आदत आपको भविष्य में सहायक साबित होगी और आपका जीवन आनंद और ख़ुशी से भर जायेगा।

* सफलता पाने के लिए आपको कई चीज़ो का बलिदान करना पड़ता है। अगर आपको सफल (Successful) होना है तो यह बलिदान करने के लिए आपको हर पल तैयार रहना होगा। कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है। अगर आपको अपने जीवन में कुछ बड़ा हासिल करना है तो अपने जीवन से आलस, नकारात्मक विचार, बुरी आदतें इन सभी को छोड़ने की तैयारी करनी होगी, तभी आप सफल हो सकते है।

* हमेशा समय के महत्त्व को समझे। ग़लत कामो में अपने कीमती समय को व्यर्थ न गवाये। आपके पास जितना भी समय बचा है, उसे अच्छे कामो में खर्च कीजिये और अच्छे लोगो के लिये खर्च कीजिये।

* कोई भी काम शुरू करने से पहले उसके परिणाम के बारे में ज़रूर सोच ले और उसी के अनुसार क्रिया करे। ख़ुशी और शांति पाने के लिये अपने दिमाग में हमेशा किये जा रहे काम के परिणाम को रखिये।

* कभी किसी को मायूस ना करे और सभी के लिये दयालु रहे। सभी की सहायता करे। इंसानों में ही भगवान् को देखने की कोशिश करे। अपने दिल से नफरत को निकाल दे, सभी के साथ अच्छा व्यवहार करे और धरती पर हर एक प्राणी से प्यार से रहे। आलोचनाओ से दूर ही रहे। कभी किसी का बुरा न चाहे। हमेशा अच्छे विचारो को ही दिमाग में आने दे और अपने जीवन में भगवान् की प्रस्तुति को जाने।

* बहाने बनाना बंद करे। अक्सर कहा जाता है कि सफल या successful लोग बहाने नहीं देते वह results देते है। इसीलिए situation कितनी भी कठिन क्यों न हो बहाने देने से अच्छा उसके solution पर focus करे। जिस दिन आपके बहाने कम होते जायेंगे उस दिन आप को results दिखना शुरू होगा।

* हमेशा नया सीखते रहे। आप अपने क्षेत्र में कितने भी बड़े क्यों न हो जाये हर पल कुछ नया सिखने की कोशिश करे। हर एक क्षेत्र में रोज़ कुछ नए आविष्कार होते रहते है जिसका आपको अंदाजा भी नहीं होता इसीलिए आपको खुद को updated रखने के लिए नए-नए लोगो से यह सारी चीज़े सीखनी होगी। सीखते रहना ही successful लोगो की निशानी है।

* ध्यान रखें की सफलता के मोती यूँ ही धुल में बिखरे हुए नहीं पड़े हैं। उन्हें पाने के लिए गहराई में उतरने की हिम्मत करनी होगी, बहुत ज़्यादा कठोर परिश्रम करने और हमेशा करते रहने की शपथ लेनी होगी।

आज के दौर में जो लोग सफल है उन्हें विरासत में कुछ अधिक नहीं मिला था और उन्होंने अपना साम्राज्य खुद ही खड़ा किया है इसलिए ऐसा नहीं सोचे कि आपके पास समय कम है या संसाधन कम है बल्कि पूरे उत्साह से अपनी दिशा में काम करें।

ये कुछ खासियतें है जो सफल लोगो को असफल लोगो की भीड़ से अलग करती है अगर आप भी इनमे से कुछ अपने में डेवलप कर पाने के सक्षम होते है तो आप भी ज़िन्दगी में उन्ही की तरह ऊँचाई को छू सकते है और भीड़ से अलग हो सकते है।

June 7, 2018 0 comment
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Vegetarian

अगर आप मांसाहारी हैं और शाकाहारी (Vegetarian) बनाने का सोच रहें हैं, तो आप बिलकुल सही सोच रहें है। क्योंकि शाकाहारी लोग, मांसाहारी लोगों से ज़्यादा समय तक जीते हैं। लेकिन इसका यहाँ बिलकुल मलतब नहीं है कि मांसाहारी भोजन ख़राब है।

शाकाहारी भोजन में रोगों से लड़ने की क्षमता होती है। मांस में मिलने वाले तत्वों के कारण मांसाहार का पाचन जल्द नहीं किया जा सकता, जबकि शाकाहार भोजन (Vegetarian Food) का पाचन जल्दी किया जा सकता हैं। तो अगर आप शाकाहारी बनने की सोंच रहे हैं और आपको ऐसा करने के लिये कोई कारण चाहिए तो, आहये जानें शाकाहार भोजन के क्‍या क्‍या फायदे होते हैं।

शाकाहारी भोजन (Vegetarian Food) में सोडियम की मात्रा कम होती है, जिसकी वजह से ब्लड प्रेशर नार्मल रहता है। लेकिन सब्ज़ियों में ज़्यादा नमक का इस्तेमाल ना करें।

शाकाहारी होना भी कतई हानिकारक नहीं है। मांसाहारियों को जो तत्व मांस से मिलते हैं, वे ही तत्व शाकाहारियों को कई प्रकार के शाक से मिलते हैं। प्रोटीन जो कि मछली, मांस और अंडे से प्राप्त होता है, वह वनस्पति से भी प्राप्त होता है। मानव शरीर के कार्य करने के लिए ऐसा कोई पौष्टिक तत्व नहीं है, जो वनस्पतियों से प्राप्त नहीं किया जा सकता।

फोलेट के अत्यधिक मात्रा में होने के कारण और न्यून मात्रा में सेचुरेटेड वसा, कोलेस्ट्रॉल और एनिमल प्रोटीन मात्रा के कारण शाकाहारी भोजन हमें बहुत से रोगों से बचाता है।

शाकाहारियों में हृदय को रक्त भेजने वाली धमनियों से सम्बंधित बीमारी की संभावना कम होती है। शाकाहारियों में कुल तरल कोलेस्ट्रॉल तथा कम-घनत्व वाले लायपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल की मात्रा सामान्यतः कम पाई जाती है, लेकिन उच्च-घनत्व वाले लायपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल की मात्रा इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस प्रकार का शाकाहारी भोजन ग्रहण करते हैं।

शाकाहारियों में हाई ब्लड प्रेशर की संभावना मांसाहारियों से कम होती है और यह वजन व नमक पर निर्भर नहीं करता। इसका कारण यह भी हो सकता है कि वे कॉम्लेक्स काब्रोहाड्रेट ज़्यादा मात्रा में ग्रहण करते हैं और शारीरिक स्थूलता इनमें कम होती है।

शाकाहारी लोगो को फेफड़ों और बड़ी आंत का कैन्सर शाकाहारियों में कम होता है। इसका कारण यह होता है कि शाकाहारी रेशायुक्त फल और सब्जियों का अधिक सेवन करते हैं।

दुनिया भर से लिए गए आंकड़े यह दर्शाते हैं कि वनस्पति आधारित भोजन करने वालों में स्तन का कैन्सर होने की संभावना कम होती है। कारण शाकाहारियों में एस्ट्रोजन की कम मात्रा सहायक पाई गई है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें की शाकाहारी भोजन गुर्दे से सम्बंधित रोगों की रोकथाम में सहायक हो सकता है। अध्ययनों में यह पता चलता है कि वनस्पतियों में पाए जाने वाले कुछ प्रोटीन जीवित रहने की संभावना बढ़ाते हैं और पेशाब के द्वारा प्रोटीन का निकल जाना, कोशिकाओं द्वारा रक्त छनने की गति, गुर्दे में रक्त संचार और गुर्दे से सम्बंधित विकार मांसाहारियों की तुलना में शाकाहारियों में कम पाए जाते हैं।

वनस्पतियों से प्राप्त प्रोटीन शरीर की अमीनो एसिड की आवश्यक मात्रा के लिए पर्याप्त है, बशर्ते हर प्रकार के वनस्पति आधारित पदार्थों का सेवन किया जाए ।

अभी हाल ही में एक होटल में छापा पड़ा जंहा लोगो को कुत्तो का मांस खिलाया जा रहा था ।

इसीलिए शाकाहारी बनिए । स्वस्थ रहें मस्त रहे ।

May 15, 2018 0 comment
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yoga

माना जाता है कि योग (Yoga) का जन्म भारत में ही हुआ मगर दुखद यह रहा की आधुनिक कहे वाले समय में अपनी दौड़ती-भागती ज़िन्दगी से लोगों ने योग को अपनी दिनचर्या से हटा लिया। जिसका असर लोगों के स्वाथ्य पर हुआ। मगर आज भारत में ही नहीं विश्व भर में योग का बोलबाला है और निसंदेह उसका श्रेय भारत के ही योग गुरूओं को जाता है जिन्होंने योग (Yoga) को फिर से पुनर्जीवित किया।

सभी तनाव सम्बंधी बीमारियों में इसके फायदे सिद्ध हो चुके हैं। इसमें उच्च रक्तचाप, ऑटो इम्यून डिसऑर्डर, अवसाद, घबराहट और बर्नआउट जैसी कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम की परेशानियाँ भी शामिल हैं। पीठ और गर्दन के दर्द से लेकर विचलित करने वाले बोवेल सिंड्रोम में भी इससे फायदा होता है। योग (Yoga) से केवल लक्षण ही नहीं, मूल बीमारी भी ठीक हो जाती है। यद्यपि योग की उत्पत्ति हमारे देश में हुई है, किंतु आधुनिक समय में इसका प्रचार-प्रसार विदेशियों ने किया है, इसलिए पाश्चात्य सभ्यता की नकल करने वाले ‘योग‘ (Yoga) शब्द को ‘योगा’ बोलने में गौरवान्वित महसूस करते हैं।

प्राचीन समय में इस विद्या के प्रति भारतीयों ने सौतेला व्यवहार किया है। योगियों का महत्त्व कम नहीं हो जाए. अत: यह विद्या हर किसी को दी जाना वर्जित थी। योग (Yoga) ऐसी विद्या है जिसे रोगी-निरोगी, बच्चे-बूढ़े सभी कर सकते हैं। महिलाओं के लिए योग बहुत ही लाभप्रद है। चेहरे पर लावण्य बनाए रखने के लिए बहुत से आसन और कर्म हैं। कुंजल, सूत्रनेति, जलनेति, दुग्धनेति, वस्त्र धौति कर्म बहुत लाभप्रद हैं। कपोल शक्ति विकासक, सर्वांग पुष्टि, सर्वांग आसन, शीर्षासन आदि चेहरे पर चमक और कांति प्रदान करते हैं।

योग (Yoga) का सबसे खास पक्ष है सांस और गति के बीच तालमेल स्थापित होना, जिससे शांति और विश्राम की स्थित में पहुंचा जाता है। तनाव की स्थिति में हमारा सिंपेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय रहता है। तनाव और उसके साथ आने वाली थकावट की अनुभूतियों का असर कम करने के लिए हमें तनाव के चक्र को नियमित रूप से तोड़ने की ज़रूरत होती है। योगाभ्यास कर शांति और विश्राम की स्थिति में आने से हमें खुद के बारे में अच्छी अनुभूति होती है। यह विचार कि हम खुद पर नियंत्रण के लिए कुछ कर सकते हैं, तनाव के असर को कम करता है और इस तरह तनाव की अनुभूति कम तनावपूर्ण लगने लगती है।

मोटापे को दूर करने के लिए  वैसे तो मात्र आंजनेय आसन ही लाभयायक सिद्ध होगा लेकिन आप करना चाहे तो ये भी कर सकते हैं- वज्रासन, मण्डूकासन, उत्तानमण्डूसकासन, उत्तानकूर्मासन, उष्ट्रासन, चक्रासन, उत्तानपादासन, सर्वागांसन व धनुरासन, भुजंगासन, पवनमुक्तासन, कटिचक्रासन, कोणासन, उर्ध्वाहस्तोहत्तातनासन और पद्मासन।

श्वास क्रिया सीधे खड़े होकर दोनों हाथों की उँगलियाँ आपस में फँसाकर ठोढ़ी के नीचे रख लीजिए. दोनों कुहनियाँ यथासंभव परस्पर स्पर्श कर रही हों। अब मुँह बंद करके मन ही मन पाँच तक की गिनती गिनने तक नाक से धीरे-धीरे साँस लीजिए. इस बीच कंठ के नीचे हवा का प्रवाह अनुभव करते हुए कुहनियों को भी ऊपर उठाइए. ठोढ़ी से हाथों पर दबाव बनाए रखते हुए साँस खींचते जाएँ और कुहनियों को जितना ऊपर उठा सकें उठा लें। इसी बिंदु पर अपना सिर पीछे झुका दीजिए. धीरे से मुँह खोलें। आपकी कुहनियाँ भी अब एकदम पास आ जाना चाहिए. अब यहाँ पर छ: तक की गिनती गिनकर साँस बाहर निकालिए. अब सिर आगे ले आइए. यह अभ्यास दस बार करें, थोड़ी देर विश्राम के बाद यह प्रक्रिया पुन: दोहराएँ। इससे फेफड़े की कार्यक्षमता बढ़ती है। तनाव से मुक्ति मिलती है और आप सक्रियता से कार्य में संलग्न हो सकती हैं।

सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar)

सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ प्रक्रिया है। यह अकेला अभ्यास ही साधक को सम्पूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुंचाने में समर्थ है। मानव शरीर की सरंचना ब्रम्हांड की पंच तत्वों से हुआ है और इसे (शरीर रूपी यंत्र) सुचारू रूप से गतिमान स्नायु तंत्र करता है। जिस व्यक्ति के शरीर में स्नायुविक तंत्र जरा-सा भी असंतुलित होता है वह गंभीर बीमारी की ओर अग्रसर हो जाता है। “सूर्य नमस्कार(Surya Namaskar) स्नायु ग्रंथि को उनके प्राकृतिक रूप में रख संतुलित रखता है। इसके अभ्यास से साधक का शरीर नीरोग और स्वस्थ होकर तेजस्वी हो जाता है। ‘सूर्य नमस्कार’ स्त्री, पुरुष, बाल, युवा तथा वृद्धों के लिए भी उपयोगी बताया गया है।

पादहस्त आसन

सीधे खड़ा होकर अपने नितंब और पेट को कड़ा कीजिए और पसलियों को ऊपर खीचें। अपनी भुजाओं को धीरे से सिर के ऊपर तक ले जाइए. अब हाथ के दोनों अँगूठों को आपस में बाँध लीजिए. साँस लीजिए और शरीर के ऊपरी हिस्से को दाहिनी ओर झुकाइए. सामान्य ढंग से साँस लेते हुए दस तक गिनती गिनें फिर सीधे हो जाएँ और बाएँ मुड़कर यही क्रिया दस गिनने तक दोहराएँ। पुन: सीधे खड़े होकर जोर से साँस खींचें। इसके पश्चात कूल्हे के ऊपर से अपने शरीर को सीधे सामने की ओर ले जाइए. फर्श और छाती समानांतर हों। ऐसा करते समय सामान्य तरीके से साँस लेते रहें। अपने धड़ को सीधी रेखा में रखते हुए नीचे ले आइए

बिना घुटने मोड़े फर्श को छूने की कोशिश करें। यथासंभव सिर को पाँवों से छूने का प्रयास करें। दस तक गिनती होने तक इसी मुद्रा में रहें। अपनी पकड़ ढीली कर सामान्य अवस्था में आ जाएँ। इस आसन से पीठ, पेट और कंधे की पेशियाँ मजबूत होती हैं और रक्त संचार ठीक रहता है।

शवासन

इस आसन में आपको कुछ नहीं करना है। आप एकदम सहज और शांत हो जाएँ तो मन और शरीर को आराम मिलेगा। दबाव और थकान खत्म हो जाएगी। साँस और नाड़ी की गति सामान्य हो जाएगी। इसे करने के लिए पीठ के बल लेट जाइए. पैरों को ढीला छोड़कर भुजाओं को शरीर से सटाकर बगल में रख लें। शरीर को फर्श पर पूर्णतया स्थिर हो जाने दें।

कपालभाति क्रिया

अपनी एड़ी पर बैठकर पेट को ढीला छोड़ दें। तेजी से साँस बाहर निकालें और पेट को भीतर की ओर खींचें। साँस को बाहर निकालने और पेट को धौंकनी की तरह पिचकाने के बीच सामंजस्य रखें। प्रारंभ में दस बार यह क्रिया करें, धीरे-धीरे 60 तक बढ़ा दें। बीच-बीच में विश्राम ले सकते हैं। इस क्रिया से फेफड़े के निचले हिस्से की प्रयुक्त हवा एवं कार्बन डाइ ऑक्साइड बाहर निकल जाती है और सायनस साफ हो जाती है साथ ही पेट पर जमी फालतू चर्बी खत्म हो जाती है। इस प्राणायाम को करने के बाद अनुलोम विलोम प्राणायाम भी करे, कपाल भाती और अनुलोम विलोम प्राणायाम दोनो मित्र प्राणायाम है।

पद्मासन

विधि: जमीन पर बैठकर बाएँ पैर की एड़ी को दाईं जंघा पर इस प्रकार रखते हैं कि एड़ी नाभि के पास आ जाएँ। इसके बाद दाएँ पाँव को उठाकर बाईं जंघा पर इस प्रकार रखें कि दोनों एड़ियाँ नाभि के पास आपस में मिल जाएँ।

मेरुदण्ड सहित कमर से ऊपरी भाग को पूर्णतया सीधा रखें। ध्यान रहे कि दोनों घुटने जमीन से उठने न पाएँ। तत्पश्चात दोनों हाथों की हथेलियों को गोद में रखते हुए स्थिर रहें। इसको पुनः पाँव बदलकर भी करना चाहिए. फिर दृष्टि को नासाग्रभाग पर स्थिर करके शांत बैठ जाएँ।

विशेष

स्मरण रहे कि ध्यान, समाधि आदि में बैठने वाले आसनों में मेरुदण्ड, कटिभाग और सिर को सीधा रखा जाता है और स्थिरतापूर्वक बैठना होता है। ध्यान समाधि के काल में नेत्र बंद कर लेना चाहिए. आँखे दीर्घ काल तक खुली रहने से आँखों की तरलता नष्ट होकर उनमें विकार पैदा हो जाने की संभावना रहती है।

लाभ

यह आसन पाँवों की वातादि अनेक व्याधियों को दूर करता है। विशेष कर कटिभाग तथा टाँगों की संधि एवं तत्सम्बंधित नस-नाड़ियों को लचक, दृढ़ और स्फूर्तियुक्त बनाता है। श्वसन क्रिया को सम रखता है। इन्द्रिय और मन को शांत एवं एकाग्र करता है। इससे बुद्धि बढ़ती एवं सात्विक होती है। चित्त में स्थिरता आती है। स्मरण शक्ति एवं विचार शक्ति बढ़ती है। वीर्य वृद्धि होती है। सन्धिवात ठीक होता है।

May 3, 2018 0 comment
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जिंदगी बिता का हुवा पल दुबारा कभी नहीं आता है । आप जानते ही होंगे की तस्वीरें और मानवीय ज़िन्दगी का शुरू से ही गहरा संबंध रहा है। तस्वीरें हमारी  ज़िन्दगी के हसीन पलों को हमेशा सम्भाल कर रखती हैं और खूबसूरत यादों को ताज़ा करती हैं। पुराने समय में तस्वीरें हाथ से बनाई जाती थीं। फिर कैमरे की आमद से ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरों की शुरुआत हुई और फिर समय के साथ तस्वीरें रंगीन हुईं। इसी दौरान कम्प्यूटर और तकनीकी युग की शुरुआत होने के साथ तस्वीरें डिजीटल हुईं। चलने और बोलने लगी । लेकिन मोबाइल फोन की आमद ने फोटोग्राफी के कार्य को बड़ा नुक्सान पहुंचाया। इसी समय के दौरान ही जब फोटोग्राफी का व्यवसाय लगभग खत्म होने की कगार पर जा रहा था की HD फोटोग्राफी और ‘प्री-वैंडिग’ (Pre Wedding Shoot) का दौर आगया और इस व्यवसाय में कुछ जान आ गई ।

इससे मन को आकर्षित कर लेने वाली तस्वीरों ने लोगों को अपनी ओर खींचा। इसी के पश्चात् ‘प्री-वैंडिग’ (Pre Wedding Shoot) अर्थात् विवाह से पहले वीडियो फ़िल्मांकन और फोटो शूट की शुरुआत हुई है। वर्तमान में यह रुझान पूरे देश में-में तेजी के साथ बढ़ रहा है। अब जब भी कोई व्यक्ति अपने बेटा-बेटी की शादी के लिए किसी फोटोग्राफर को बुक करने के लिए जाता है तो उन फोटोग्राफरों की ओर से पहले ही यह पूछा जाता है कि उन्हें विवाह का प्री-वैडिंग वीडियो (Pre Wedding Shoot) फ़िल्मांकन या फोटो शूट करना है। फोटोग्राफरों ने इसके लिए विशेष तौर पर महत्त्वपूर्ण एवं सूंदर लोकेशनें (वह खास स्थान जहाँ फोटोशूट या फ़िल्मांकन करना) ढूंढ कर रखी होती है। कई बार ज़रूरत के अनुसार या सम्बंधित विवाह वालों की इच्छा के अनुसार तथा उनके बजट के हिसाब से भी सैट लगाए जाते हैं। यह काम पूरी तरह फ़िल्मी अंदाज़ में ही होता है।

फोटोग्राफर विवाह के कुछ दिन पहले लड़के और लड़की वालों की सहमति से विवाह वाले दम्पति को कुछ बहुत ही खास चुने हुए स्थानों पर लेकर जाते हैं और वहाँ फ़िल्मों की तरह ही उन पर मीठे रोमांटिक किस्म के गीतों का फ़िल्मांकन किया जाता है। इसी के साथ ही शानदार फोटो शूट भी होता है जिसमें विवाह वाले लड़के और लड़की के कई दिलकश दृश्यों वाले नयनाभिराम फोटो खींचे जाते हैं। फोटोग्राफरों की ओर से शानदार गीतों और खूबसूरत-सी लोकेशनों के हिसाब से सम्बंधित पार्टी से पैसे लिए जाते हैं। साधारणतः जब शादी का दिन होता है तो विवाह वाले लड़के / लड़की की खींची गईं यह विभिन्न दृश्यों वाली तस्वीरें या वीडियो के रूप में मैरिज पैलेसों के गेट से ही दिखाई देती हैं।

मैरिज पैलेस के पूरे आंगन में इनको बड़े प्रिंटों के रूप में सजाया जाता है। आगे स्टेज पर और एक-दो अन्य स्थानों पर लगाई गई बड़ी स्क्रीनों पर प्री-वैडिंग की शानदार वीडियोज़ भी सारा दिन चलाई जाती है। यह सब कुछ किसी फ़िल्म से कम नहीं होता क्योंकि शानदार दृश्यों को और अधिक अच्छा साबित करने के लिए इन वीडियोज़ की विशेष तौर पर मिक्सिंग और कलर प्रोसैसिंग भी करवाई जाती है। यह सब कुछ एक बहुत ही शानदार नज़ारा पेश करता है। इसके बाद विवाह वाले जोड़े और फोटोग्राफरों की ओर से इसको सोशल मीडिया पर भी शेयर किया जाता है। बहु-संख्या में जहाँ लोगों की ओर से इसकी प्रशंसा की जाती है वहीं कुछ लोग इसको ग़लत करार दे रहे हैं। लेकिन सच यही है कि यह रुझान तेजी से बढ़ रहा है। धनवान लोग इस काम पर पैसा खर्च करने से गुरेज़ नहीं कर रहे। आप अपने बजट के अनुसार फोटोग्राफरों से बात कर सकते है। तथा अपने या अपने बच्चों के जीवन के उन अभूतपूर्व अनमोल पलों को हमेशा के लिए सहेज कर रख सकतें है ।

March 29, 2018 0 comment
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Job

आईटी, ई-कॉमर्स सेक्टर के बूस्ट के बीच भी ये ऐसे करियर हैं जो अभी तक अच्छा कर रहे हैं। ये इंडिया की ट्रेडिशनल जॉब्स मानी जाती हैं। ये जॉब (Job) इंडिया की हाइस्ट पेयिंग जॉब्स (Job) है, जिसमें औसतन सालाना सैलरी अन्य के मुकबले बेहतर है। हालांकि, ये सैलरी आपके अनुभव और टैलेंट के आधार पर इससे ज़्यादा भी हो सकती है लेकिन सर्वे में औसतन सालाना सैलरी बताई गई है।

मैनेजमेंट प्रोफेशनल (Management Job)

मैनेजमेंट प्रोफेशनल किसी भी कंपनी के मेन कर्मचारी माने जाते हैं। उनका काम एक प्रोजेक्ट को ऑर्गनाइज करने लेकर सही तरीके से पूरा करने तक होता है। इस नौकरी में ज़्यादा से ज़्यादा पैकेज मिलने की सम्भावना । इस नौकरी में एंट्री लेवल पर काफी मेहनत करनी पड़ती है। एक बार जब आप एंट्री लेवल को पार कर लेते हैं, तो हाइएर लेवल पर आपके लिए और हाइएर लेवल पर आपके लिए और मौके खुल जाते हैं। एंट्री लेवल – 3 लाख रुपए मिड लेवल – 25 लाख रुपए अनुभवी – 80 लाख रुपए  ।

इन्वेस्टमेंट बैंकर इन्वेस्टमेंट

इन्वेस्टमेंट बैंकर इन्वेस्टमेंट बैंकर किसी भी कंपनी की कैपिटल बढ़ान के लिए फाइनेंशियल एडवाइज देते हैं। वह सिर्फ पैसे के साथ डील करते हैं। एंट्री लेवल – 12 लाख रुपए मिड लेवल – 30 लाख रुपए अनुभवी – 50 लाख रुपए ।

चार्टेड अकाउंटेट (CA)

चार्टेड अकाउंटेट चार्टेड अकाउंटेट की नौकरी को इंडिया में रिस्पेक्टेड जॉब माना जाता है। चार्टेड अकाउंटेट बिजनेस और अकाउंटेंसी में माहिर माने जाते हैं। वह इसके लिए काफी पढ़ाई करते हैं। एंट्री लेवल – 5.50 लाख रुपए मिड लेवल – 12 लाख रुपए अनुभवी – 25 लाख रुपए

मार्केटिंग जॉब (Marketing Job)

मार्केटिंग जॉब एक ऐसा प्रोफेशनल जिसको मार्केट की अच्छी जानकारी हो वह किसी कंपनी का सीईओ तक बन सकता है। मार्केटिंग एक आर्ट है। अगर कोई ये आर्ट अच्छे से सीख ले तो वह इंडिया के बेस्ट प्रोफेशनल की लिस्ट में शामिल हो सकता है। एंट्री लेवल – 1.50 से 4.50 लाख रुपए मिड लेवल – 5 लाख रुपए अनुभवी – 10 लाख  रूपये ।

आईटी और सॉफ्टवेयर इंजीनियर (software Engineer)

आईटी और सॉफ्टवेयर इंजीनियर ये एक ऐसा करियर है जो काफी अच्छा पर करता है। ये करियर आपको विदेश में नौकरी का भी मौका देता है। आईटी और सॉफ्टवेयर इंजीनियर कंप्यूटर की भाषा से लेकर सॉफ्टवेयर डिजाइनिंग जैसी तमाम जानकारी होनी चाहिए. एंट्री लेवल–3.50 लाख रुपए मिड लेवल-8.30 लाख रुपए अनुभवी-15 लाख रुपए के लगभग।

ऑयल एंड नेचुरल गैस सेक्टर

ऑयल एंड नेचुरल गैस सेक्टर प्रोफेशनल्स ये एक ऐसा सेक्टर है जिसमें सबसे ज़्यादा प्रॉफिट होता है। इस सेक्टर में जिओलॉजिस्ट और मरीन इंजीनियर ऐसे ही प्रोफेशन हैं। हैं। इस सेक्टर में अनुभवी होने पर पैकेज अच्छा मिलता है। एंट्री लेवल–3 लाख रुपए मिड लेवल-6 लाख रुपए  अनुभवी-15 से 20 लाख रुपए के लगभग।

मेडिकल प्रोफेशनल (Medical Job)

मेडिकल प्रोफेशनल मेडिकल सेक्टर में कभी भी मंदी का असर नहीं पड़ता। इस प्रोफेशन अच्छी करियर ग्रोथ है। शुरूआत में मेडिकल प्रोफेशन में काफी मेहनत करनी पड़ती है। यहां औसत सैलरी आपकी अनुभव और मेडिकल फील्ड पर अधिक निर्भर करता है। जनरल प्रेक्टिस – 4.80 लाख रुपए जनरल सर्जन – 8 लाख रुपए मेडिकल डॉक्टर – 17 लाख रुपए  के लगभग ।

December 8, 2017 0 comment
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Chhath Puja

जैसे आम को फलों का राजा कहा जाता है ठीक उसी प्रकार हिंदुओं के सबसे बड़े पर्व दीपावली को पर्वों का राजा माना जाता है। पांच दिन तक चलने वाला ये पर्व सिर्फ़ भैयादूज तक ही सीमित नहीं है। बल्कि यह पर्व Chhath Puja पर्व तक चलता है। उत्तर प्रदेश और खासकर बिहार में मनाया जाने वाला ये पर्व बेहद अहम पर्व है। जो पूरे देश में धूम-धाम से मनाया जाता है। छठ पर्व केवल एक पर्व नहीं है बल्कि महापर्व है जो कुल चार दिन तक चलता है। नहाय खास से लेकर उगते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य देने तक चलने वाले इस पर्व का अपना एक ऐतिहासिक महत्त्व है।

सूर्य की आराधना के इस Chhath Puja को किसने शुरू किया इसके पीछे कई ऐतिहासिक कहानियां प्रचलित हैं। पौराणिक कथाओं के मुताबिक जब राम-सीता 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे तो रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए उन्होंने ऋषि-मुनियों के आदेश पर राजसूर्य यज्ञ करने का फैसला लिया था। पूजा के लिए उन्होंने मुग्दल ऋषि को आमंत्रित किया। मुग्दल ऋषि ने माँ सीता पर गंगा जल छिडक़ कर पवित्र किया और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्यदेव की उपासना करने का आदेश दिया। माता सीता जी ने मुग्दल ऋषि के आश्रम में रहकर छह दिनों तक सूर्यदेव भगवान की पूजा की थी।

Chhath Puja सूर्य की उपासना का पर्व है। भारत में सूर्य पूजा की परम्परा वैदिक काल से ही रही है। लंका विजय के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और माता सीता ने उपवास किया और सूर्यदेव की आराधना की और सप्तमी को सूर्योदय के समय अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया। इसी के उपलक्ष्य में Chhath Puja की जाती है। ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत सूर्य है। इस कारण हिन्दू शास्त्रों में सूर्य को भगवान मानते हैं।

Chhath Puja करने वाला व्यक्ति पवित्र स्नान लेने के बाद संयम की अवधि के 4 दिनों तक अपने मुख्य परिवार से अलग हो जाता है। पूरी अवधि के दौरान वह शुद्ध भावना के साथ एक कंबल के साथ फर्श पर सोता है। सामान्यतः यह माना जाता है कि यदि एक बार किसी परिवार नें छठ पूजा शुरु कर दी तो उन्हें और उनकी अगली पीढी को भी इस पूजा को प्रतिवर्ष करना पडेगा और इसे तभी छोडा जा सकता है जब उस वर्ष परिवार में किसी की मृत्यु हो गयी हो।

भक्त छठ पर मिठाई, खीर, थेकुआ और फल सहित छोटी बांस की टोकरी में सूर्य को प्रसाद अर्पण करते है। प्रसाद शुद्धता बनाये रखने के लिये बिना नमक, प्याज और लहसुन के तैयार किया जाता है। यह 4 दिन का त्यौहार है

पहले दिन भक्त जल्दी सुबह गंगा के पवित्र जल में स्नान करते है और अपने घर प्रसाद तैयार करने के लिये कुछ जल घऱ भी लेकर आते है। इस दिन घर और घर के आसपास साफ-सफाई होनी चाहिये। वे एक वक्त का खाना लेते है, जिसे कद्दू-भात के रूप में जाना जाता है जो केवल मिट्टी के स्टोव (चूल्हे) पर आम की लकडियों का प्रयोग करके ताँबे या मिट्टी के बर्तन में बनाया जाता है।

दूसरे दिन (छठ से ठीक एक दिन पहले) पंचमी को, भक्त पूरे दिन उपवास रखते है और शाम को पृथ्वी (धरती) की पूजा के बाद सूर्य अस्त के बाद व्रत खोलते है। वे पूजा में खीर, पूरी और फल अर्पित करते है। शाम को खाना खाने के बाद, वे बिना पानी पियें 36 घण्टे का उपवास रखते है।

तीसरे दिन (छठ वाले दिन) वे नदी के किनारे घाट पर संध्या अर्घ्य देते है। अर्घ्य देने के बाद वे पीले रंग की साडी पहनती है। परिवार के अन्य सदस्य पूजा से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इंतजार करते हैं। छठ की रात कोसी पर पाँच गन्नों से कवर मिट्टी के दीये जलाकर पारम्परिक कार्यक्रम मनाया जाता है। पाँच गन्ने पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) को प्रर्दशित करते है जिससे मानव शरीर का निर्माण करते है।

चौथे दिन की सुबह (पारुन) , भक्त अपने परिवार और मित्रो के साथ गंगा या अन्य नदी के किनारे अर्घ्य अर्पित करते है। भक्त छठ प्रसाद खाकर व्रत खोलते है।

इस प्रकार उत्तर प्रदेश तथा बिहार के लोगो द्वारा छठ पूजा – सूर्य आराधना का महापर्व बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है ।

October 25, 2017 0 comment
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Wonderful but True

इस दर्द भरी दुनिया में ऐसी कई घटनाएँ हुई हैं, जहां लोग मौत के मुंह से तो बाहर आ गए है लेकिन ऐसे हादसों को अंत तक भुला न पाएं। एक ऐसी ही एक अद्भुत किन्तु सत्य (Wonderful but True) घटना 13 अक्टूबर 1972 को हुई | उरुग्वे के ओल्ड क्रिश्चियन क्लब की रग्बी टीम चिली के सैंटियागो में मैच खेलने जा रही थी, परन्तु इसी दौरान मौसम खराब होने की वजह से हवाई जहाज चिली की बॉर्डर से लगभग 14 किमी दूर अर्जेटीना के मेंदोजा प्रोविंस में क्रैश हो गया था। उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही मौसम खराब होने लगा और पायलट को कुछ नजर न आने की वजह से प्लेन क्रैश हो गया। उस प्लेन में लगभग 45 लोग सवार थे, जिनमें से 12 की मौत प्लने क्रैश के दौरान तत्काल ही हो गई थी।

अन्य 17 के लगभग लोग घायल हो गए थे, जिन्होंने बाद में दम तोड़ दिया था। हालांकि, इस अद्भुत किन्तु सत्य (Wonderful but True) हादसे में जो लोग बचे उन्हे जिंदा रहने के लिए मौत से ज़्यादा बुरा वक्त देखना पड़ा। बचे हुए लोगो ने जान बचाने के लिए खाने की चीजों को छोटे-छोटे हिस्सों में बाट लिया ताकि वह ज़्यादा दिन तक चल सके | पानी कि कमी को दूर करने के लिए उन्होंने प्लेन में से एक ऐसे मेटल के टुकड़े को निकाला जो कि धूप में बहुत जल्दी गर्म हो सके | फिर उस पर बर्फ रख कर उसे पिघला कर पानी इकठ्ठा करने लगे। मुसीबत तब शुरु हुई जब खाना खत्म हो गया और कोई चारा न होने की वजह से इन लोगों ने अपने मरे हुवे साथियों की लाश के टुकड़े करके उन्हें खाना शुरू कर दिया। हादसे में बचे डॉ. रोबटरे कानेसा ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, ये अद्भुत किन्तु सत्य (Wonderful but True)  है की  मुझे जिंदा रहने के लिए अपने ही दोस्तों  का मांस खाना पड़ा था।

हादसे के पीड़ितों को लगभग 30 डिग्री सेल्सियस में 72 दिन गुजारने पड़े। देखते ही देखते 60 दिन बीत गए थे दुनिया की नज़र में मर चुके इन लोगों को बाहरी दुनिया से मदद की कोई उम्मीद दिखाई नहीं दे रही थी। ऐसे में दो खिलाड़ियों नैन्डो पैरेडो और रॉबटरे केनेसा ने सोचा पड़े-पड़े मरने से अच्छा है कि मदद कि तलाश पर निकलना सही समझा। शारीरिक रूप से कमजोर हो चुके दोनो खिलाड़ी मदद के लिए बफऱ् पर ट्रैकिंग करनी शुरु की आखिर में दोनो एंडीज पर्वत को हराते हुए चिली के कुछ आबादी वाले क्षेत्र तक पहुंच गए जहां दोनों ने रेस्क्यू टीम को अपने साथियों की लोकेशन बताई | इसके चलते हादसे में बाकी बचे 16 लोगों को 23 दिसम्बर 1972 में बचाया जा सका।

इस भयावह घटना पर पियर्स पॉल रीड ने 1974 में एक किताब ‘अलाइव (Alive)’ लिखी थी, जिस पर 1993 में फ्रेंक मार्शल ने फ़िल्म भी बनाई थी।

October 13, 2017 0 comment
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Spiny tailed lizard

चीन के अमीर युवाओं में इन दिनों नया चलन चल पड़ा है । ये चलन है कला में निवेश का तथा जंगली जानवरों को पालतू बनाने का, युवा रईस, आज दिखावे की चीज़ों के बजाय बढ़-चढ़कर कला में तथा जंगली जानवरों को पालतू बनाने में निवेश कर रहे हैं असल में, पिछले तीस सालों में ज़बरदस्त आर्थिक तरक़्क़ी के चलते चीन में रईसों का एक बड़ा तबक़ा खड़ा हो गया । इन्हें दूसरी पीढ़ी के रईस कहा जाता है जिन्हें विरासत में संपत्ति मिली है ।

चाइनीज लोग भी आज कल गजब ढहा रहे है। यंहा के लोगों में आजकल एक नया किन्तु खतरनाक शौक पनप रहा है। ये खतनाक शौक है, खत्म होने की कगार पर खड़े जंगली जानवरों को पालतू बनाने का। हाल ही में, चीन के युवाओं में एक्सटिंक्ट जानवरों को पालने की दिलचस्पी बढ़ी है। इसी के चलते दुनियाभर में इन लुप्तप्राय जानवरों की गैरकानूनी सप्लाई का खतरा भी बढ़ चूका है। ऐसे जानवरों की सप्लाई के बढ़ते बिजनेस ने पर्यावरण के लिए भी खतरा पैदा कर दिया है। कोई अजगर पाल रहा है तो कोई मगरमच्छ या कोई खतरनाक-सी दिखने वाली काली डरावनी बिल्ली या सौंप इत्यादि पाल रहें है।

चीन की राजधानी बीजिंग के रहने वाले एक शख्स शाओ जिन ने अपने घर पर 5 मगरमच्छ और लगभग 2 सांप भी पाल रखे हैं। शाओ के अनुसार वह मगरमच्छ की सभी 23 प्रजातियों को इकट्ठा करना चाहते हैं।

Southeast Asia और Australia में पाए जाने वाले मगरमच्छ की कीमत चीन में करीब 1 लाख रूपये के आस-पास बैठती है। समझ में नहीं आ रहा की यंहा के लोगो का यह शौक जंगली जानवरो के लिए नुकसान दायक है या फायदेमंद है।

अफ्रीका में पाई जाने वाली ‘Spiny tailed lizard‘ यानी स्पिनी पूंछवाली छिपकली को आईयूसीएन (International Union for Conservation of Nature) ने लुप्तप्राय जानवरों की लिस्ट में काफी ऊपर रखा है। हालांकि, आईएम सब के बावजूद भी चीन के लोगों में इस लिजर्ड को पालने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रहा है।

चीन के युवाओं में क्रानवेल होर्न्ड फ्राग (Cranwell horn Frog) की पॉपुलेरिटी भी काफी ज़्यादा है। अर्जेंटीना, बोलिविया और ब्राजील में पाए जाने वाले ये मेंढक दुनियाभर में काफी पॉपुलर हो रहें हैं हैं। 25 वर्षीय लियु झाओबेइ बचपन से ही जानवरों को पालने के शौकीन रहे हैं। उनके पास अबतक 30 मेंढक, 3 घड़ियाल, कई सारे सांप और कछुए भी हैं।

25 वर्षीय लियु झाओबेइ बचपन से ही जानवरों को पालने के शौकीन रहे हैं। उनके पास अबतक 30 मेंढक, 3 घड़ियाल, कई सारे सांप और कछुए भी हैं। लियु के अनुसार, चीन में इस तरह के लुप्तप्राय जानवर काफी प्रसिद्ध है। University of Liu में भी ऐसे जानवरों को पालने का कोर्स भी चलता है।

September 26, 2017 0 comment
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Indian youth

भारत दुनिया का सबसे युवा देश माना जाता है | 2011 की जनगणना के अनुसार देश की 54% आबादी युवा है। हमेशा किसी भी देश को खड़ा करने में उस देश के युवाओं का अहम योगदान होता है। हालाँकि Indian youth दुनिया में किसी से कम नहीं है लेकिन फिर भी कुछ कारण ज़रूर है जिस वजह से युवा जनसंख्या का ठीक से इस्तेमाल नहीं किया गया है। जिसके कई आर्थिक, सामाजिक कारण हो सकते है जो युवाओं में अवसाद और कुंठा की भावना को पैदा करते है। यहाँ पर हम कुछ कारणों पर प्रकाश डालने का प्रयास कर रहे है। कैरियर की टेंशन-आज के Indian youth की सबसे आम समस्या है कैरियर। उनको ऐसे विकल्पों की तलाश रहती है जो उनके और परिवार के सपनो को पूरा कर सके | लेकिन इस आर्थिक युग में हर बड़े कैरियर का रास्ता भी खूब सारे धन के ढेर से होकर गुजरता है। इसलिए हर Indian youth बेहतर कैरियर के सपने देखता ही रह जाता है क्योंकि आर्थिक समस्या हर माध्यम वर्गीय युवा के साथ है।

जवानी अज्ञात कुछ भी नहीं रखना चाहती। इसीलिए कई बार जीवन की कई ढंकी चीजों पर भी टूट पड़ती है। शास्त्रों में तो लिखा है कि Youth पीढ़ी को वैसा ब्रह्म बहुत अच्छा लगता है, जिसका चिंतन कभी किसी ने न किया हो। जिसका चिंतन हो चुका हो, उसका आकर्षण हमेश के लिए समाप्त हो जाता है । इसीलिए जवान लोग नया-नया ढूंढ़ने में लग जाते हैं। आज की खोज Make in India यह भी एक नई खोज है। कहते हैं ब्रह्म को जानना हो तो नई दृष्टि विज्ञान की चाहिए और उसको जीना हो तो नई दृष्टि संस्कार की चाहिए | युवा पीढ़ी यह खोजने निकलेगी तो सहारा विज्ञान का लेना पड़ेगा लेकिन, जिसे खोजने निकले हैं उसके भीतर कुछ ऐसा है, जिसके लिए विज्ञान के साथ संस्कार और संस्कृति की भी ज़रूरत पड़ेगी। उमंग और उत्साह जवानी के लक्षण हैं लेकिन, इसे बनाए रखने के लिए जवानी भटककर ग़लत रास्ते पर चली जाती है। उमंग के लिए जीवन को विलास में न बदला जाए | युवा यदि संस्कार से जुड़ते हैं तो एक बात बहुत अच्छे से समझ में आएगी कि वे युवा हैं इसलिए एक पीढ़ी बाद आए हैं। तो जो पीढ़ी गुजरी उससे कुछ नया करके जाएं और जो नई पीढ़ी आएगी उसके लिए और कुछ नया छोड़कर जाएं लेकिन, कभी भी मूल्य न छूट जाएं। नए को खोजिए, नवीनता सांस में उतारिए लेकिन, ऐसा न हो कि वह भोग-विलास लेकर आ जाए. ऐसा हुआ तो वह नया बहुत महंगा पड़ जाएगा।

युवा अवस्था में अकेलापन, एक बेवजह की ऊब और खुद से रूबरू होने की कोशिश! कुछ इसी जद्दोजहद को बयां करती हैं ये पंक्तियां। वह एक अच्छी जॉब करता है, अच्छी सैलरी भी है, एक अच्छी-सी गर्लफ्रेंड भी है, सबसे मिलता है, उसके बहुत से दोस्त हैं फेसबुक पर, सैकड़ों लाइक्स आते हैं, अच्छे-खासे फॉलोवर्स भी हैं। फिर भी वह अक्सर खुद को अकेला महसूस करता है। अब उसे सबकुछ अनजाना-सा लगता है, वह कभी फेक फेसबुक आई डी बना कर अनजाने लोगों से देर रात तक बात करता है तो कभी सिगरेट पीते-पीते कहीं दूर निकल जाता है। अचानक उसे ये सब अनजाने लोग अच्छे लगते हैं, पर क्यों?

ज़िंदगी की भागमभाग में, जहां हमें स्कूल से लेकर कॉलेज तक बस खुद को बना कर रखना होता है। सब कुछ तय होता है, कब नहाना है, कौन-सी युनिफ़ॉर्म कब पहननी है, किस केटेगरी के दोस्त बनाने हैं, कैसे खुद को बेहतर दिखाना है, कैसे सबके ध्यान का केंद्र बनना है आदि। सब कुछ एक टाईमटेबल-सा ही है, जहां बेचारी इंसान खुद को ही भूल जाता है कि वह क्या है?

वो कभी-कभी अपनों से ही हारना चाहता है, हां! वह क्रिकेट केवल नहीं खेलना चाहता, वह केवल इंजीनियर नहीं बनना चाहता, उसे हर वक़्त इंग्लिश में बात करना अच्छा नहीं लगता। वो कुछ वक़्त बिखरा, बिंदास रहना चाहता है और जब वह खुद की ही सफलताओं में कैद-सा हो गया है तो उसे हर बात नकली-सी लगती है। हर बात जो वह कहता है, सुनता है, ऐसा लगता है जैसे सब कुछ बनावटी है। उसका अस्तित्व सिर्फ़ और सिर्फ़ सफलता के कारण ही टिका है, वह अकेला कुछ भी नहीं है।

थोड़ा और परिपक्व होने पर  बेचारा खुद के लिए क्या चाहता था, भूल ही जाता हैं और यही प्रक्रिया पीढ़ियों चलती रहती है । लेकिन सही मायने में यदि देखें  तो  आज के युवा के सपने ऊँचे होतें  हैं, हर कोई बंगला कार तथा अन्य विलासिता वस्तुएं अपने लिए चाहता है । इनमे से कुछ लोग पा लेते है तथा कुछ के लिए केकल सपने रहा जातें  हैं ।

September 20, 2017 0 comment
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