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Tea

अगर आप चाय पीने के शौक़ीन है, और दिन की शुरुवात एक कप गरमा गरम चाय (Tea) के साथ करते है तो इस पोस्ट को ज़रूर पढ़िए, क्योंकि चाय के ज़्यादा सेवन से आपके शरीर को बहुत हानि भी पंहुच सकती है। जैसा की हम सभी जानते है की, चाय (Tea) पीना ज्यादातर लोगो की दिनचर्या का हिस्सा है। भारत में 80 से 90 प्रतिशत लोग दिन की शुरुवात एक गर्म चाय के कप से करते है। लेकिन कुछ अध्ययनों के अनुसार खाली पेट चाय पीना सेहत के लिए बहुत नुकसान देह होता है, खासतौर पर गर्मियों में चाय बहुत नुकसान दायक होती है। दरअसल चाय एक औषधीय पौधा (Medicinal Plant) है जो विशेषज्ञ की सलाह से दवा की तरह एक सीमित मात्रा में लिया जाता है। यह प्रतिदिन पीने के लिए नहीं होता है। यह आवश्यकतानुसार पीने पर ही लाभदायक है। चाय ठण्डी जलवायु एवं ठंडे वातावरण में रहने वालों के लिए ही लाभकारी होता है। इस पोस्ट में हम आपको चाय पीने के नुकसान, फायदे, चाय बनाने और पीने का सही तरीका तथा इस्तमाल की हुई चाय पत्ती से बने कुछ घरेलू नुस्खे बताएँगे।

चाय पीने से मुख्य हानि यह होती है कि यह रक्त में आयरन (लोह) को अवशोषित होने से रोकता है जिससे खून में आयरन की कमी हो जाती है। खासतौर से शाकाहारी, गर्भस्थ स्त्री (Pregnancy) , अनीमिया (रक्त की कमी की बीमारी) ज़्यादा प्रभावित होते है क्योंकि उनके रक्त में पहले से ही आयरन की कमी होती है। रक्त में लोहे की कमी से थकान और रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी हो सकती हैं। एक कप चाय में 4 ग्राम टैनिन होता है जो आपके शरीर में हानिकारक एसिड का काम करता है। अगर आप एक कप चाय को एक-दो घण्टे रखा रहने दें और उसके बाद उसकी स्थिति देख्नेगे तो आप चाय के रंग में परिवर्तन आ जायेगा और उसके ऊपर की निकोटिन की परत के नीचे काली चाय होगी। चाय की यही दशा शरीर में जाने के बाद होती है। अगर आप ऊँगली से चाय की परत को लगाकर देखें तो पाएंगे की यह चिपचिपी और मोटी होती है जो आंतो में चिपक कर विकार उत्पन्न करती है।

चाय (Tea) को बार-बार गर्म करके नहीं पीना चाहिए क्योंकि इससे चाय में एसिड की मात्रा बढ़ जाती है। अनिद्रा के रोगी और डिप्रेशन के मरीजो लिए चाय ज़्यादा हानिकारक है। क्योंकि चाय पीने से नींद में कमी आती है। कैफीन–चाय, कॉफी में पाया जाने वाला ‘कैफीन’ कुछ समय के लिए शरीर में उर्जा का अहसास तो करवाता है पर कुछ समय पश्चात यह व्यक्ति में काम करने की क्षमता कम कर देता है। तीन कप कॉफी और एक कप चाय में 350 मि।ग्रा। कैफीन होता है और इतनी मात्रा में कैफीन का सेवन व्यक्ति में तनाव को बढ़ा सकता है साथ ही ध्यान केन्द्रित करने की क्षमता भी कम हो जाती है। जितनी ज़्यादा आप चाय पियेंगे चाय में घुली चीनी भी आपके शरीर में जायेगी जो आपको मोटा बना सकती है हड्डी, जोड़ों का दर्द–अत्यधिक चाय के सेवन से हड्डियों के जोड़ों में दर्द, दाँतों का पीलापन, अवसाद, तनाव आदि बीमारियाँ हो सकती हैं। चाय के एक कप में 13 पी-पी एम फ्लोराइड होता है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 1.5 पीपीएम फ्लोराइड ही उचित है।

चाय के फायदे कुछ फायदे भी है

दस्त (Diarrhea) –एक चम्मच चाय (Tea) की पत्ती और चौथाई चम्मच नमक दोनों को पीसकर इसके तीन भाग करके दिन में तीन बार गर्म पानी के साथ लें। ऐसा करने से दर्द के साथ मरोड़ी देकर होने वाले दस्तों में लाभ होगा।

बालों में चमक– बालों में ज्यादा देर तक शैम्पू लगाये रखने से रूसी कम होने के बजाय बढ़ती है। चाय के पानी से बाल धोने से बाल गिरना बन्द होते हैं। चाय पत्ती उबालकर उसके पानी को छानकर फ्रिज में रख लें। बालों को धोने के बाद इस पानी को बालों में कंडीशनर की तरह लगायें, इससे बालों में चमक बढ़ेगी।

चाय में मौजूद कैफीन से कुछ देर के लिए आलस्य दूर हो जाता है। निम्न रक्त चाप (Low blood Pressure) में चाय के सेवन से थोडा लाभ मिलता है, क्योंकि इससे रक्त चाप उच्च हो जाता है। चाय पीने से आपके शरीर में संक्रमण कम हो जाता है। चाय सर्दी-जुकाम कफ जैसी आम बीमारियों से भी राहत देता है। धूप में त्वचा झुलस जाने पर त्वचा के उस हिस्से चाय पत्ती लगाये तो सन बर्न ठीक हो जाता है।

चाय बनाने की सही विधि–सबसे पहले पानी, दूध, शक्कर आवश्यक मात्रा में लेकर उबालें। जब उबलने लगे तब नीचे उतार लें फिर उसमें आवश्यक मात्रा में चाय की पत्ती डालकर आठ मिनट ढककर रखें।

मसाला चाय रेसिपी–चाय को अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए अदरक, पुदीना, सोंठ, काली मिर्च, लौंग, इलायची भी डाली जा सकती है। तुलसी के पत्ते चाय में मिला कर पीने से सर्दियों में कफ से राहत मिलती है। चाय कुछ नाश्ता करके पियें। इस प्रकार बनाई गई चाय शरीर के लिए कम नुकसान दायक होती है।

May 21, 2018 0 comment
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obesity

अनियमित जीवन शैली और गरिष्ठ भोजन के सेवन से मोटापा बढ़ता है । हम यंहा मोटापे (obesity) और उससे छुटकारा पाने के विषय में चर्चा करेंगे । बहुत से लोग इस बात को लेकर चिंतित हो जाते हैं कि अगर हम जो खाना खाते हैं अगर हम इस खाने को कम खाएंगे तो हमारा वजन और एक्स्ट्रा चर्बी कम हो जाएगी लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है अगर आप ऐसा करेंगे तो आपका जो शरीर है वह आपको बहुत ही कमजोर लगने लगेगा लेकिन मोटापा ज़्यादा खाना खाने से नहीं बढ़ता बल्कि जो हम खाना खाते हैं । वह सही ढंग से ना पचने के कारण हमारा वजन बढ़ जाता है जो कि जब हम खाना खाते हैं और वह पेट के अंदर जाकर पचने की बजाय सड़ने लगता है जब पेट में जाकर खाना नहीं पचता तब मोटापे जैसी समस्याएँ पैदा हो जाती है साथ ही और बहुत सारी बीमारियाँ घर कर लेती हैं लेकिन मोटापा (obesity) घटना या कम करना कोई सरल काम तो नहीं है लेकिन इतना मुश्किल भी नहीं है अगर आप मन में ठान ले कि मुझे वजन कम करना है तो सबसे पहले जो आप खाते पीते हैं उस खानपान में आपको परिवर्तन करना होगा वजन कम या घटाने के लिए सबसे ज़रूरी बात की पोस्टिक खाना रोज एक्सरसाइज आदि इस पोस्ट में हम मोटापा कम करने के घरेलू इलाज बताने जा रहे हैं जिससे कि आप मोटापा कम करने का घरेलू इलाज आप खुद अपने घर पर ही कर सकते हैं।

यह जो मोटापा कम करने का घरेलू इलाज हम आपको बताने जा रहें हैं यह उपाय आपको बहुत-बहुत फायदा देने वाला है अगर आप मोटापे से परेशान हैं और आपका वजन बहुत ज़्यादा बढ़ गया है तब इस उपाय को ज़रूर अपनाएँ इससे आप को बहुत लाभ मिलने वाला है आपको बहुत से राय मशवरा देने वाले मिले होंगे लेकिन जो मैं आपको मोटापा (obesity) कम करने का घरेलू इलाज बताने जा रहा हूँ यह आजमाओगे तो आपको मोटापे से जुड़ी सारी समस्याएँ ऑटोमेटिक खत्म होती चली जाएंगी।

सबसे पहले आप को सूर्य निकलने से पहले जागना होगा जब आप सूर्य निकलने से पहले जाग जाएंगे तब आप एक गिलास पानी को उबाल कर उसमें दो नींबू का रस डाल दें नींबू का रस डालने के बाद उसमें स्वादानुसार काला नमक डाल दें आपकी यह सामग्री तैयार है यह आपको चाय की तरह सेवन करनी है लेकिन ध्यान रहे कि आप इस चाय का सेवन सिर्फ़ और सिर्फ़ सुबह खाली पेट करेंगे अगर आप कुछ खा लेते हैं तब इसका सेवन ना करें इसके बाद आपको यह चाय पी लेनी है पीने के बाद आपको टहलना या एक्सरसाइज करना जो भी आपके लिए आसान हो वह आप कर सकते हैं जितना ज़्यादा आप इस चाय को पीकर आप एक्सरसाइज करेंगे उतना ही आपको पेट की चर्बी घटाना और मोटापा कम करने में बहुत लाभ मिलेगा यह नुस्खा जिस किसी का पेट में बहुत ज़्यादा चर्बी इकट्ठी हो जाती है और जिसका वजन काफी ज़्यादा बढ़ गया हो सभी एक्स्ट्रा चर्बी को तेल की तरह पिघलाना शुरू कर देती है।

जब आप रात को सोने जाते हैं क्या आप खाना खाने के बाद ही आराम करने लग जाते हैं या सोने के लिए चले जाते हैं तो समझ लीजिए की आप दुनिया के कोई भी उपाय कर लें आप कभी भी वजन कम नहीं कर सकते या मोटापा (obesity) कम नहीं कर सकते याद रहे कि हमें अगर मोटापा कम करना है तो खाना खाने के तुरंत बाद हमें बिस्तर नहीं पकड़ना बल्कि हमें हल्का खाना-खाना है और खाने के बाद हमें आधा या एक घंटा टहलना है टहलने के बाद हमें एक गिलास पानी में दो नींबू का रस और काला नमक स्वादानुसार इसकी चाय बना लेनी है और सेवन करना है जैसे मैंने आपको पहले बताया था रात को इस नींबू की चाय का सेवन आपको खाना खाने के बाद करना है। जब आप बिस्तर पर सोने के लिए जाएँ इससे जो आपने खाना खाया है वह अच्छी तरीके से बच पाएगा और जो आपकी एक्स्ट्रा चर्बी है या बढ़ा हुआ मोटापा है उसको कम करने लगेगा और आप देखेंगे कि आप का शरीर हल्का पढ़ने लगेगा और आपका वजन कम होने लगेगा।

जब आप सुबह का खाना खाएँ तो पेट भर के खाएँ लेकिन जब आप दोपहर का खाना खाए तो सुबह जितना खाया है दोपहर में उसका आधा ही खाएँ और जब आप शाम का खाना खाए तो ध्यान रहे कि जितना आपने दोपहर को खाया है उसका आधा ही शाम को खाएँ और जितना हो सके हरी सब्जियाँ ज़्यादा ले।

May 19, 2018 0 comment
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duniya ke ajab gajab log

मानव शरीर भगवान की देन है यदि हमारे इस शरीर में थोड़ी-सी भी खराबी हो या इसमें कुछ अजीब हो या कुछ ज़रूरत से ज़्यादा हो या ज़रूरत से कम हो तो सोचो जीना कितना मुश्किल हो जाता है। आज हम ऐसे ही कुछ लोगों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपने अनोखे शरीर के कारण दुनिया में तो ख्याति पा ली पर अपने इस शरीर को वह वरदान मानते हैं या कुछ और। आइए जानते हैं। इस अजीब दुनिया के गजब लोगो (duniya ke ajab gajab log) के बारे में।

दुनिया की सबसे मोटी महिला

दुनिया की सबसे ज़्यादा वजन वाली महिला जो केवल अपनी आयु के 11 वर्ष सही से जी पाई है और अब वह बिना किसी की मदद के ना तो चल सकती है ना ही खा सकती है । इसी लिये वह duniya ke ajab gajab log की category में आती है। वह अपने हर काम के लिये दूसरों पर आश्रित है उनका नाम ईमान अहमद अब्दुलाती है। वह 25 साल से अपने घर में अपनी बहन और अपनी माँ क़े साथ रह रही है। अपने वजन के कारण वह कभी स्कूल नहीं जा सकी, उनके जन्म के समय ही वह 5 किलो की थी। जब वह 11 साल की थी तब उन्हें स्ट्रोक हुआ था। तब से वह बिस्तर पर ही है तभी से उनका वजन बढ़ता गया। वह Elephantiasis नाम की बीमारी से ग्रसित है इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति दिन पर दिन सूजता रहता है। अभी यदि उनका इलाज नहीं हुआ तो इस मोटापे के कारण उनकी मौत भी हो सकती है।

ज़रूरत से ज़्यादा लम्बा आदमी – sabse lamba aadmee

किसी की लम्बाई यदि ज़रूरत से ज़्यादा हो, तो वह भी मुसीबतों का सबब बन जाता है। धर्मेंदर जिनकी लम्बाई 8 फिट 1 इंच है वह विश्व रिकार्ड से केवल 2 इंच पीछे हैंं। वह यूपी के प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं और duniya ke ajab gajab log कहे जाते हैं। उन्होंने हिन्दी में एमए किया हुआ है। धर्मेंद्र का वजन भी 100 किलो है। वह अपने खाने पीने का खास ख्याल रखते है। अचानक उनका कद तेजी से बढ़ने लगा। फिर डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन डॉक्टर भी यह समझ नहीं पाये आख़िर उनकी लम्बाई इतनी क्यों बढ़ रही है। धर्मेंद्र का कहना है कि उनकी लंबाई उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। अपने लंबे कद की वजह से उन्हें कोई नौकरी नहीं मिल पाई है क्योंकि उनका कद सामान्य नहीं है। उन्हें सरकार से यही शिकायत है। वह बड़े-बड़े मेलों में जाकर अजब गजब करतब से लोगों का मनोरंजन करते हैं उसी से जो कमाई होती है उससे अपना गुजारा करते हैं इसके अलावा उनका एक छोटा-सा कारोबार भी है।

सबसे छोटी महिला –sabse chhoti lady / sabse chhoti mahila

ज्योति दुनिया की सबसे कम कद वाली महिला है ज्योति अमगे 18 साल की हैं और इनकी लम्बाई 24.7 सेंटीमीटर है। ज्योति ने इटली में गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड अपने नाम किया हुआ है। जाँच के बाद यह पाया गया कि ज्योति को बौनेपन की बीमारी है, जिसे विज्ञान की भाषा में एकोन्ड्रोप्लेशिया के नाम से जाना जाता है। इसमें जन्म से पहले ही शरीर का विकास स्थिर हो जाता है। अपनी इस कमी के कारण उन्हेंं कई मुश्किलोंं का सामना करना पड़ा है पर यह भी सच है कि इसी वजह से उन्हें दुनिया भर में घूमने का मौका मिला और नाम मिला।

सबसे बुजुर्ग व्यक्ति –sabse bujurg insaan / sabse budha aadmi

दुनिया के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति हैं महश्टा मुरासी इनकी उम्र 181 साल है इनका जन्म 6 जनवरी 1835 को बेंगलूरु में हुआ। ये तो विधी का विधान है कि जो इस संसार में आया है वह एक दिन मृत्यु को ज़रूर प्राप्त होगा परन्तु ऐसा माना जाता है कि यमराज भी इनके द्वार को भूल गये हैं। इनके आगे इनके पड़पोते भी स्वर्ग सिधार गये हैं। बेंगलूरु से वह 1903 में वाराणसी आ गये थे, 1957 में जूते चप्पल बनाने का काम करते थे 122 साल की उम्र में वह रिटायर हो गये। महश्टा मुरासी का कहना है कि वह काफी लम्बे समय से पृथ्वी पर हैं इस लम्बे समय में इन्होंने काफी सारी कठिनाइयों का सामना क़िया है और अपनी आँखों के सामने ना जाने कितने लोगोंं को मरते जीते देखा है।

सबसे विशालकाय मानव –sabse bada aadmi / sabse powerful man

आपने विशालकाय शरीर के मालिक हल्क का नाम तो सुना ही होगा। अगर हकीकत में आप इनसे मिलना चाहते हैं तो यह जनाब ईरान में हैं। ये फ़िल्मी दुनिया का हल्क नहीं बल्कि ईरान का हल्क है, जिनका नाम सजाद गरीबी है, आपने कई ताकतवर और विशाल शरीर वालों को देखा होगा लेकिन सजाद गरीबी के विशालकाय शरीर को देखकर आप हैरान हो जायेंगे।

24 वर्षीय पावर-लिफ्टर सजाद गरीबी आजकल काफी चर्चा में हैं। वह ‘पर्शियन हरक्यूलिस’ और ‘ईरान का हल्क’ के नाम से जाने जाते हैं। अपने विशालकाय शरीर वाले सजाद गरीबी को दुनिया के सबसे शक्तिशाली इंसानों में से एक माना जाता है। सजाद का वजन 175 किलोग्राम है और शरीर इतना बड़ा है कि उनकी गर्दन ही दिखाई नहीं देती। उनकों देखकर आपको सूमो पहलवान याद आयेंगे।

सजाद ने कडी़ मेहनत से अपने शरीर को मजबूत बना रखा है सूमो की तरह इनका शरीर फूला हुआ नहीं है बल्कि एक अलग ही इंसान की तरह यह दिखते हैं। इन दिनों यह सोशल मीडिया में काफी चर्चा में हैं। यदि आप या कोई भी हीरो इन्हें देख लेगा सच में उनके पसीने ही छूट जायेंगे। आये दिन सजाद अपनी तस्वीरें इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर करते रहते हैं। वह 50000 लोगों से भी ज़्यादा द्वारा फोलो किये जा रहे हैं।

December 16, 2017 0 comment
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Ayurveda

Ayurveda के अनुसार आपके मन का स्थूल रूप शरीर है और शरीर का सूक्ष्म रूप मन है। अतः मनुष्य के शरीर से किए गए कर्मों का मन पर और मन में आने वाले विचारों का शरीर पर बहुत महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। अतः हमारे शरीर एवं मन के बीच स्वस्थ संवाद व संतुलन ज़रूरी है और इसके लिए ज़रूरी है अपनी प्रकृति को समझना। क्योंकि प्रकृति के रहस्य को समझना परमात्मा को समझने का पहला पाठ है।

सामान्यत: Ayurveda में 3 प्र्कार की प्रकृति बताई गई हैं, वात , पित्त  और कफ । इन तीनों का सम होना यानी बराबर मात्रा में होना शरीर को स्वस्थ रखता है, जबकि इनमे से किसी की भी कमी या अधिकता से रोगों की उत्पत्ति होती है। त्रिदोष के अलावा द्विदोषज एवं सन्निपातज पृकृति भी हैं, लेकिन जटिलताओं से बचने के लिए हम यहां 3 प्रकृति की ही बात करेंगे। इन्ही 3 श्रेणियों में डालकर पूरी दुनिया के लोगों के स्वाभाव एवं स्वास्थ्य का अध्ययन किया जा सकता है और बताया जा सकता है की उन्हें कब और किस तरह की व्याधियों का सामना करना पड़ेगा। बेशक इसमें हस्तरेखा विज्ञान का भी सहारा लेना पड़ता है, लेकिन भावी व्याधियों को आज से ही अपने खान-पान एवं जीवन शैली में सुधार करके टाला जा सकता है।

आइये हम जानते हैं इन तीनो पृकृतीयों के बारे में

वात पृकृति

वात पृकृति के लोगों में बुद्धिमानी, वाक्चातुर्य, कूटनीति एवं परिस्थितियों के अनुकूल ढल जाने का गुण पाया जाता है। इनमें पाई जाने वाली मन की चंचलता इनमें उदासी, ईर्ष्या एवं तथ्य छुपाने जैसे दोष उत्पन्न करती है जिससे ये बनावटी से लगते हैं और इन्हे हमेशा लोगों का विश्वास खोने का डर रहता है। इनकी दिनचर्या एवं जीवन शैली इनके मूड के हिसाब से बदलती रहती है जिससे ये गैस, डिप्रेशन, घबराहट एवं जोड़ों के दर्द का शिकार हो जाते हैं। इन्हें समय से हल्का सुपाच्य भोजन करना चाहिए | हलका व्यायाम बेहतर है। बासी गरिष्ठ भोजन न लें। नींद पूरी लें तो स्वस्थ रहेंगे। इनकी हथेली का रंग पीला एवं त्वचा रूखी होती है।

पित्त पृकृति

पित्त पृकृति के लोग वीर साहसी कार्यकुशल एवं अतिसक्रिय स्वभाव के होते हैं। लेकिन उम्र के साथ इनमें क्रोध व घमंड की प्रवृति बहुत बढ़ जाती है जिससे इनमें परपीड़न जैसे दोष बढ़ जाते हैं। समय रहते दोषों का निराकरण करने से ये समाज में उच्च प्रतिष्ठा प्राप्त करते हैं। इनके स्वास्थ्य में ज्यादातर ज्वर, जल, चक्कर आना, अल्सर, फोड़े-फुंसी से परेशान रहते हैं। पित्त पृकृति के लोगो की हथेली का रंग लाल एवं स्पर्श में कठोर व गर्म होती है।

कफ पृकृति

कफ पृकृति के लोग बहुत उदार, दीर्घायु, पुष्ट शरीर वाले सहनशील एवं आराम से काम करने वाले होते हैं। इनकी सामान्य तकलीफों में सर्दी, जुकाम हैं। लेकिन उम्र के साथ जब शारीरिक या मानसिक दोष विकृत हो जाते हैं तो इनमें अवगुण प्रकट हो जाते हैं जिनमे प्रमुख हैं-पराया धन एवं स्त्री पर ग़लत नज़र, अच्छा जीवनसाथी होने के बावजूद व्यभिचार की प्रवृति इनके पतन का कारण बनती है। अतः प्रत्येक मनुष्य का यह कर्त्तव्य है कि जब उसे लगे उसके जीवन में कुछ असामान्य हो रहा है तो योग्य व्यक्ति से सलाह ले और संभलकर पुनः आगे बढ़ें, अन्यथा टीबी, शुगर बीपी, के साथ त्वचा एवं गुर्दों के गंभीर रोग हो सकते हैं। कफ पृकृति के लोगो की हथेली गुलाबी सफ़ेद एवं मोटी गद्देदार होती है।

इसीलिए आपकी पृकृति जो भी हो जीवन में जब भी कोई स्वास्थ्य संकट आए, तो निंम्नलिखित 5 चीजें ज़रूर आजमाएं

  1. मन्त्र अर्थात (जीवन में ज्ञानियों से परामर्श)
  1. औषधि (हमेशा अनुभवी डॉक्टर द्वारा दी गई दवा)
  1. तप (जब भी कष्ट जो भी हो धैर्य से सहना)
  1. दान (जो भी संग्रह किया है उसका बोझ कम करना-बांटना श्रम, ज्ञान, धन)

अतः प्राकृतिक निदान के द्वारा न सिर्फ़ भावी रोगों को पहचाना जा सकता है बल्कि जीवन शैली में बदलाव एवं औषधियों के द्वारा शरीर को रोग का मुकाबला करने के लिए तैयार किया जा सकता है।

September 18, 2017 0 comment
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Organ donation

किसी जीवित या मृत व्यक्ति के शरीर का ऊतक (Tissue) या कोई अंग दान करना अंगदान (Organ donation) कहलाता है। यह ऊतक या अंग किसी दूसरे जीवित व्यक्ति के शरीर में प्रत्यारोपित (ट्रान्सप्लान्ट) किया जाता है। इस कार्य के लिये दाता के शरीर से दान किये हुए अंग को शल्यक्रिया द्वारा निकाला जाता है।

इंदौर में इस पुनीत कार्य का बीड़ा उठाया है इंदौर सोसाइटी फॉर Organ donation ने जो  मुस्कान ग्रुप (Muskaan Group) और दधिची मिशन के सहयोग से निरंतर प्रयासरत है।

कई मरीज़ Organ donation की प्रतिक्षा में अपनी जान गँवा देते हैं वहीं दूसरी ओर आजकल इंदौर तथा आसपास में मस्तिष्क मृत्यु से ग्रस्त काफ़ी लोग देखे जा रहे है । यह  मानव शरीर की वह अवस्था है जिसमें उसका  मस्तिष्क कार्य करना बंद कर देता है एवं आंशिक रूप से मृत्यु हो जाती है । ऐसी अवस्था में शारीरिक सुधार की तो कोई  भी संभावना नहीं रहती परंतु शरीर के महत्वपूर्ण अंग काम करते रहते है और इन्हें किसी अन्य व्यक्ति को जीवन के रूप में उपहार स्वरूप दे सकते हैं ।

यह Organ donation की भावना को बढ़ाने और  दुसरो की ज़िंदगी बचाने में अत्यन्त प्रभावी रहेगा । सामाजिक विषय होने के बावजूद अंगदान की प्रक्रिया के लिए समाज का सक्रीय योगदान बहुत ही  आवश्यक है।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन के अनुसार वर्तमान में  भारत में मात्र 0.01% लोग ही ऑर्गन डोनेट करते हैं, जबकि पश्‍चिमी देशों में यह प्रतिशत 70-80 है.  इसका  सीधा सा   मतलब है की भारत  में  अंग दान के लिए लोगो को जागरूक करना  जरुरी है  ताकि  ऑर्गन डोनेट करने वालों की तादात में  बढ़ोतरी हो सके  ।

Organ donation के मामले में इंदौर का नाम पहले स्थान पर आ गया है। यहाँ लीवर ट्रांसप्लांट का पहला प्रयोग भी कामयाब हो गया है। मरीज 15 दिन बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुका है। उधर आर्गन डोनेशन सोसायटी किडनी, लीवर, हार्ट और आंखों के बाद अब पेंक्रियाज, लंग्स और इंटेस्टाइन डोनेशन के लिए भी कोशिश शुरू कर रहा है। प्रदेश के मामले में तमिलनाडू ऑर्गन डोनेशन में आगे है लेकिन शहर की सूची में इंदौर पहले नंबर पर आ चुका है।

आइये जानते हैं

अंगों के सुरक्षित रहने की समयावधि

–हार्ट: 4-6 घंटे

–लंग्स: 4-8 घंटे

–इंटेस्टाइन: 6-10 घंटे

–लिवर: 12-15 घंटे

–पैंक्रियाज़: 12-24 घंटे

–किडनी: 24-48 घंटे

हम यंहा पाठको की सहयता के लिए पता एवं  फोन  नम्बर  दे रहे हैं

पता :

इंदौर सोसाइटी फॉर ऑर्गन डोनेशन,

महात्मा गाँधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय ,इंदौर

E-mail:- organdonationindore@gmail.com

फ़ोन :- 0731-2527383

 

August 31, 2017 0 comment
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cancer treatment

Cancer एक बहुत ही ज़्यादा खतरनाक बीमारी है। यह शरीर के किसी भी भाग में एक गांठ के रूप में दिन-प्रतिदिन बढ़ने वाली बीमारी है। जब तक इस रोग के होने का लक्षण पता चलता है तब तक तो यह बीमारी शरीर में बहुत ज़्यादा फैल चुकी होती है। यदि Cancer रोग शरीर के किसी भी अंग में दिखाई देता है तो भी यह पूरे शरीर का रोग है इसलिए इसका उपचार करते समय यह ध्यान देना ज़रूरी है कि इसका इलाज स्थानीय उपचार करने के साथ-साथ पूरे शरीर को दोषमुक्त बनाने के लिए करना चाहिए | इस रोग से बचने के लिए जैसे ही इसके लक्षण पता चले जैसे भी हो तुरन्त ही इसका इलाज शुरू कर ही देना चाहिए ।

आइये जानते हैं Cancer रोग होने के मुख्य कारण :-

Cancer रोग होने का सबसे प्रमुख कारण दूषित भोजन का सेवन करना है।

धूम्रपान करने से या धूम्रपान करने वाले के संग रहने से भी कैंसर रोग हो सकता है।

गुटका, पान मसाला, गुटका, शराब तथा तम्बाकू का सेवन करने से कैंसर रोग हो सकता है।

अधिक मेहनत के कार्य करना तथा आराम की कमी के कारण भी कैंसर रोग हो सकता है।

बासी भोजन, सड़ी-गली चीजें तथा बहुत समय से फ्रिज में रखे भोजन को खाने से भी कैंसर रोग हो सकता है।

सबसे पहले हैं जानते है की Cancer रोग के लिए Ayurvedic उपाय :-

Cancer रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए सबसे पहले उसके शरीर पर स्थानीय उपचार करने के साथ-साथ पूरे शरीर का उपचार करना चाहिए ताकि उसका पूरा शरीर दोषमुक्त हो सके ।

Cancer रोग का उपचार शुरू करने के लिए रोगी व्यक्ति को नींबू के रस का पानी पीकर उपवास रखना चाहिए और इसके बाद कुछ दिनों तक केवल अंगूर का रस पीना चाहिए ।

Cancer रोग से पीड़ित रोगी यदि 6 महीने तक अंगूर का रस लगतार पीए तो उसे बहुत अधिक लाभ होता है।

Cancer रोग से पीड़ित रोगी यदि प्रतिदिन 1 ग्राम हल्दी नियमित रूप से खाए तो उसका यह रोग ठीक हो जाता है।

1 चम्मच तुलसी का रस तथा 1 चम्मच शहद को सुबह के समय चाटने से कैंसर रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

नीम तथा तुलसी के 5-5 पत्ते प्रतिदिन खाने से Cancer रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

गले के Cancer को ठीक करने के लिए छोटी हरड़ का टुकड़ा दिन में 2 बार भोजन करने के बाद चूसने से बहुत अधिक लाभ मिलता है।

रामबाण आयुर्वेदिक उपाय :-

देशी गाय का मूत्र आधा कप और आधा चम्मच हल्दी दोनों मिलाके गरम करना जिससे उबाल आ जाये फिर उसको ठंडा कर लेना है। सामान्य तापक्रम में आने के बाद रोगी को चाय की तरह पिलाना है चुस्किया ले-ले के अथवा सिप-सिप करके | एक और Ayurvedic दवा है पुनर्नवा जिसको अगर आधा चम्मच इसमें मिलायेंगे तो और अच्छा परिणाम आयेगा। पुनर्नवा जो आयुर्वेद के दुकान में पाउडर या छोटे-छोटे पीसेस में मिलती है।

याद रखें इस दवा  में सिर्फ़ देशी गाय का मूत्र ही काम में आता है विदेशी जर्सी का मूत्र कुछ काम नहीं आता और जो देशी गाय काले रंग की हो उसका मूत्र सबसे अच्छा परिणाम देता है इन सब में। इस दवा को (देशी गाय की मूत्र, हल्दी, पुनर्नवा) सही अनुपात में मिलाके उबालकर ठंडा करके कांच की पात्र में स्टोर करके रखिये पर बोतल को कभी फ्रिज में मत रखिये, धुप में मत रखिये। ये  दवा  कैंसर के सेकंड स्टेज में और कभी-कभी थर्ड स्टेज में भी बहुत अच्छे परिणाम देती है।

यह हमारा एक छोटा सा प्रयास है आम आदमी की जानकारी के लिए । फर्स्ट तथा सेकंड स्टेज तक में उपरोक्त दवा जरूर फायदा करती है। आपसे अनुरोध है की किसी भी अनुभवी वैद्य या डॉक्टर के मार्गदर्शन में ही किसी भी दवा का उपयोग शुरू करे ।

August 23, 2017 0 comment
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बरसात में भीगकर सर्दी का उपचार कराने से बेहतर है कि बारिश आने के पूर्व ही किसी प्रकार अपना बचाव कर लिया जाए।

ठीक उसी प्रकार रोगी होकर चिकित्सा कराने से अच्छा है कि बीमार ही न पड़ा जाए. आयुर्वेद का प्रयोजन भी यही है। स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा एवं रोगी व्यक्ति के रोग का शमन। जानिए आप किस प्रकार से आयुर्वेद की दिनचर्या, ऋतुचर्या, विहार से सम्बन्धित छोटे-छोटे किन्तु महत्त्वपूर्ण सूत्रों को अपने दैनिक जीवन में सहज रूप से धारण कर हम अपने आपको स्वस्थ एवं निरोगी बनाए रख सकते हैं।

जहां तक हो सके सदा ब्रह्ममुहूर्त में उठना चाहिए | इस समय प्रकृति मुक्तहस्त से स्वास्थ्य, प्राणवायु, प्रसन्नता, मेघा, बुद्धि की वर्षा करती है।

प्रातः बिस्तर से उठते ही मूत्र त्याग के पश्चात उषा पान अर्थात बासी मुँह 2-3 गिलास शीतल जल के सेवन की आदत सिरदर्द, अम्लपित्त, कब्ज, मोटापा, रक्तचाप, नैत्र रोग, अपच सहित अनेक रोगों से हमारा बचाव करती है।

स्नान हमेशा सामान्य शीतल जल से करना चाहिए । स्नान करने के समय सर्वप्रथम जल सिर पर डालना चाहिए, ऐसा करने से मस्तिष्क की गर्मी पैरों से निकल जाती है। हमेशा दिन में 2 बार मुँह में जल भरकर, नैत्रों को शीतल जल से धोना नेत्र दृष्टि के लिए लाभकारी है। प्रतिदिन नहाने से पूर्व, सोने से पूर्व एवं भोजन के पश्चात् मूत्र त्याग अवश्य करना चाहिए. यह आदत आपको कमर दर्द, पथरी तथा मूत्र सम्बन्धी बीमारियों से बचाती है।

प्रतिदिन सरसों, तिल या अन्य औषधीय तेल की मालिश नित्यप्रति करने से वात विकार बुढ़ापा, थकावट नहीं होती है। त्वचा सुन्दर, दृष्टि स्वच्छ एवं शरीर पुष्ट होता है।

रोजाना शरीर की क्षमतानुसार प्रातः भ्रमण, योग, व्यायाम करना चाहिए ।

अपच, कब्ज, अजीर्ण, मोटापा जैसी बीमारियों से बचने के लिए भोजन के 30 मिनट पहले तथा 30 मिनट बाद तक जल नहीं पीना चाहिए. भोजन के साथ जल नहीं पीना चाहिए. | घूँट-दो घूँट ले सकते हैं। प्रत्येक दिन, दिनभर में 3-4 लीटर जल थोड़ा-थोड़ा करके पीते रहना चाहिए.

हमेशा भोजन के प्रारम्भ में मधुर-रस (मीठा) , मध्य में अम्ल, लवण रस (खट्टा, नमकीन) तथा अन्त में कटु, तिक्त, कषाय (तीखा, चटपटा, कसेला) रस के पदार्थों का सेवन करना चाहिए।  भोजन के उपरान्त वज्रासन में 5-10 मिनट बैठना तथा बांयी करवट 5-10 मिनट लेटना चाहिए । भोजन के तुरन्त बाद दौड़ना, तैरना, नहाना, स्वास्थ्य के बहुत हानिकारक है। भोजन करके तत्काल सो जाने से पाचनशक्ति का नाश हो जाता है जिसमें अजीर्ण, कब्ज, आध्मान, अम्लपित्त जैसी व्याधियाँ हो जाती है। इसलिए हमेशा सायं का भोजन सोने से 2 घन्टे पूर्व हल्का एवं सुपाच्य करना चाहिए।

शरीर एवं मन को तरोताजा एवं क्रियाशील रखने के लिए औसतन 6-7 घन्टे की नींद आवश्यक है।

गर्मी के अलावा अन्य ऋतुओं में दिन में सोने एवं रात्री में अधिक देर तक जगने से शरीर में भारीपन, ज्वर, जुकाम, सिर दर्द एवं अग्निमांध होता है।

कभी भी दूध के साथ दही, नीबू, नमक, तिल उड़द, जामुन, मूली, मछली, करेला आदि का सेवन नहीं करना चाहिए. त्वचा रोग एवं। ससमतहल होने की सम्भावना रहती है।

स्वास्थ्य चाहने वाले व्यक्ति को मूत्र, मल, शुक्र, अपानवायु, वमन, छींक, डकार, जंभाई, प्यास, आँसू नींद और परिश्रमजन्य श्वास के वेगों को उत्पन्न होने के साथ ही शरीर से बाहर निकाल देना चाहिए ।

हमेशा रात्री में सोने से पूर्व दाँतों की सफाई, नैत्रों की सफाई एवं पैरों को शीतल जल से धोकर सोना चाहिए । प्रतिदीन रात्री में शयन से पूर्व अपने किये गये कार्यों की समीक्षा कर अगले दिन की कार्य योजना बनानी चाहिए. तत्पश्चात् गहरी एवं लम्बी सहज श्वास लेकर शरीर को एवं मन को शिथिल करना चाहिए. शान्त मन से अपने दैनिक क्रियाकलाप, तनाव, चिन्ता, विचार सब परात्म चेतना को सौंपकर निश्चिंत भाव से निद्रा की गोद में जाना चाहिए ।

कहने का तात्पर्य है की केवल जीवन में थोड़ा सा अनुशासन लाकर अपने  आपको सदैव निरोगी तथा जिन्दादिल  रख सकते हैं । हमेशा मुस्करातें रहें , तनाव को अपने से दूर रखे  |  जीवन में लक्ष जरूर बड़ा रखें किन्तु वर्तमान में जो आपके पास है  , उसका आनंद लेते  रहे |

August 3, 2017 0 comment
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Everyone like dense, shiny and dark hairs. If you proceed to try out with your hairs with carelessness, then before the time of hair falls , premature graying, dandruff, problems like splints arise. Particularly when the monsoon occurs, then this problem comes up more.

With the arriving of the monsoon, there is a great deal of problems in the hairs, stiffness and dandruff. During monsoon the amount of chlorine in the water goes up, which helps in the fight against the bacteria present in rain water. In that respect is as well a second harmful aspect, due to the fact that due to chlorine, the hairs become damaged. But there is no need to panic this. If this monsoon is included in some of the rules, then the beauty of the hairs can be retained.

Pay attention to these things for the protection of the hairs in the monsoon-

  1. Use only the mild shampoo and conditioner for hairs use and stay away from hair spray.
  2. After washing the hairs, apply the conditioner every time. Keep in mind that except the root and scalp of the hairs, it should be used at the bottom of the hairs.
  3. Continue washing your hairs regularly so that it is clear.
  4. Eat balanced and protein-rich nutrients, eat fruits and veggies and drink lot of water.

What to do in the rainy season

– Try to adopt small hair styles.

– Massage the hairs with a hot oil once a week

Do not do during the rainy season

– Do not use a hair dryer, if it is necessary, then apply it only after the hairs is fully filled and keep the dryer at least 6 inches from your scalp.

– Keep your hairs away from chemical substances.

– Save hairs from the rain water, especially in the early monsoon. In fact, along with rainwater, the polyenters present in the air also come in, which destroys the strength of the hairs, they have stubbornness and they look like lifeless.

– Do not comb into wet hairs, because the hairs starts breaking down.

Hair Routine Hair Care Tips For All Hairs Types

Most people do not know about the nature of their hairs, they do not know in which category they put their hairs. Let us know how to recognize our hairs and how to take care of it during the monsoon.

For dry hairs

If your hairs becomes sticky after six days of hairs washing  then your hairs will be called dry hairs.

Some tips for taking care of such hairs in monsoon

– For dry hairs there are some particular types of shampoo that should be applied.

– At least your hairs must be washed once or twice a week.

For oily hairs

If your hair  starts to look sticky after one or two days after washing the hairs, it signifies that your hairs is oily.

Some ways to care for such hairs during monsoon

– Use a mild shampoo, conditioner or vinegar / lemon rinse. For this, massage your hairs with two spoons of vinegar or lemon juice. To double its effect, use peppermint tea and distilled water.

– To preserve the freshness of your hairs, wash them according to necessity.

For normal hairs

If your hairs are sticky after three or four days after washing the hairs, it means that your hairs fall in the normal hairs category.

Mild shampoo and good conditioner should be used for such hairs.

August 2, 2017 0 comment
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अगर आपकी शारीरिक ऊर्जा अपने समुचित संतुलन में है और पूरी तरह से प्रवाहित हो रही है तो आप शारीरिक और मनोवैज्ञानिक दोनों ही तरह से पूरे स्वस्थ रहेंगे। जिस के लिए आप को प्रति दिन योग और हमारा स्वास्थ्य पर ध्यान रखना होगा |

वर्तमान चिकित्सा का फोकस शरीर का रसायन शास्त्र है। अपने शरीर की हर समस्या के लिए हम कोई ना कोई दवा लेते हैं ताकि कुछ राहत मिले। लेकिन ये दवा भी तो एक रसायन ही। ये रसायन आपकी किसी विशेष परेशानी को दूर करता है, लेकिन इसका एक साइड इफेक्ट भी होता है। इस साइड इफेक्ट के लिए भी एक प्रतिरोधक औषधि है जिसके बाद प्रतिरोधक दवाएं लेने का एक अंतहीन सिलसिला चलता रहता है।

योग का नियमित अभ्यास सभी अवस्था में युवा तथा वृद्धा अवस्था में भी मानव-शरीर को ओजस्वी और स्वस्थ बनाये रखेगा। योग व्यायामों का मानव शरीर की सभी प्रणालियों पर जिनमें ग्रन्थि, अंग और नाड़ी तंत्र सम्मिलित होते हैं,। इनका पूरे शरीर पर शुद्धकारी और पुन: यौवन प्रदान करने वाला प्रभाव होता है। योग आसनों के अभ्यास की अवधि में शरीर के पृथक-पृथक भागों को खींचने और सिकोडऩे की वैकल्पिक लयबद्ध पद्धति से कोष्ठकों में से शिथिल निष्क्रिय लसीका बाहर आने लगती हैं। हर बार संकुचन तथा (सिकुडऩ) के साथ रक्तापूर्ति में थोड़ी-सी कमी हो जाती है और हर खिंचाव के साथ वही भाग ऑक्सीजन और पौष्टिक तत्त्वों वाले ताजा रक्तापूर्ति से भर जाते हैं। इस प्रकार अंगों और मांसपेशियों को सर्वाधिक पोषण मिलता है, रक्त संचरण सुधरता है और विषकण तथा व्यर्थ पदार्थ शरीर से बाहर निकल जाते हैं।

आज की तेज रफ्तार भरी ज़िन्दगी में लोगो ने अपना ख्याल रखना तो जैसे छोड़ ही दिया है। ना ही आजकल किसी के पास व्यायाम के लिए समय है और ना ही लोग अपने खान पान का ठीक से-से ख्याल रखते है। इस तरह से भागमभाग वाली ज़िन्दगी में हम दूसरे काम तो कर लेते है। लेकिन हम सबसे महत्त्वपूर्ण चीज़ याने की हमारे स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देते है।

स्वास्थ्य का ठीक तरह से ख्याल ना रखने के कारण कई तरह की चीज़े जन्म लेती है जैसे तनाव, थकान, चिड़चिड़ाहट, इत्यादि कई तरह की शारीरिक बीमारिया। इन सभी कारणों से हमारी ज़िन्दगी अस्त-व्यस्त हो जाती है। ऐसे में ज़िंदगी को स्वस्थ तथा ऊर्जावान बनाये रखने के लिये हमे व्यायाम की ज़रूरत होती है। लेकिन कठिन और थका देने वाली दो-ढाई घंटे लंबी कसरत करना हर किसी के बस की बात नहीं है।

योग प्राचीन समय से मनुष्य को प्रकृति द्वारा दिया गया बहुत ही महत्त्वपूर्ण और अनमोल उपहार है, जो जीवन भर मनुष्य को प्रकृति के साथ जोड़कर रखता है। यह शरीर और मस्तिष्क के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए, इन दोनों को संयुक्त करने का सबसे अच्छा अभ्यास है। यह एक व्यक्ति को सभी आयामों पर, जैसे-शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक स्तर पर नियंत्रण के द्वारा उच्च स्तर की संवेदनशीलता प्रदान करता है। स्कूल और कॉलेज में विद्यार्थियों की बहतरी के साथ ही पढ़ाई पर उनकी एकाग्रता को बढ़ाने के लिए योग के दैनिक अभ्यास को बढ़ावा दिया जाता है। यह लोगों द्वारा किया जाने वाला व्यवस्थित प्रयास है, जो पूरे शरीर में उपस्थित सभी अलग-अलग प्राकृतिक तत्वों के अस्तित्व पर नियंत्रण करके व्यक्तित्व में सुधार लाने के लिए किया जाता है।

योग के सभी आसनों से लाभ प्राप्त करने के लिए सुरक्षित और नियमित अभ्यास की आवश्यकता है। योग का अभ्यास आन्तरिक ऊर्जा को नियंत्रित करने के द्वारा शरीर और मस्तिष्क में आत्म-विकास के माध्यम से आत्मिक प्रगति को लाना भी है। योग के दौरान श्वसन क्रिया में ऑक्सीजन लेना और छोड़ना सबसे मुख्य क्रिया है। दैनिक जीवन में योग का अभ्यास करना हमें बहुत-सी बीमारियों से बचाने के साथ ही भयानक बीमारियों; जैसे-कैंसर, मधुमेह, उच्च व निम्न रक्त दाब, हृदय रोग, किडनी का खराब होना, लीवर का खराब होना, गले की समस्याओं और अन्य बहुत-सी मानसिक बीमारियों तथा तनाव से भी बचाव करता है।

वर्तमान में, लोगों के जीवन को बेहतर करने के लिए फिर से योग का अभ्यास करने की आवश्यकता है। दैनिक जीवन में योग का अभ्यास शरीर को आन्तरिक और बाहरी ताकत प्रदान करता है। यह शरीर के प्रतिरोधी प्रणाली को मजबूती प्रदान करने मेंऔर स्वस्थ रखने में मदद करता है, इस प्रकार योग विभिन्न और अलग-अलग बीमारियों से बचाव करता है। यदि योग को नियमित रूप से किया जाए तो यह दवाईयों का दूसरा विकल्प हो सकता है। यह प्रतिदिन खाई जाने वाली भारी दवाईयों के दुष्प्रभावों को भी कम करता है। प्राणायाम और कपाल-भाति जैसे योगों को करने का सबसे अच्छा समय सुबह का समय है, क्योंकि यह शरीर और मन पर नियंत्रण करने के लिए बेहतर वातावरण प्रदान करता है।

हम अपने अगले ब्लॉग में विभिन्न प्रकार के योग के आसन तथा उनकी विधि और उसके फायदे इत्यादि पर प्रकाश डालेंगे l

July 27, 2017 1 comment
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