Home Celebrity
Category

Celebrity

International court of justice

जस्टिस दलवीर भंडारी दूसरी बार हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (International court of justice) में चुने गए हैं। लंबी चुनावी प्रक्रिया   के बाद आखिरकार उनके ब्रिटिश कॉम्पिटीटर जस्टिस क्रिस्टोफर ग्रीनवुड ने अपनी दावेदारी वापस ले ली। भारतीय समयानुसार सोमवार देर रात 2:25 बजे जस्टिस दलवीर  भंडारी के चुने जाने का एलान हुआ। वे इस ऑर्गनाइजेशन में दो बार पहुंचने वाले एक  मात्र   भारतीय हैं। उनके खिलाफ चुनावी  मैदान में जस्टिस ग्रीनवुड के आईसीजे की दौड़ से बाहर होते ही यह पहला मौका होगा, जब यूएस, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस (पी-5) का कोई जज इंटरनेशनल कोर्ट में नहीं होगा।

जस्टिस ग्रीनवुड के मैदान से हटने के बावजूद यूनाइटेड नेशन्स में वोटिंग हुई. इसमें जस्टिस भंडारी को जनरल असेंबली के 183 और सिक्युरिटी काउंसिल के सभी 15 वोट मिले।

वे 2012 में आईसीजे के जज बने थे, उनका टेन्याेर 18 फरवरी में पूरा हो रहा है। इससे पहले भारत से जस्टिस नगेंद्र सिंह ICJ में दो बार चुने जा चुके हैं।

ऐसा माना जा रहा भंडारी की इस जीत को भारत की बड़ी डिप्लोमैटिक कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है। नरेंद्र मोदी ने जस्टिस भंडारी के लिए जबर्दस्त कैम्पेन किया था।

दलवीर भंडारी भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायधिश भी थे। उनका जन्म वर्ष 1 अक्टूबर 1947 को राजस्थान के जोधपुर में हुआ था। दलवीर भंडारी के पिता और दादा राजस्थान बार एसोसिएशन के सदस्य थे। जोधपुर विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने राजस्थान उच्च न्यायालय में वकालत की। वर्ष 1991 में भंडारी वह दिल्ली आ गए और यहाँ वकालत करने लगे अक्टूबर 2005 में वह मुंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने थे। दलवीर भंडारी ने 19 जून 2012 को पहली बार इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के सदस्य की शपथ ली थी। वह सुप्रीम कोर्ट में भी वरिष्ठ न्यायमूर्ति रहे हैं।

दलवीर भंडारी इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (International court of justice) में जाने से पहले भारत में विभिन्न अदालतों में 20 वर्ष से अधिक समय तक उच्च पदों पर रह चुके हैं। पहले के 11 दौर के चुनाव में भंडारी को महासभा के करीब दो तिहाई सदस्यों का समर्थन मिला, लेकिन सुरक्षा परिषद में वे ग्रीनवुड के मुकाबले तीन मतों से पीछे थे। 12वें दौर का चुनाव आज होना था और इस चुनाव से पहले ही ब्रिटेन ने अपने कदम खींच लिए । भंडार की जीत भारत के लिहाज से बेहतरीन है, क्योंकि पाकिस्तान में बंद कुलभूषण जाधव का मामला भी अंतर्राष्ट्रीय अदालत में है।

जज बनने के बाद आईसीजे में अब तक जितने भी फैसले हुए हैं, उनमें जस्टिस भंडारी का स्पेशल ओपिनियन रहा है। उन्होंने समुद्री विवादों, अंटार्कटिका में हत्या, नरसंहार के अपराध, महाद्वीपीय शेल्फ के परिसीमन, न्यूक्लियर डिजार्मामेंट (परमाणु निरस्त्रीकरण) , टेरर फाइनेसिंग, वॉयलेशन ऑफ यूनिवर्सल राइट्स जैसे केसों में बहुत ही अहम भूमिका निभाई. इसके अलावा, पाकिस्तान में कैद भारतीय कुलभूषण जाधव को फांसी से बचाने में भी जस्टिस भंडारी का अहम राेल था। उन्होंने 2008 के भारत-पाक समझौते का हवाला देते हुए कहा था कि पाक ने ह्यूमन राइट्स का वॉयलेशन किया है।

जोधपुर के नामी वकील महावीरचंद भंडारी के घर  में जन्मे जस्टिस भंडारी ने जोधपुर यूनिवर्सिटी से लॉ करने के बाद अमेरिका से मास्टर्स डिग्री ली।  राजस्थान हाईकोर्ट में कुछ सालों की प्रैक्टिस के बाद वे दिल्ली में प्रैक्टिस करने लगे। जस्टिस दलवीर भंडारी को 2014 में पद्मभूषण से भी  सम्मानित किया गया था।

आईसीजे    जस्टिस दलवीर भंडारी

 

November 22, 2017 0 comment
0 Facebook Twitter Google + Pinterest
Abraham Lincoln

अब्राहम लिंकन (Abraham Lincoln) 13 फरवरी, 1809 को एक गरीब परिवार में  हुवा था | अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का शुरुआती जीवन बहुत ही अभावों में गुजरा था। जीवनयापन के लिए कम उम्र में उन्हें कई तरह के काम करने पड़े थे। कुछ दिनों तक उन्होंने चाय की दुकान पर भी नौकरी की। उन्हीं दिनों की बात है। एक महिला उनकी दुकान पर आई | उसने उनसे पाव भर चाय मांगी। लिंकन ने जल्दी-जल्दी उसे चाय तौलकर दी। रात में जब उन्होंने हिसाब-किताब किया तो उन्हें पता चला कि उन्होंने भूलवश उस महिला को आधा पाव ही चाय दी थी। वह परेशान हो गए | पहले तो उन्होंने सोचा कि कल जब वह फिर आएगी तो उसे आधा पाव चाय और दे देंगे। लेकिन फिर ख्याल आया कि अगर वह नहीं आई तो। संभव है वह इधर कदम ही न रखे। वह समझ ही नहीं पा रहे थे कि करे तो क्या करें?

अब्राहम लिंकन एक बहुत बड़े अपराधबोध से घिर गए थे कि उन्होंने उसे सही मात्रा में चाय क्यों नहीं दी। फिर उन्होंने तय किया कि इसी वक्त जाकर उस महिला को बाकी चाय भी दी जाए | आखिर उसकी चीज है, उसने उसके पूरे पैसे दिए हैं।  अब्राहम लिंकन उसका घर जानते थे। उन्होंने एक हाथ में चाय ली और दूसरे हाथ में लालटेन लेकर निकल पड़े। उसका घर लिंकन के घर से लगभग तीन मील दूर था। उन्होंने उस महिला के घर पहुंचकर दरवाजा खटखटाया। महिला ने दरवाजा खोला तो उन्होंने कहा-क्षमा कीजिए, मैंने गलती से आपको आधा पाव ही चाय दी थी। यह लीजिए बाकी चाय। महिला आश्चर्य से उन्हें देखने लगी। फिर उसने कहा-बेटा, तू आगे चलकर महान आदमी बनेगा।

वकालत से कमाई की दृष्टि से देखें तो अमेरिका के राष्ट्रपति बनने से पहले Abraham Lincoln ने बीस साल तक वकालत की। लेकिन उनकी वकालत से उन्हें और उनके मुवक्किलों को जितना संतोष और मानसिक शांति मिली वह धन-दौलत बनाने के आगे कुछ भी नहीं है। उनके वकालत के दिनों के सैंकड़ों सच्चे किस्से उनकी ईमानदारी और सज्जनता की गवाही देते हैं।

Abraham Lincoln

लिंकन अपने उन मुवक्किलों से अधिक फीस नहीं लेते थे जो ‘उनकी ही तरह गरीब’ थे। एक बार उनके एक मुवक्किल ने उन्हें पच्चीस डॉलर भेजे तो लिंकन ने उसमें से दस डॉलर यह कहकर लौटा दिए कि पंद्रह डॉलर पर्याप्त थे। आमतौर पर वे अपने मुवक्किलों को अदालत के बाहर ही राजीनामा करके मामला निपटा लेने की सलाह देते थे ताकि दोनों पक्षों का धन मुकदमेबाजी में बर्बाद न हो जाये इसके बदलें में उन्हें न के बराबर ही फीस मिलती थी। एक शहीद सैनिक की विधवा को उसकी पेंशन के 400 डॉलर दिलाने के लिए एक पेंशन एजेंट 200 डॉलर फीस में मांग रहा था। लिंकन ने उस महिला के लिए न केवल मुफ्त में वकालत की बल्कि उसके होटल में रहने का खर्चा और घर वापसी की टिकट का इंतजाम भी किया।

Abraham Lincoln और उनके एक सहयोगी वकील ने एक बार किसी मानसिक रोगी महिला की जमीन पर कब्जा करने वाले एक धूर्त आदमी को अदालत से सजा दिलवाई. मामला अदालत में केवल पंद्रह मिनट ही चला।सहयोगी वकील ने जीतने के बाद फीस में बटवारा कर के अापस मे बाट लिया। सहयोगी वकील ने कहा कि उस महिला के भाई ने पूरी फीस चुका दी थी और सभी अदालत के निर्णय से प्रसन्न थे परन्तु लिंकन ने कहा–” लेकिन मैं खुश नहीं हूँ! वह पैसा एक बेचारी रोगी महिला का है और मैं ऐसा पैसा लेने के बजाय भूखे मरना पसंद करूँगा। तुम मेरी फीस की रकम उसे वापस कर दो।

आज के हिसाब से सोचें तो Abraham Lincoln बेवकूफ थे। उनके पास कभी भी कुछ बहुतायत में नहीं रहा और इसमें उन्हीं का दोष था। लेकिन वह हम सबमें सबसे अच्छे मनुष्य थे, क्या कोई इस बात से इनकार कर सकता है?

Abraham Lincoln का  कार्यकाल 1861 से 1865 तक था। ये रिपब्लिकन पार्टी से थे। उन्होने अमेरिका को उसके सबसे बड़े संकट  गृहयुद्ध (अमेरिकी गृहयुद्ध) से पार लगाया था । अमेरिका में दास प्रथा के अंत का श्रेय लिंकन को ही जाता है।

अब्राहम लिंकन  की  मृत्यु 15 अप्रैल 1865 पेटर्सन  हाउस, वाशिंगटन , D.C., यूनाइटेड  स्टेट में हुई ।

November 1, 2017 0 comment
0 Facebook Twitter Google + Pinterest
Gujarat Assembly election 2017

गुजरात में BJP 1995 से सत्ता में है। इसलिए कुछ चुनौतियां ज़रूर हैं लेकिन अभी चुनाव भी बहुत दूर है। एंटी-इंकम्बेंसी का फ़ैक्टर तो है ही। बीस साल से ऊपर हो गए हैं BJP को सत्ता में रहते हुए | कार्यकर्ताओं को प्रेरित करना है। पिछले साल का मानसून बहुत अच्छा नहीं रहा है इसलिए किसान और खेती से जुड़े हुए भी तमाम मसले हैं। Amit Shah काफी व्यावहारिक आदमी भी हैं। उन्हें मालूम है कि ग्राउंड लेवल पर क्या चुनौतियां हैं। इन सब चुनौतियां का सामना तो उन्हें करना ही है। इसीलिए बीजेपी ने Gujarat Assembly election 2017 की तैयारियां बहुत ही पहले से शुरू कर दी हैं।

गुजरात विधान सभा चुनाव 2017 (Gujarat Assembly election 2017) में बीजेपी के सामने गुजरात में पटेल आंदोलन और Hardik Patel अभी भी एक चुनौती है पूरे गुजरात में पटेलों का प्रभाव है। हार्दिक पटेल के इर्द-गिर्द विपक्षी एकता कायम हो सकती है। शिवसेना के उद्धव ठाकरे और जेडी (यू) के नीतिश कुमार ने हार्दिक पटेल के साथ एकजुटता दिखाई है। सालों से पटेल बीजेपी का साथ देते आए हैं। अब देखने वाली बात होगी कि वे बीजेपी को छोड़कर हार्दिक का साथ देते है क्या?

दलितों और आदिवासियों का साथ परंपरागत रूप से कांग्रेस को मिलता है लेकिन फिर भी वह जीत नहीं पाते हैं। इसके लिए उनके एक और मजबूत समुदाय का साथ चाहिए जो कि दरबारी ठाकुरों का हो सकता है।

शंकर सिंह वाघेला इसी समुदाय से आते हैं। लेकिन अगर बीजेपी की तरफ चले जाते हैं तब कांग्रेस को नुकसान और बीजेपी को फ़ायदा होगा। हम आम तौर पर मानते हैं कि सिर्फ़ हिन्दी प्रदेशों में ही जाति का फैक्टर काम करता है लेकिन गुजरात में भी इसका बहुत महत्त्व है।  बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में जो अति पिछड़ों को जोड़ने का फार्मूला अपनाया है वही वह गुजरात में भी पहले अजमा चुके हैं।

गुजरात में चालीस अति पिछड़ी जातियां हैं। इसमें यादव भी है जो सौराष्ट्र में है। इसलिए पटेलों के खिसकने और दलितों का साथ नहीं मिलने की हालत में ये जातियां एक बार फिर से बीजेपी के लिए फ़ायदे का सौदा साबित हो सकती है।

पीएम नरेंद्र मोदी के गृह प्रदेश गुजरात में दशकों बाद बैकफुट पर नजर आ रही बीजेपी ने गुजरात विधानसभा चुनावों को लेकर गुजरात विधान सभा चुनाव 2017 (Gujarat Assembly election 2017) मे एक नया दांव खेलना शुरू किया है। हार्दिक पटेल के कांग्रेस की तरफ झुकाव को देखते हुए बीजेपी को पटेल वोट बैंक में सेंधमारी का खतरा दिख रहा है। अपने इस वोट बैंक को बचाने के लिए बीजेपी अब गुजरात में वोटरों को कांग्रेस के KHAM समीकरण की याद दिला रही है।

दरअसल KHAM गुजरात कांग्रेस के दिग्गज नेता और मुख्यमंत्री रहे माधवसिंह सोलंकी के दिमाग की उपज थी। 1985 में इस समीकरण का इस्तेमाल कर सोलंकी ने 182 सीटों में से 149 पर कांग्रेस को बहुत बड़ी जीत दिलाई थी। जीत के इस भारी अंतर का रेकॉर्ड आज भी कायम है। KHAM का मतलब है क्षत्रिय (ओबीसी सहित) , हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम। गुजरात की 70 फीसदी आबादी को शामिल करने वाली इस इंजिनिरिंग ने उस वक्त कांग्रेस को अजेय बना दिया था। कांग्रेस के इस  इस समीकरण में पटेल और ऊंची जातियों के वोट नहीं शामिल थे। बीजेपी अब पटेल वोटरों को यही याद दिला रही है।

गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के कांग्रेस उपाध्यक्ष से गुप्त मुलाकात की खबरों के बाद तो बीजेपी नेताओं ने एकसुर में यह बात कहनी शुरू कर दी है। दरअसल यह KHAM ही समीकरण भी था जो गुजरात में कांग्रेस के पतन का कारण बना, क्योंकि पार्टी इसे बनने के तुरंत बाद से ही कायम नहीं रख सकी। 1990 में चिमनभाई पटेल के नेतृत्व में जनता दल ने पटेल वोटों को अपने पक्ष में कर बीजेपी के साथ गठबंधन की सरकार बना कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया था।

ऐसा बिलकुल भी  नहीं है कि हार्दिक सारे पटेलों में स्वीकार्य हैं और उनके जाने से पूरा वोट बैंक साफ हो जाएगा। पर कांग्रेस हार्दिक की मदद से पटेल वोट बैंक में जितना भी सेंध लगा पाएगी वह बीजेपी के लिए नुकसान ही है। हार्दिक पटेल के सारे समर्थक युवा हैं औऱ उम्र के दूसरे और तीसरे दशक में हैं। ऐसे में  युवा पटेल वोटर्स अगर बीजेपी का साथ छोड़ देंगे तो यह भा.ज.पा. को  एक बड़ा नुकसान होगा ।

आगे देखते है की ह भा.ज.पा. की नई नीति कंहा तक कारगर साबित  होती है  ।

October 31, 2017 0 comment
0 Facebook Twitter Google + Pinterest
Sunny Leone

Sunny Leone एक बार फिर से विवादों में घिरी हुइ नज़र आ रही है । एक बार फिर से उन पर धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोप लगा है। गुजरात के शहर अहमदाबाद में जहां नवरात्रि का रंग अपने पूरे परवान चढ़ा हुआ है वहीं तकरीबन हर बड़ी कम्पनी अपने विज्ञापनों को ज़्यादा से ज़्यादा प्रकाश में लाने की कोशिशों में जुटी हुई हैं। इसी रेस में एक कॉन्डम ब्रांड मैनफ़ोर्स ने भी अपने कुछ पोस्टर शहर में लगा दिए और इसी के चलते पूरे नवरात्र बवाल मच रहा ।

Condom Brand Manforce ने बड़ी ही चतुराई से नवरात्रि की शुभकामना संदेश के होर्डिंग्स लगाए हैं। इन होर्डिंग्स में मैनफ़ोर्स की Brand Ambassador Sunny Leone की तस्वीर दिखाई दे रही है। इसमें सनी के साथ ही साथ मैनफ़ोर्स का लोगो और ‘प्ले लव और नवरात्रि’ की टैगलाइन दिख रही है। हालांकि, होर्डिंग में कहीं भी Condom शब्द का प्रयोग नहीं हुआ है। गुजरात में नवरात्रों से जुड़े Sunny Leone के एक कॉन्डम के विज्ञापन पर बवाल मचा हुआ है। सूरत की सड़कों पर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग में Sunny Leone एक कॉन्डम के विज्ञापन में नजर आ रही हैं जिसमें गुजराती में नवरात्री संदेश लिखा है ‘आ नवरात्री ए रामो, परानतु प्रेमथी’ इसका हिन्दी में मतलब हुआ इस नवरात्र खेलें मगर प्यार से।

इस तरह के होडिंग का विरोध करते हुए कुछ संगठनों ने तुरंत ही सनी लियोनी की फोटो वाली होर्डिंग्स को हटाने की मांग की है। इतना ही नहीं केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान को शिकायती चिट्ठी भी लिखी गई है। दरअसल सनी लियोनी मैनफोर्स की ब्रांड एंबेसडर हैं। कॉन्फिडिरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स ने केंद्रीय मंत्री पासवान पत्र लिखकर कहा है कि त्यौहार के मौके पर गुजरात के ज्यादातर शहरों में मैनफोर्स के बैनर सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ हैं। यह सब सिर्फ़ और सिर्फ़ हिन्दुस्थान में ही संभव है कि यंहा कोई भी कंपनी या सेलिब्रिटी या अन्य कोई भी कभी भी आकर किसी भी त्यौहार या देवी देवताओं का मजाक बनता हुवा देख सकता है।

इस तरह के होडिंग का विरोध करते हुए कुछ संगठनों ने तुरंत ही Sunny Leone की फोटो वाली होर्डिंग्स को हटाने की मांग की है। इतना ही नहीं केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान को शिकायती चिट्ठी भी लिखी गई है। दरअसल सनी लियोनी मैनफोर्स की ब्रांड एंबेसडर हैं। कॉन्फिडिरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स ने केंद्रीय मंत्री पासवान पत्र लिखकर कहा है कि त्यौहार के मौके पर गुजरात के ज्यादातर शहरों में मैनफोर्स के बैनर सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ हैं। यह सब सिर्फ़ और सिर्फ़ हिन्दुस्थान में ही संभव है कि यंहा कोई भी कंपनी या सेलिब्रिटी या अन्य कोई भी कभी भी आकर किसी भी त्यौहार या देवी देवताओं का मजाक बनता हुवा देख सकता है।  इस ब्लॉग के माध्यम से मेरा खुला चेलेंज है की कोई भी कंपनी या सेलिब्रिटी या अन्य कोई भी , किसी अन्य धर्म विशेष के बारे में इस तरह के विज्ञापन  बनाकर  देख ले जी नहीं , भारत में ये संभव नहीं है ।क्योंकि मेरा देश अहिष्णु हो  जायेगा । मेरे देश को सहिष्णु कहलवाने के लिए  उसे हमेशा अपना खुद  तथा अपने धर्म का  मजाक उड़वाना ही  होगा, नहीं तो कितने ही लोगो की बीवियों  को ये देश असुरक्षित लगने लगेगा ।

मुझे इस विज्ञापन पोस्टर पर लिखी गई सामग्री अनुचित और बेढंगी लगी। ये नौ रातें प्यार करने के बारे में नहीं हैं। ये त्यौहार नृत्य करने और कई रीति-रिवाजों के बारे में है। यदि कंपनी विज्ञापन करना ही चाहती है, तो इसे कोई और मौका तलाशना चाहिए । नवरात्रि हिंदुओं का पवित्र त्यौहार है जिसे नौ दिनों तक मनाया जाता है।

September 28, 2017 0 comment
1 Facebook Twitter Google + Pinterest
https://www.youtube.com/watch?v=t3_j4S7T7vI

क्या हुवा Sapna Chaudhary के डांस शो में जो स्टेज के बाहर भी लग गई आग.

Sapna Chaudhary (सपना चौधरी) की लोकप्रियता का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि उसकी एक झलक देखने के लिए लोगो ने हंगामा कर दिया।

राजस्थान के सीकर (झुंझुनूं) स्थित ढ़ागौड़जी के आशीर्वाद गार्डन में रविवार की रात हरियाणवी डांसर Sapna Chaudhary के कार्यक्रम में बहुत ही जमकर हंगामा हुआ। शायद जिसका कारण बिना सोचे-समझे दी गई अनुमति है। प्रशासन को पता था कि सपना के कार्यक्रम में भीड़ बहुत उमड़ती है, इसके बावजूद वहाँ पर केवल 40 होमगार्ड तैनात किए गए. जब मामला बिगड़ गया और पत्थरबाजी शुरू हो गई तब आरएसी की टुकड़ी व तीन थानों का फोर्स मंगवाया गया। तब तक आधा दर्जन से अधिक गाड़ियों मेें तोड़फोड़ और तीन बाइक जला दी गई थी l

कार्यक्रम में 1000 और 500 रुपए का टिकट लेकर पहुंचे लोगों के साथ ही बिना टिकट वाले लोग भी भीतर घुसने का प्रयास कर रहे थे। आयोजकों के वालंटियर्स ने उन्हें रोका तो मामला बहुत अधिक  बिगड़ गया।

गुस्साई भीड़ ने पास स्थित भट्टे से ईंटें उठा कर फेंकनी शुरू कर दी। वहां खड़ी तीन मोटरसाइकिलों को जला दिया। 6 गाड़ियाें को  पूर्णतया क्षतिग्रस्त कर दिया। डीएसपी की गाड़ी का कांच टूटने से उन्हें भी  हलकी सी चोट लगीं।

Sapna Chaudhary के कार्यक्रम स्थल यानी की आशीर्वाद गार्डन के ठीक सामने ईंट एक भट्टा है। उपद्रव करने वाले लोग भट्टे पर चढ़ गए और ईंटों को तोड़-तोड़ कर फैंकने लगे। पुलिस आती तो चारों तरफ खेतों में बाजरे की फसल होने से उपद्रवी फसल में छुप जाते और पुलिस के जाते ही लौट आते। इस प्रकार उपद्रव करने वाले लोगों ने जवानों को तीन घंटे तक छकाया। बाद में पुलिस ने भी जो हाथ में आया, उस पर लाठियां बरसाई ।

सड़क के निकट ही सुरेंद्र ढेवा के घर के बाहर खड़ी दो गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए । सुरेंद्र ने बताया कि पुलिस उपद्रव करने वाले लोगों के पीछे दौड़ी तो कुछ उपद्रवी उधर से खेतों में दौड़ गए । इस दौरान लोगों ने उसके घर के बाहर खड़ी दोनों गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए. पुलिस ने रिपोर्ट नहीं ली। प्रहलाद ढाका ने बताया कि वह अपनी पिकअप से मानसिंह मार्केट स्थित दुकान से घर जा रहा था। उसकी पिकअप को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

क्या आप देखना चाहते हैं । ऐसा कौन सा डांस था Sapna Chaudhary का जिसको देखने के लिए स्टेज के बाहर भी आग लग गई ।

August 10, 2017 0 comment
2 Facebook Twitter Google + Pinterest

डॉनल्ड जॉन ट्रम्‍प संयुक्त राज्य अमेरिका के 45 वें और वर्तमान राष्ट्रपति हैं। वे रिपब्लिकन पार्टी से उम्मीदवार थे तथा इन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को पराजित कर विजय श्री प्राप्त की थी। इनका निवास स्थान ट्रम्प टॉवर, मैनहैटन है। इनकी कुल सम्पत्ति 400 करोड़ डॉलर है। डॉनल्ड जॉन ट्रम्‍प एक अमेरिकी रिअल एस्‍टेट कारोबारी, अमेरिकी बिजनेसमैन, टीवी पर्सनालिटी, राजनेता, लेखक भी हैं

इन्होंने व्हार्टन स्कूल, यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेनसिलवेनिया से शिक्षा प्राप्त की है। शुरुआती १९६४ आगस्त में ट्रम्प दो साल के लिए ब्रोंक्स में फ़ोरुन्होंने धम विश्वविद्यालय में भाग लिया बाद में उन्होंने फिलाडेल्फिया में पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल, से शिक्षा प्राप्त की है l उन्होंने मई १९६८ में पेन से स्नातक की उपाधि के साथ अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री उपाधि हासिल की।

ट्रम्प का जन्म 14 जून, 1946 को क्वींस, न्यूयार्क सिटी में हुआ था। इनके माता-पिता का नाम मरियम ऐनी और फ्रेड ट्रम्‍प है। ट्रम्प प्रेस्बिटेरियन ईसाई धर्म को मानते हैं। ट्रम्प ने अर्थशास्त्र में डिग्री प्राप्त की है। ट्रम्प ने तीन शादियाँ की हैं। पहली शादी इवाना (पूर्व ओलिंपिक खिलाड़ी) से की थी। 1977 में हुई यह शादी 1991 तक चली। इसके बाद 1993 में मार्ला (अभिनेत्री) को जीवनसाथी बनाकर 1999 में तलाक ले लिया। इसके बाद 2005 में मेलानिया (मॉडल) से शादी की है। पहली पत्‍नी इवाना से डोनाल्ड ट्रम्‍प जूनियर इवांका ट्रम्प और एरिक ट्रम्‍प, दूसरी पत्‍नी मार्ला से टिफ़नी ट्रम्‍प, तीसरी पत्‍नी मेलानिया से विलियम ट्रम्‍प नामक बच्चे हैं। फोडर्म विश्वविद्यालय और पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय के वार्टन स्कूल ऑफ फाइनेंस एंड कॉमर्स से इन्होंने पढ़ाई की। कॉलेज के समय से ही पिता की कंपनी में इन्होंने काम की शुरुआत कर दी थी।

डोनाल्ड ट्रम्प को बहुत सारे लोगों पर अपमानजनक, अजीबो गरीब टिपण्णी करते हुए पाया गया है। कुछ लोग इन कोट्स से क्रोधित हो जाते हैं तो कुछ लोग हताश पर ज्यादातर लोगों को ट्रम्प के इन उद्धरणों पर विश्वास ही नहीं होता है।

डोनल्ड ट्रंप एक वहुत ही कामयाब अमरीकी कारोबारी हैं। उनके पास अरबों रुपए की संपत्ति है। न्यूयॉर्क के बेहद महंगे मैनहैटन इलाक़े में उनके पास अच्छी ख़ासी जायदाद है। अगर कहे कि एक रईस अमरीकी हैं तो ग़लत नहीं होगा।

ऐसा मन जाता है कि 90 के दशक में ट्रंप के रियल एस्टेट बिजनेस को काफी नुकसान पहुंचा। ताज महल इन अटलांटिक सिटी और 1992 में ट्रंप प्लाजा को भी दिवालिया घोषित किया गया। 1999 में डोनाल्ड ट्रंप ने राजनीति में भी हाथ आज़माया। उन्होंने रिफ़ॉर्म पार्टी बनाई. डोनल्ड का इरादा था कि साल 2000 में रिफ़ॉर्म पार्टी उन्हें राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाए. लेकिन, रिफ़ॉर्म पार्टी के अंदरूनी झगड़ों से तंग आकर उन्होंने फ़रवरी 2000 में ख़ुद को चुनाव से अलग कर लिया

पुनः  2001 से 2008 तक डेमोक्रेटिक पार्टी में और 2009 से रिपब्लिकन पार्टी में रह कर राजनीतिक गतिविधियों में रहे। वर्ष २०१६ में रिपब्लिकन पार्टी से ही राष्ट्रपति के पद के निर्वाचन में दिनांक 9 नवम्बर 2016 को विजय श्री प्राप्त की।

डोनाल्ड ट्रम्प 4 बार लगभग व्यापार में दिवालिया हुए थे। यांनी की डर के आगे जीत है। डोनाल्ड ट्रम्प कभी भी शराब नहीं पीते, सिगरेट नहीं पीते। जिसका मतलब है कि मॉर्डन होने के लिए शराब और सिगरेट का पीना ज़रूरी नहीं है।

July 31, 2017 0 comment
2 Facebook Twitter Google + Pinterest

अरिजीत सिंह वर्तमान में ये नाम भारतीय संगीत का जाना पहचाना नाम है अरिजीत सिंह ने भारतीय पाश्व गायकी में अपना अलग स्थान बनाया है | अरिजीत का जन्म जियागंज के मुर्शीदाबाद, पश्चिम बंगाल में 25 अप्रैल 1987 को हुआ था। उनके पिता पंजाबी और उनकी माँ बंगाली हैं। उनके संगीत की शुरूआती ट्रेनिंग उनके घर से ही हुई  उनकी दादी गायन करतीं और उनकी आंटी भारतीय क्लासिकल संगीत में प्रशिक्षित हैं। उन्होंने संगीत अपनी माँ से भी सीखा जो कि गायन के साथ-साथ तबला वादन भी करती हैं। अरिजीत सिंह भारतीय पाश्र्व गायक और म्यूजिक कम्पोज़र हैं। वे आज की जेनरेशन के गायकों में से एक हैं। फ़िल्म आशिकी 2 में गाए गए उनके गाने तुम ही हो के बाद से वे जाना माना नाम बन गए. अरिजीत के मुताबिक, गायक होने के साथ-साथ वे बैडमिंटन प्लेयर, राइटर, मूवी फ्रीक और डाॅक्युमेंट्री मेकर भी हैं। पापुलर होने के बावजूद ना ही वे ज़्यादा इंटरव्यू देते हैं ना ही उन्हें फोटो खिंचाना पसंद है। सितंबर 2013 में सिंह को गिरफ़्तार भी किया गया जब उन्होंने पत्रकार अपूर्वा चौधरी से बदसलूकी की क्योंकि उसने सिंह से उनके तलाक के बारे में पूछ लिया था। उन्हें कई बार कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है।

सन 2005 में उन्होंने राजेंद्र प्रसाद हजारी के कहने पर एक रियलिटी शो फेम गुरूकुल का आॅडीशन दिया क्योंकि उन्हें लगता था कि क्लासिकल संगीत की परंपरा खत्म हो रही है। उस मौके का इस्तेमाल करने के लिए पहले तो सिंह झिझक रहे थे लेकिन बाद में उन्होंने इसमें भाग लिया। इसमें कंपोजर शंकर महादेवन जूरी पैनल में थे और उनका क्लासिकल बैकग्राउंड था। हालांकि, अरिजीत फाइनल में यह शो हार गए लेकिन इसके बाद उन्होंने एक अन्य रियलिटी शो 10 के 10 ले गए दिल में हिस्सा लिया जो कि संगीत का ही शो था और इसमें फेम गुरूकुल और इंडियन आइडल के विजेताओं के बीच मुकाबला था। शो जीतने के बाद, सिंह ने अपना खुद का रिकाॅर्डिंग सेटअप तैयार किया और म्यूजिक प्रोग्रामिंग के साथ अपनी यात्रा शुरू की। उसके बाद, उन्होंने असिस्टेंट म्यूजिक प्रोग्रामर के तौर पर शंकर-एहसान-लाॅय, विशाल-शेखर और मिथुन के साथ काम किया। उस समय, महादेवन ने अरिजीत को मनाया कि वे उनके द्वारा बनाए गए गाने को अपनी आवाज दें लेकिन अरिजीत यह कहते हुए मना कर दिया कि उन्हें एक ‘पापुलर वाॅयस’ बनना है जिसके बाद महादेवन ने अन्य गायक के साथ उस गाने को डब किया |

2010 में अरिजीत ने प्रीतम चक्रवर्ती के साथ तीन फ़िल्मों में करना शुरू किया जिसमें गोलमाल 3, क्रुक और एक्शन रीप्ले जैसी फ़िल्में शामिल हैं। 2011 में सिंह ने अपना बाॅलीवुड म्यूजिक डेब्यू मिथुन के बनाए गाने ‘फिर मोहब्बत’ जो कि मर्डर 2 का गाना है, के साथ किया। यह गाना 2009 में ही रिकाॅर्ड हुआ था लेकिन रिलीज 2011 में हुआ। इसके बाद उन्होंने फ़िल्म एजेंट विनोद के गाने राबता को गाया। एजेंट विनोद के अलावा, सिंह ने प्रीतम के लिए तीन अन्य फ़िल्मों में भी गाने डब किए जिसमें प्लेयर्स, काॅकटेल और बरफी जैसी फ़िल्में शामिल हैं।

सन 2014 में अरिजीत को अपने दो पसंदीदा म्यूजिक डायरेक्टरों साजिद-वाजिद और ए आर रहमान के साथ काम करने का मौका मिला। उन्होंने फ़िल्म मैं तेरा हीरो में दो गाने गाए और हीरोपंती का ‘रात भर’ भी गाया। इसके अलावा उनके कई अन्य गाने जैसे समझांवां, हमदर्द, मनवा लागे, मुस्कुराने की वजह, सुनो ना संगमरमर, मस्त मगन जैसे गाने गाए जो कि सुपरहिट रहे और चार्टबस्टर्स में भी छाए रहे। यह सब गाने लोगों की जुबान पर चढ गए और अरिजीत नई बुलंदियों पर चढ़ गए | इसके बाद 2015 में उन्होंने राॅय फ़िल्म का सूरज डूबा है और खामोशियां का टाइटल ट्रेक और ‘बातें ये कभी ना’ गाया।

July 27, 2017 0 comment
1 Facebook Twitter Google + Pinterest

मुंबई में कनाडाई पॉप स्टार जस्टिन बीबर की शानदार प्रस्तुति के बाद अब भारतीय संगीत प्रेमी ग्रैमी पुरस्कार विजेता ब्रिटिश गायक एड शीरन की प्रस्तुति का लुत्फ उठा सकते हैं, भारत में एड शीरन 19  नवंबर २०१७  को प्रस्तुति देने वाले हैं।

सितंबर के आखिर तक एड शीरन  अमेरिका में अपने वर्ल्ड टूर में बिजी रहेंगे। इसके बाद वो एशिया के टूर पर निकलेंगे। यह खबर एड शीरन के भारतीय फैंस के लिए खुशी की बात है। आईआईटी रुड़की से लेकर बैंगलुरु की कंपनियों तक इस आर्टिस्ट ने बहुत लोगों को प्रेरित किया है। उनके गाने पर डांस करते हुए कुछ सेलिब्रिटी को भी देखा गया है। उन्हें लाइव परफॉर्म करते हुए देखना उनके फैंस के लिए किसी ट्रीट से कम नहीं होगा।

ग्रैमी अवॉर्ड   विजेता तथा महशूर  ब्रिटिश गायक एड शीरन के भारत में मुंबई में  शो के लिए आ रहे है l   जिसके टिकट की पहले चरण की बिक्री जल्द ही शुरू होने वाली है  । प्राप्त   जानकारी के मुताबिक, बुक माई शो ने इस कॉन्सर्ट के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू किया है, जो शीरन का अपने तीसरे स्टूडियो फेमस  अलबम ‘डिवाइड’ के पक्ष में दुनिया भर के दौरे के एशियाई पड़ाव का हिस्सा है।

उनके प्रशंसक टिकट खरीदने के लिए बुक माई शो की वेबसाइट पर 10 जुलाई तक पंजीकरण करा सकते हैं। टिकटों की बिक्री 12 जुलाई से शुरू होगी। इस कॉन्सर्ट का आयोजन एईजी प्रजेंट्स तथा पीआर वर्ल्डवाइड, बुक माई शो के सहयोग से भारत में करा रहा है, जो यहां 19 नवंबर को बीकेसे की जियोगार्डन में होगा।  जानकारी के अनुसार टिकटों की कीमत 4,750 रुपये से लेकर 12,000 रुपये तक है।

जस्टिन बीबर के बाद अब इंडियंस फैंस को एक और इंटरनेशनल सिंगर की परफॉर्मेंस का गवाह बनने का मौका मिलेगा। इस बार एड शीरन 19 नवंबर मुंबई में परफॉर्मेंस देंगे।शीरन की अधिकृत वेबसाइट में अक्तूबर और नवंबर में उनके एशिया दौरे में कई शहरों में शो की तारीखें डाली गई हैं जिनमें मुंबई भी एक पड़ाव है।

दो बार ग्रेमी अवॉर्ड जीत चुके शीरन का वर्तमान  एलबम ‘शेप ऑफ यू’ भारत समेत दुनियाभर में धूम मचा रहा है। वह तोक्यो, हांगकांग, मनीला, सिंगापुर, जकातार्, बैंकॉक और दुबई इत्यादि देशों  का भी दौरा करेंगे।   

एड शीरन  की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की एक नवंबर २०१३ को  न्यूयार्क के मेडिसन स्क्वेयर गार्डन में कार्यक्रम के टिकट केवल ३ मिनट में बिक गए थे तथा बिक्री बंद हो गयी थी ।  उस समय  एड शीरन  की आयु मात्र  २२ वर्ष थी  ।  

आपको बता दें कि एड शीरन के गाने ‘शेप ऑफ यू’ गाने पर अब तक कई सेलिब्रिटी अपना डांसिंग टैलेंट दिखा चुके हैं। अभी वर्तमान में  साउथ की एक्ट्रेस अहाना कृष्णा ने इस गाने पर परफॉर्म कर अपनी एक वीडियो फेसबुक पर डाली है। अहाना की ये वीडियो इंटरनेट पर छाई हुई है। अहाना इस वीडियो में अपनी बहन दिया और इशानी के साथ डांस करती नजर आ रही हैं। इस वीडियो को अब तक एक लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं।

उम्मीद है की ये कंसर्ट अपनी सफलता के नए आयाम बनाएगा । बेस्ट ऑफ़ लक शीरन । भारत में आपका स्वागत है ।

 

July 8, 2017 0 comment
4 Facebook Twitter Google + Pinterest
Loading...