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THERE ARE MORE THEN 2000 BILLIONAIRES IN WORLD TODAY AND THE NUMBER IS EXPECTED TO GROW AHEAD. MANY BILLIONAIRES DONATE A LARGE PERCENTAGE OF THEIR MONEY TO MANY OF CHARITY ORGANIZATIONS. SUCH BILLIONAIRES HAVE A STAGGERING AMOUNT OF WEALTH COMPARABLE TO THE GDP OF MANY SMALL COUNTRIES .THIS BILLIONAIRES INCLUDES JEFF BEZOS, BILL GATES, WARREN BUFFET, BERNARD ARNOULT, MARK ZUCKERBERG AND MANY MORE.

Jeff Bezos

net Worth $146.3 Billion :- Jeff Bezos, Founder of amazon, the biggest and most famous company of the world on web. in 2019, Jeff Bezos added to $45 Billion to his net worth last year. he is the first ever man reaching $110 billion level, that is just an Insane.

Quotes – “there are two kind of companies, those that work to try to charge more and the other who work to charge less.                  he will be the second.”

Bill Gates

Net Worth $97.3 Billion :- Bill Gates, founder of Microsoft (largest pc software company) is the 2nd most richest person of the world since several years and more to come. in 2019, bill gates added to $10 billion to his net worth of last year.

Quotes – “success works as a lousy teacher, it seduces smart people into thinking they can’t loose.”

Bernard Arnoult

Net Worth $84.7 Billion :- Bernard Arnoult, CEO of Louis Vuitton Moet Hennessey(LVMH), a luxury fashion brand formed from merging of the two businesses together. today Louis Vuitton is a very successful brand after making of some serious movements.

Quotes – “In the type of luxury business, you have    to build on heritage.”

Warren Buffett

Net Worth $83.7 Billion :-Warren Buffett, an American entrepreneur and investor. gains 4th position in the run of top most richest person in the world. he is the most successful investor worldwide. millions of traders look up to him because of his success

Quotes – “I will tell you how to get rich. just close the doors and be fearful when others are greedy while be greedy when others are fearful.”

Mark Zuckerberg

Net Worth $62 Billion :- Mark Zuckerberg, the founder of Facebook is the 8th most richest person in the world. today, Facebook has gained the position of one of the most valuable social media company.it all started in the dorm room at Harvard University in Mark’s room.

Quotes – “When you give anyone a voice  and people with power, the system generally ends up in a really good place. so, what we    view our role  is giving people that power.”

May 14, 2019 0 comment
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Hydroponics

यंहा हम आप को बताने जा रहें है कि बगैर मिटटी के खेती करके लोगो ने कैसे लाखो रूपये कमाएँ हैं। ये कौन-सी तकनीक है और इसे क्या कहते है। आइये जानते क्या है इसकी तकनीक। बगैर मिटटी के बहुत ही कम पानी में की जाने वाली खेती को Hydroponics कहते हैं। दूसरे शब्दों में जिस खेती में मिट्टी की ज़रूरत नहीं होती और जिसे बहुत ही कम पानी में उगाया जा सकता है, उसे Hydroponics खेती कहते हैं।

इस आधुनिक तकनीक में फसल के लिए पानी का स्तर उतना ही रखा जाता है जितना किसी फसल को ज़रूरी होता है। इसमें पानी की संतुलित मात्रा और सूर्य की रोशनी से पौधे को पर्याप्त पौषक तत्व मिल जाते हैं। इस अत्याधुनिक Hydroponics खेती में मिट्टी की जगह पानी ले लेता है, लेकिन ध्यान रहे पानी ऐसा होना चाहिए जिसमें मिट्टी वाले पोषक तत्व हो। जैसे कि खारा पानी नहीं होना चाहिए ।

पोषक तत्वों को रखने के लिए एक पोषण टैंक की आवश्यकता होती है। पोषक तत्वों को पानी के माध्यम से पौधों तक भेजने के लिए एक पंप की भी ज़रूरत होती है। पौधों की आवश्यकतानुसार ज़रूरी पोषक तत्व जिसे पौधों की जड़ो तक पंहुचाया जा सके । एक चैनल की भी आवश्यकता है जिससे पोषक तत्व को क्यारी या नाली बनाकर पौधो तक पंहुचाया जा सकता है। शेष बचे पोषक तत्व दोबारा टैंक में वापस ले लेना चाहिए. पौधों की जड़ों को सपोर्ट भी चाहिए होता है हाइड्रोपेनिक्स  तकनीक में साधारणतः बजरी, प्लास्टिक या बालू का इस्तेमाल पौधों की जड़ों को सपोर्ट देने के लिए होता है।

देशी तरीके से खेती करने पर खेत की मिटटी में जैविक पदार्थ डालकर पोषक तत्व बढ़ाए जाते हैं, लेकिन हाइड्रोपेनिक्स के जरिए खेती करने के लिए पानी के अंदर पोषक तत्वों को संतुलित मात्रा में मिलाया जाना चाहिए.

खेत की मिट्टी में जब खेती की जाती है तब पौधे को ऑक्सीजन मिट्टी से ही मिलती है। लेकिन Hydroponics तकनीक में पानी से पौधे ऑक्सीजन लेकर बड़े होते हैं। ये ठीक उसी तरह से हैं जैसे किसी घर में बनी फिश्पोट में मछलियाँ, टैंक के अंदर ही पानी से ऑक्सीजन लेती हैं।

परम्परागत खेती करने पर पौधों को अपनी जड़ों के प्रसार के लिए मिट्टी से ही पानी लेकर बड़ा होना होता है लेकिन इस अत्याधुनिक Hydroponics तकनीक में इनको पानी की सीधी सप्लाई की व्यवस्था की जाती है। जल का पीएच लेवल इस तकनीक में नियंत्रित किया जाता है। इसलिए पौधे का विकास बहुत तेजी से और संतुलित तरीके से होता दिखाई देता है। परिणाम स्वरुप, फसल से अधिक ऊपज मिलती है। इस अत्यधुनिक हाइड्रोपेनिक्स तकनीक के कारण खेती के सिस्टम को नवीन तथा ऑटोमैटिक तरीके से चलाया जा सकता है।

July 25, 2018 0 comment
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Budget 2018

मोदी सरकार के आम बजट 2018 (Budget 2018) के अगले दिन शेयर बाज़ार में भारी गिरावट का दौर देखने को मिला। जानकारों का मानना है कि बजट में फिस्कल घाटे के ज़्यादा होने और लंबी अवधि के कैपिटल गेन पर टैक्स लगाने से सरकार के फैसले से यह गिरावट देखी जा रही है। उस दिन सुबह बीएसई में करीब 300 अंकों की गिरावट दर्ज की गई जबकि निफ्टी 10950 के कारोबार करने लगा। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी घरेलू शेयरों को नुकसान दिखाई दे रहा है। वे भी बजट के दूसरे दिन कमजोर खुले। गुरुवार की तुलना में रुपया भी 64.02 से फिसलकर 64.18 पर आ गया।

आम बजट 2018 (Budget 2018) के बाद बाजार में भारी बिकवाली दबाव था, लेकिन कारोबार के अंतिम घंटे में घरेलू संस्थागत निवेशकों की लिवाली से इसका असर कम हो गया। बता दें कि बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े स्टॉक्स में गिरावट देखी जा रही है येस बैंक, एचडीएफसी, एसबीआई और इंडसइंड बैंक के शेयरों में करीब 2 फीसदी की गिरावट देखी गई है।

इसके अतिरिक्त 2017-18 के लिए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को सकल घरेलू उत्पाद के 3.2 प्रतिशत से 3.5 प्रतिशत करने के अनुमान से भी बाज़ार धारणा पर ख़ासा असर हुआ। वित्त वर्ष 2018-19 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 3.3 प्रतिशत तय किया गया है, जबकि राजकोषीय दायित्व एवं बजट प्रबंधन कानून में इसके लिए तीन प्रतिशत का लक्ष्य रखा गया है।

इस आम बजट 2018 (Budget 2018) में वित्तमंत्री ने दीर्घकालिक कैपिटल गेन पर टैक्स का जो नया नियम बताया है उससे भी भारतीय बाज़ार काफी प्रभावित हुआ है। वर्तमान में कैपिटल गेन (एलसीजीटी) पर कोई टैक्स नहीं है अगर शेयरधारक एक साल तक शेयर बनाए रखता है। उल्लेखनीय है, कि 2014 की शुरुआत से शेयर बाजारों में 94 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश हुआ है। नए नियम के हिसाब से अब विदेशी संस्थागत निवेशकों को आय पर टैक्स देना होगा।

कई जानकारों की राय में जहां शेयर बाजार में निवेश से नुकसान के आसार हैं वहीं बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में जो निवेश की घोषणा की गई है उससे बाजार को और अर्थव्यवस्था को काफी फायदा होने  की भी उम्मीद है ।  कुछ जानकारों का यह भी मानना है कि बेहतर टैक्स कलेक्शन, ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश, जीडीपी, नौकरी में बेहतर अवसर के कारण शेयर बाज़ार के साथ-साथ पूरी अर्थव्यवस्था में कुछ दिनों में बेहतर परिणाम मिल सकतें है।

आरबीआई की विभिन्न ब्याज दरों को रिव्यू करने का समय भी आ गया है। इसका भी बाज़ार पर काफी असर होगा। अगले हफ्ते आरबीआई यह काम कर सकता है और घोषणा कर सकता है। अब देखना यह है आम बजट 2018 (Budget 2018) के बाद आई बाजार की यह उथल – पुथल  कब थमेगी तथा  भारतीय बाजार किस  तरफ जाता  है ।

February 4, 2018 0 comment
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JioCoin

आपने क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन (BitCoin) और लिटकॉइन (LiteCoin) के बारे में तो खूब सुना होगा। दरअसल ये दोनों ही आभासी मुद्रा हैं, जिन्होंने पिछले दिनों निवेश्कों को जबरदस्त रिटर्न दिया है। हालांकि BitCoin जैसी क्रिप्टोकरेंसी को लेकर आरबीआई की तरफ से चेतावनी भी जारी की जा चुकी है। अब खबर है कि टेलीकॉम इंडस्ट्री में धमाल मचाने के बाद रिलायंस जियो (Reliance Jio) अपनी क्रिप्टोकरेंसी लाने का प्लान कर रहा है। इस क्रिप्टोकरेंसी का नाम जियो कॉइन (JioCoin) रखा जाएगा। खबर यह भी है कि इस अहम प्रोजेक्ट का नेतृत्व मुकेश अंबानी नहीं बल्कि उनके बेटे आकाश अंबानी करेंगे।

यदि सभी कुछ सही रहा तो टेलीकॉम सेक्टर में बड़ा फेरबदल करने के बाद अब मुकेश अंबानी जल्द ही एक नया काम करने जा रहे हैं। उनके इस प्रोजेक्ट में 50 यंग टेलेंटेड प्रोफेशनल्स की टीम काम करेगी। और इसे शायद मुकेश अंबानी के बड़े बेटे आकाश अंबानी लीड करेंगे।

आ रही खबरों के मुताबिक जियो जल्द ही अपनी खुद की क्रिप्टो करेंसी बनाने की प्लानिंग में है। इसके लिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर काम भी किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट को पूरी यंग मेम्बर्स की टीम आगे बढ़ाएगी। इसमें टीम के सदस्यों की औसत आयु 25 साल होगी।

पुराने ज़माने में जिस तरह हिसाब-किताब बहीखाता में किया जाता था, ठीक उसी तरह ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के जरिए हिसाब रखा जाता है। यह प्रकार से डिजिटल लेजर (बही) है। इसमें डाटा फिजिकल सर्वर में स्टोर नहीं होता बल्कि क्लाउड में सेव होता है। क्लाउड में डाटा सेव होने से यहाँ अनलिमिटेड डाटा स्टोर किया जा सकता है। इसके साथ ही इस डाटा को रियल टाइम में एक्सेस किया जा सकता है। इसके जरिए फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन भी होते हैं। ब्लॉकचेन में कस्टमर्स सीधे फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन कर सकते हैं। उन्हें किसी भी थर्ड ओर्गनाइजेशन की ज़रूरत नहीं है।

जिस प्रकार दूसरे ट्रांजेक्शन में बैंक बीच में होता है लेकिन इसमें बैंक की कोई ज़रूरत नहीं। हर ट्रांजेक्शन लेजर में रिकॉर्ड होता है। नेटवर्क पार्टिसिपेंट्स इसका वेरिफिकेशन करते हैं। इस टेक्नोलॉजी की सबसे ज़्यादा पॉपुलर होने वाली करेंसी क्रिप्टो करेंसी है। वहीं रिलायंस जियो अपनी खुद की करेंसी बनाने की प्लानिंग में है, इसका नाम जियो कॉइन (JioCoin) होगा।

2013 से 2017 तक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सरकार का रुख बहुत साफ रहा है कि बिटकॉइन जैसी क्रिप्टो करेंसी भारत में वैध मुद्रा नहीं हैं। कनिमोझी ने सवाल पूछा था कि क्या सरकार बिटकॉइन और एथिरियम जैसी क्रिप्टो करेंसियों को विनियमित करने के सम्बंध में विचार कर रही है। अरुण जेटली ने कहा था कि क्रिप्टो करेंसी का एक पहलू यह है कि उनमें सरकार पर निर्भरता का अभाव है।

फिलहाल करीब 785 आभासी मुद्राएं चल रही हैं। आरबीआई ने भी पिछले दिनों चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता नहीं दी गई है और इसमें निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। साल 2017 के अंतिम दिनों में बिटकॉइन की कीमत ने करीब 13 लाख रुपए का आंकड़ा छू लिया था।

January 13, 2018 0 comment
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अभी आप बैंक में जो पैसा जमा करते हैं। बैंक के डूबने की स्थिति में आपके डिपाजिट का 1 लाख रुपए तक का इंश्योरेंस होता है। मतलब उस बैंक में अगर आपके 2 लाख रुपए जमा है तो आपके 1 लाख रुपए बैंक डूबने की स्थिति में सुरक्षित रहेंगे। अगर आपके बैंक में 1 लाख रुपए से कम डिपॉजिट है तो आपको पूरा पैसा मिल जाएगा। हाल ही में सरकार ने फाइनेंशियल रिज्योल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल 2017 (FRDI) का प्रस्ताव रखा है। नए बिल के प्रस्ताव के मुताबिक बैंक डूबने की स्थिति में आपके 1 लाख वाले डिपॉजिट इंश्योरेंस के पैसे में से बैंक के घाटे की पूर्ती की जा सकेगी। ध्यान रहे अभी ये प्रस्ताव है।

भविष्य  में ऐसा हो सकता है कि बैंक में आपका जो पैसा जमा है, उस पर ही आपका कंट्रोल न हो। यदि किसी कारणवश कोई बैंक दिवालिया होती है तो वह बगैर आपसे पूछे  आपके पैसे का इस्तेमाल कर सकता है। जी हां, कुछ ऐसे ही प्रावधान फाइनेंशियल रिजॉल्यूशन एंड डिपोजिट इंश्योरेंस (FRDI) बिल 2017 में किए गए हैं। यह डिपोजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) एक्ट की जगह लेगा। कहा जा रहा है कि इससे बैंक में जमाकर्ताओं का पैसा वापस मिलने की गारंटी नहीं रहेगी।

अगर कोई बैंक या वित्तीय कंपनी डूबने की स्थिति में आती है तो रिज्योल्यूशन कॉर्पोरेशन उस फर्म को टेकओवर कर लेगा। उसका रिज्योल्यूशन प्लान तैयार करेगी जो 12 महीने और बढ़ाया जा सकेगा। ‘बेल इन’ वाला प्रस्ताव बैंक को बचाने वाले कई विकल्प में एक है। दूसरे विकल्प में विलय और एसेट और लायबिलिटी का ट्रांसफर भी शामिल है। इसके अलावा नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के जरिए लिक्विडेशन भी शामिल है।

ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार नए बिल से जमाकर्ताओं के मन में बैंकों में जमा रकम डूबने का डर-सा समा गया है। कई बैंक मैनेजरों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि रोजाना दर्जनों लोग इस डर से पैसे निकाल रहे हैं।

जिस रकम का बीमा हो गया है, उसे छोड़ बाकी रकम बेल-इन प्रावधान के दायरे में आएगी। हालांकि इस रकम का इस्तेमाल करने के लिए बेल-इन क्लॉज को शामिल किया जा सकेगा। हालांकि, आज भी अगर आपका बैंक दिवालिया हो जाए तो सिर्फ़ एक लाख रुपये की रकम ही आपको बैंक से मिलती है। भले ही आपके खाते में इससे ज़्यादा पैसा जमा हो।

अभी घबराने की ज़रूरत नहीं है। इसकी वजह यह है कि पिछले 70 साल में देश में शायद ही कोई बैंक दिवालिया हुआ है। हालांकि, अलग-अलग बैंकों में अपना पैसा रखकर आप अपना जोखिम घटा सकते हैं।

एफआरडीआई बिल २०१७       FRDI 2017  

December 30, 2017 0 comment
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Economy of India

भारतीय अर्थव्यवस्था (Economy of India) वर्ष 2018 में 7 प्रतिशत की वृद्धि तक पहुंच सकती है । गतिरोध और जीएसटी रोल आउट के प्रभाव से ‘अवरुद्ध’ होने के बाद, भारतीय अर्थव्यवस्था में 7 प्रतिशत की वृद्धि तक पहुंच सकती है, जिसमें लोकसभा चुनावों से पहले साल पहले तनावग्रस्त ग्रामीण परिदृश्य की ओर झुकने वाली सरकार की नीतियों को भी  शामिल किया गया था।

यदि आंकड़ों की बाजीगरी को मानें तो वर्ल्ड इकोनॉमी में भारत बहुत जल्द ही एक बड़ी छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत डॉलर टर्म्स में ब्रिटेन और फ्रांस को पीछे छोड़कर अगले साल दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी इकोनॉमी हो जाएगा। भारत का दुनिया की पांच बड़ी इकोनॉमी में शामिल होना दुनिया में एशिया के बढ़ते दबदबे को भी दिखाता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 15 साल में ग्लोबल इकोनॉमी में एशियाई देश ही ज़्यादा दमदार होंगे।

अभी हाल ही में ‘सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स एंड बिजनेस रिसर्च’ यानी Cebr ने आने वाले वर्ष 2018 के लिए यह रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि नए साल में ग्लोबल इकोनॉमी की रफ्तार तेज होगी और इसकी वजह सस्ती ऊर्जा और टेक्नोलॉजी होंगे। रिपोर्ट में एशियाई देशों का जिक्र खास तौर पर किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 15 साल के दौरान ग्लोबल इकोनॉमी में एशियाई देशों का प्रभाव होगा और टॉप 5 इकोनॉमी में भारत की एंट्री को इसी लिहाज से देखा जाना चाहिए ।

Cebr के डिप्टी चेयरमैन डगलस मैक्विलियम्स के अनुसार कुछ अनियमित दिक्कतों के बावजूद भी भारत इस वक्त फ्रांस और ब्रिटेन के साथ है। इसमें कोई दोराय नहीं हो सकती की 2018 में डॉलर के लिहाज से भारत इन दोनों देशों को पीछे छोड़कर दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन जाएगा।

मैक्विलियम्स ने यह भी कहा कि नोटबंदी और जीएसटी की वजह से इंडियन इकोनॉमिक(Economy of India) ग्रोथ कुछ कम ज़रूर हुई थी। यदि दुनिया में नंबर एक की बात करें तो चीन 2032 तक अमेरिका को पीछे छोड़कर दुनिया की नंबर वन इकोनॉमी बन सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूएस प्रेसिडेंट का प्रभाव ट्रेड सेक्टर में कम नजर आया है। इसके बावजूद अमेरिका ग्लोबल इकोनॉमी में टॉप पर बना रहेगा। ब्रिटेन फ्रांस को पीछे छोड़ देगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से बाहर आने (ब्रेक्जिट) का असर उसकी इकोनॉमी पर नजर आया है। हालांकि, ब्रेक्जिट को लेकर जिस तरह की आशंकाएं थीं, वो सही साबित नहीं हुईं। सन 2032 तक रूस 11 रैंक से फिसलकर 17th पर आ जाएगा।

एक न्यूज एजेंसी ने इकोनॉमिस्ट्स का एक पोल कराया। इसमें कहा गया है कि 2018 में ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ 3.6 फीसदी की रफ्तार से आगे बढ़ेगी। इस साल यानी 2017 में यह 3.5 है।

December 27, 2017 0 comment
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World Bank

नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार को लेकर चिंताजनक रुझानों के बीच World Bank की रिपोर्ट अच्छी एक  बहुत ही अच्छी खबर लेकर आई है । World Bank के Ease Of Doing Business इंडेक्स में भारत 30 पायदान की लंबी छलांग के साथ 100वें स्थान पर पहुंच गया है ।यह पहली बार है, जब भारत ने इतनी लंबी छलागं लगाई है | अगर विशेषज्ञों की माने तो कारोबार करने के मामले में भारत की रैंकिंग में सुधार से कई क्षेत्र को लाभ होगा ।

अमेरिका-इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूएसआईबीसी) की नई अध्यक्ष निशा देसाई बिस्वाल ने World Bank की कारोबार सुगमता रैंकिंग में भारत की स्थिति बेहतर होने को अहम करार दिया है  । उन्होंने कहा कि इससे भारत को और अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने में भी  मदद मिलेगी  ।

World Bank की रिपोर्ट के मुताबिक, Ease Of Doing Business में भारत पूरी दुनिया में रैंकिंग में सबसे ज्यादा सुधार करने वाला देश है।

भारत अकेला ऐसा ब्रिक्स देश है, जो टैक्स भरने के मामले में टॉप परफॉर्मर है। टैक्स पेइंग इंडेक्स में  लगभग 53 रैंकिंग का सुधार किया है। अब 119th पोजिशन पर है। लोन हासिल करने की रैकिंग में  भी भारत 15 पायदान ऊपर आया है। भारत की पोजिशन इस इंडेक्स में 44th से 29th हो गई है।

भारत की और से यह एक महत्वपूर्ण कदम है और भारत के सही दिशा में बढ़ने के लिए काफी अहम पैमाना  है । यह ऐसा माध्यम बनने जा रहा है, जो अधिक से अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करेंगे. । विश्व बैंक ने अपनी वार्षिक कारोबार सुगमता रिपोर्ट में 190 देशों के बीच भारत को 100वें पायदान पर जगह दी है. पिछले साल भारत इस इंडेक्स में 130वें स्थान पर था ।

विशेषज्ञों ने कहा है  की  FDI पानी की तरह है , वह उस रास्ते पर बढ़ता है, । जहां कम से कम प्रतिरोध हो  लिहाजा जितना आप प्रतिरोधों को कम करेंगे, उतना ही एफडीआई तेज होगा ।

सरकार वर्ल्ड 200 से ज्यादा रिफॉर्म्स पर काम कर रही है, जिनकी बदौलत Ease Of Doing Business रैंकिंग में इंडिया  जल्द ही टॉप 50 पोजिशन में आ सके।भारत ने इस साल 122 रिफॉर्म्स किए हैं और वर्ल्ड बैंक के साथ इन्हें मान्यता देने के लिए काम कर रहे हैं। ऐसी उम्मीद करतें हैं  हम इसी साल ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए 90 और सुधार करेंगे।

November 2, 2017 0 comment
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airtel docomo

जल्द ही दूरसंचार कंपनी Tata Teleservices का विलय Bharti Airtel में होगा। इस सौदे को दुनिया के सबसे बड़े दूरसंचार बाजारों में से एक भारत में एकीकरण का एक और मजबूत संकेत माना जा रहा है। प्रस्तावित सौदे के तहत टाटा टेलीसर्विसेज (टीटीएसएल) व टाटा टेलीसर्विसेज महाराष्ट्र (टीटीएमएल) के चार करोड़ से अधिक ग्राहक Bharti Airtel में चले जाएंगे। सौदे के बारे में नियमानुसार नियामकीय मंजूरी ली जानी बाकी है।

उल्लेखनीय है कि टाटा समूह की कंपनी Tata Teleservices मोबाइल टेलीफोन कारोबार से निकलते हुए अपनी वित्तीय दिक्कतों पर पार पाने की कोशिश कर रही है। दोनों कंपनियों ने एक साझा बयान में कहा है कि यह सौदा कोई ऋण नहीं-कोई नकदी नहीं आधार पर किया है। यानी Bharti Airtel इसमें Tata Teleservices के 40,000 करोड़ रुपये के कर्ज में कोई हिस्सेदारी नहीं करेगी और न ही नकदी का भुगतान करेगी। यहाँ तक कि टीटीएसएल द्वारा खरीदे गए स्पेक्ट्रम के लिए 9,000-10,000 करोड़ रुपये के विलंबित भुगतान में से 70-80 प्रतिशत हिस्से का भुगतान भी टाटा करेगा।

जंहा तक Bharti Airtel के चेयरमैन सुनील मित्तल का सवाल है उन्होंने ने इस सौदे को भारतीय मोबाइल उद्योग के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम करार दिया है। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त स्पेक्ट्रम अधिग्रहण से आकर्षक कारोबारी प्रस्थापना बनेगी। वहीं टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा है कि यह समझौता टाटा समूह व इसके भागीदारों के लिए श्रेष्ठ व सबसे बेहतर समाधान है। उन्होंने कहा है कि अनेक विकल्पों पर विचार के बाद ही एयरटेल के साथ यह समझौता किया गया है।

गौरतलब है कि JIO के बाज़ार में आने के बाद से Bharti Airtel लगातार उससे टक्कर लेने के लिए अलग-अलग कंपनियों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास भी कर रहा है। शुरुआती कई महीनों तक मुफ्त सेवा मुहैया कराने के बाद अब भी कंपनी काफी कम टैरिफ पर सेवाएं मुहैया करा रही है जिसकी वजह से पुरानी कंपनियों को अपनी दरों में कमी करनी पड़ी। अब इंटरकनेक्ट चार्ज में कमी करने के टेलिकॉम रेग्युलेटर ट्राई के फैसले से कंपनियो को अपनी दरें और कम करनी होंगी। दरअसल इंटरकनेक्ट चार्ज वह चार्ज है जो एक टेलिकॉम कंपनी उस दूसरी टेलिकॉम कंपनी को देती है जिसके नेटवर्क पर उसके ग्राहक कॉल करते हैं।

October 16, 2017 0 comment
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Cracker vendors

Diwali पर्व के ऐन मौके पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पटाखा विक्रेताओं (Cracker vendors) का दिवाला-सा निकल गया प्रतीत होता है। विक्रता इस असमंजस में हैं कि आखिर अब वह क्‍या करें। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के पूर्व ही विक्रेताओं ने अकूत पटाखाें की खरीदारी कर ली थी। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद उसके विक्री पर लगे प्रतिबंध से उनके समक्ष रोजी रोटी का सकंट उत्‍पन्‍न हो गया है। अब उनको यह भी चिंता सताने लगी है कि इस बड़े नुकसान की भरपाई कैसे होगी? उधर, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ गाजियाबाद में पटाखा व्‍यापारी सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया।

Diwali के दौरान 31 अक्टूबर तक पटाखों की बिक्री पर रोक लगाने के Supreme court के फैसले पर Cracker vendors ने नाराजगी जताई है। दुकानदारों का कहना है कि हमने तो बिक्री के लिए पटाखे होल सेल में खरीद लिए हैं, अब हमारे नुकसान की भरपाई कैसे होगी?

पटाखे की बिक्री पर बैन की खबर से दिल्ली एनसीआर के पटाखा विक्रेताओं में हड़कंप मचा है। Cracker vendors में बहुत ही ज़्यादा हताशा है, उनका कहना है कि त्यौहार के अवसर पर यह बैन उनके रोजगार पर ताला लगाने जैसा काम करेगा। दिल्ली के चांदनी चौक में इस खबर को सुनते ही विक्रेता लिखित आदेश आने तक सस्ते में पटाखे निकालते नजर आए | दिवाली के मौके पर पटाखों के कारण होने वाले प्रदूषण को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 1 नवंबर तक के लिए दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कोर्ट से गुहार लगाई गई थी कि कोर्ट 12 सितंबर के अपने उस आदेश को वापस ले जिसमें कोर्ट ने शर्तों के साथ दिल्ली और एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर लगी रोक हटाई थी।

Supreme court ने अपने इस महत्त्वपूर्ण फैसले में कहा कि दिवाली के बाद इस बात की भी जांच की जाएगी कि पटाखों पर बैन के बाद हवा की स्थिति में कुछ सुधार हुआ है या नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि 1 नवंबर के बाद पटाखों की बिक्री फिर से शुरू की जा सकती है। सर्वोच्च न्यायालय ने पटाखा विक्रेताओं को दिए नए और पुराने दोनों ही लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर लगी रोक कुछ शर्तों के साथ हटाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली में पटाखों की बिक्री के लिए पुलिस की निगरानी में लाइसेंस दिए जाएं। ज़्यादा से ज़्यादा 500 अस्थाई लाइसेंस ही दिए जा सकेंगे। अब कोर्ट ने पूरी तरह से पटाखों की बिक्री पर बैन लगा दिया है।

यंहा पर ध्यान देनेवाली बात ये है कि इसी महीने वायु प्रदूषण पर नजर रखने वाली केंद्र सरकार की एजेंसी ‘सफर’ (सिस्टम ऑफ एयर क्वॉलिटी ऐंड वेदर फोरकास्टिंग ऐंड रिसर्च) ने कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी में हवा की क्वॉलिटी खराब हो गई है और अगले कुछ दिनों में हालात और खराब होंगे। वायु गुणवत्ता सूचकांक के खराब होने का मतलब है कि लोग यदि ऐसी हवा में लंबे समय तक रहें तो उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।

Supreme court ने पटाखों की बिक्री पर तो प्रतिबंद लगा दिया लेकिन पटाखे के विक्रेता कोर्ट के इस फैसले से काफी नाराज दिखाई दिए | सभी पटाखा विक्रेतओं का कहना है कि हम Supreme court के फैसले का पालन करते हैं लेकिन हम बस इतना चाहते हैं कि बड़े व्यापारियों की तरह हमें भी किसी तरह की छूट दी जाये और जो पटाखे विक्रेता खरीद के रख चुके हैं बेचने दिया जाये। वरना खरीदे गये पटाखों के न बिकने पर त्यौहार के मौके पर उनका बहुत सारा पैसा बर्बाद हो जायेगा। उनका सरकार से सवाल है कि वह लोग अब उन पटाखों का क्या करें जो वह खरीद चुके हैं। उन्हें क्या वह नदियों में बहा दें।

October 11, 2017 0 comment
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Petrol and Diesel

26 जून 2010 को Petrol Control मुक्त किया था। तब तेल कंपनियों ने कहा था कि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों को ध्यान में रखकर देश में Petrol के दाम तय होंगे। अब जबकि  क्रूड में कमजोरी और रुपए में मजबूती के बाद भी  जिस तरह से Petrol and Diesel की कीमतें बढ़ रही हैं  । देश में Petrol and Diesel के भाव का गणित कुछ समझ में नहीं आ रहा है ।

नए नियम से Petrol की कीमत एक बार फिर 2014 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। 1 July 2017 से अब तक दिल्ली में पेट्रोल के दाम 7.29 रुपए और डीजल के दाम 5.39 रुपए प्रति लीटर बढ़ चुके हैं। बुधवार को दिल्ली में पेट्रोल का भाव 70.38 रुपए प्रति लीटर हो गया। जबकि, 1 जुलाई को पेट्रोल के रेट्स 63.09 रुपए प्रति लीटर थे। पर क्या आप जानते हैं कि पेट्रोल की कीमतों पर केंद्र और राज्य सरकारेें मिलकर 43 रुपए टैक्स वसूलती हैं।

मुंबई-दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें 3 साल के हाई पर पहुंच गई हैं। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 80 रुपए और दिल्ली में  70.38 रुपए प्रति लीटर तक हो गई । लेकिन सच यह है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में क्रूड का दाम 124 डॉलर प्रति बैरल था, तब भी तेल कंपनियां घाटा बता रही थीं, आज क्रूड का भाव 91.47 तब भी घाटा हो रहा है। सर्कार को कोई तो बताए की कृपा कंहा पर अटक गई है।

हमारे यंहा केंद्र और राज्य सरकार मिलकर मुंबई में पेट्रोल पर 153 फीसदी टैक्स वसूलती हैं। जंहा दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 68.07 रुपए है। वहीं भारत के करीबी देशों में पेट्रोल की कीमत देखें तो पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 43.68 रुपए है। श्रीलंका में 50.95 रुपए प्रति लीटर है। नेपाल में 64.24 रुपए प्रति लीटर है। बांग्लादेश में 70.82 रुपए प्रति लीटर है। नेपाल सीमा से लगे बिहार के कुछ गांवों के लोग पेट्रोल भरवाने के लिए नेपाल तक चले जाते है सिर्फ़ कीमत के अंतर के कारण।

ज़रा देखिये तेल का खेल

कच्चे तेल की कीमत और डॉलर-रुपया विनिमय दर को देखें तो ऑयल कंपनियां रिफाइनरियों से लगभग 26.22 रुपए प्रति लीटर में तेल खरीदती हैं।

इसके पश्चात् 3.49 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से हमारी केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी और वैट वसूलती है, अब पेट्रोल कीमतें बढ़कर 29.71 रुपए हो जाती है। चलिए थोड़ा और आगे बढ़िते है।

फिर पेट्रोल पर 21.48 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती है। इस टैक्स के साथ पेट्रोल की कीमत बढ़कर 51.19 रुपए हो जाती है।

इसके बाद नम्बर आता है डीलर का कमीशन 3.23 रुपए प्रति लीटर डीलर का कमीशन होता है। डीलर कमीशन के बाद पेट्रोल का दाम बढ़कर 54.42 रुपए प्रति लीटर हो जाता है।

दिल्ली में 27 फीसदी की दर से वैट लगाया जाता है जो कि 14.69 रुपए प्रति लीटर बनता है इस हिसाब से दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत बढ़कर 69.12 रुपए प्रति लीटर हो जाती है।

ध्यान रहे टेक्स का ये गणित हमने आईओसी की वेबसाइट से लिया गया है। तथा हमने पाठकों को समझाने के हिसाब ये नजदीकी तथा लगभग आंकड़े दर्शाएं है।

September 14, 2017 0 comment
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