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GST

लोग भले ही मान रहे हों कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी- GST) के दायरे में लाने से पेट्रोल-डीजल (Petrol & Diesel) की कीमतों में बड़ी कमी आ जाएगी, लेकिन बिहार के उप मुख्यमंत्री और जीएसटी (GST) नेटवर्क पैनल के प्रमुख सुशील मोदी की राय इससे अलग है। उनका कहना है कि इससे कीमतों पर कुछ खास असर नहीं पड़ेगा। देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए लगातार मांग उठ रही है कि इन्हें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाया जाए ।

मोदी ने कहा, ‘लोगों के बीच यह भ्रम है कि जीएसटी के दायरे में आने से पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बहुत कम हो जाएंगी। हालांकि कीमतों पर ऐसा कोई उल्लेखनीय प्रभाव नहीं पड़ेगा।’ उन्होंने टैक्स की ज़्यादा दरों पर अन्य देशों का हवाला भी दिया। उन्होंने कहा कि दुनियाभर के जिन देशों में जीएसटी की व्यवस्था लागू है, वहाँ भी राज्यों को इसकी सर्वोच्च स्लैब से ऊपर टैक्स लगाने का अधिकार मिला हुआ है।

आम लोगों को ऐसा लगता है कि अगर जीएसटी में पेट्रोल-डीजल (Petrol & Diesel) आ जाता तो सस्ता हो जाता। अब सरकार ने भी साफ कर दिया है कि जीएसटी में भी अगर पेट्रोल-डीजल आ गया फिर भी आपको सस्ता नहीं मिलेगा।

इस बार बजट में पेट्रोल-डीजल (Petrol & Diesel) के जीएसटी में आने की चर्चा थी। बजट में तो एलान नहीं हुआ लेकिन लोगों को ऐसा लगता है कि अगर जीएसटी में पेट्रोल-डीजल आ जाता तो सस्ता हो जाता। अब सरकार ने भी इशारा कर दिया है कि जीएसटी में भी अगर पेट्रोल-डीजल आ गया फिर भी आपको सस्ता नहीं मिलेगा।

मान लीजिए की आज डीलर को मुनाफा जोड़कर 38 रुपये 8 पैसे प्रति लीटर पेट्रोल पड़ता है। इस पर केंद्र सरकार 19.48 रुपये एक्साइज ड्यूटी लगाती है और दिल्ली में राज्य सरकार 15.54 रुपये वैट लगाती है। अगर ये दोनों टैक्स हटाकर सरकार जीएसटी की सर्वोच्च दर 28% भी लगा देती तो पेट्रोल पूरे देश में 48 रुपये 74 पैसे मिलने लगता। किन्तु इससे राज्य सरकार को मिलने वाला राजस्व प्रभावित होता है।

राज्यों की आपत्ति की वजह से पेट्रोल-डीजल जीएसटी में नहीं आया लेकिन कुछ समय पूर्व  वित्त सचिव हंसमुख अढिया ने साफ कर दिया कि राजस्व केंद्र और राज्य दोनों के लिए ज़रूरी है इसलिए 28 फीसदी जीएसटी लगाकर पेट्रोल-डीजल बेचना संभव नहीं है।

वर्तमान में पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतें सरकारी नियमन से पूरी तरह मुक्त हैं।

लेकिन जब क़ीमतें हर रोज़ बदलेंगी तो पेट्रोलियम कंपनियाँ नहीं चाहेंगी जीएसटी (GST) से पड़ने वाले भार को वह वहन करें। वह इस भार को ग्राहकों पर डालने की पूरी कोशिश करेंगी।

मौजूदा समय में पेट्रोल डीज़ल पर क़रीब 48 प्रतिशत तक टैक्स लगता है। जीएसटी (GST)के तहत टैक्स अधिकतम 28 प्रतिशत तक हो सकता है।

ये तो नहीं कहा जा सकता कि जीएसटी के दायरे में पेट्रोलियम पदार्थों को लाने से दामों में ज़्यादा फ़र्क पड़ता। लेकिन ये ज़रूर है कि इससे क़ीमतें नहीं बढ़तीं।

बिहार के वित्त मंत्री की भी जिम्मेदारी संभाल रहे सुशील मोदी ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने के बारे में जीएसटी परिषद विचार करेगी। उन्होंने कहा, ‘जीएसटी परिषद में इसको लेकर सहमति है कि जब तक जीएसटी व्यवस्था स्थिर नहीं हो जाती पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में नहीं लाया जाएगा।’ जीएसटी पिछले साल एक जुलाई से प्रभाव में आया है।

May 30, 2018 0 comment
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अब तक तो पढ़ाई लिखाई करके हर युवा डॉक्टरी, इंजीनियरिंग या एमबीए करने की सोचता था लेकिन बदलते वक्त के साथ-साथ अब करियर को लेकर युवाओं का रुझान भी बदलने लगा है। इस कृषि प्रधान देश में आज के युवाओं की रुचि कृषि क्षेत्र में करियर (agricultural sector) बनाने में ज़्यादा दिखाई दे रही है। आधुनिकता के इस दौर में कृषि के प्रति युवाओं का ये लगाव किसी चमत्कार से कम नहीं है और होना ही चाहिए क्योंकि भारत एक कृषिप्रधान देश है।

क्या है किसान बनने के लिए ज़रूरी योग्यता ?

यदि आप भी कृषि अनुसंधान के क्षेत्र से जुड़कर कृषि वैज्ञानिक (agricultural sector) या फिर एक बेहतर किसान बनना चाहते हैं तो फिर इसके लिए आपको 12वीं की परीक्षा अच्छे अंकों से पास कर बीएससी एग्रीकल्चर या फिर बीएससी एग्रीकल्चर ऑनर्स की डिग्री हांसिल करनी होगी। यह डिग्री एग्रीकल्चर, वेटनेरी साइंस, एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग, फॉरेस्टरी, हॉर्टीकल्चर, फूड साइंस और होम साइंस में से किसी भी एक विषय में ले सकते हैं। अपनी पढ़ाई पूरी करके आप सीधे खेती और इससे सम्बंधित गतिविधियों से जुड़कर कृषि क्षेत्र में देश के विकास में अपना अहम योगदान दे सकते हैं।

क्या हो सकती है कृषि क्षेत्र में करियर की संभावनाएँ ?

आज भी भारत की करीब 70 फीसदी जनसंख्या जीविका के लिए पूरी तरह से कृषि पर निर्भर है। ऐसे में कृषि क्षेत्र में पढ़े लिखे किसानों की सख्त ज़रूरत है। कृषि क्षेत्र में आप मार्केटिंग, एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग (agricultural sector) या मैनेजमेंट के क्षेत्र में जिसे चाहे अपना सुनहरा करियर बना सकते हैं। इसके अलावा आप नेशनेलाइज्ड बैंकों में बतौर कृषि विस्तार अधिकारी, ग्रामीण विकास अधिकारी, फील्ड ऑफिसर बनकर अपना शानदार करियर बना सकते हैं। इसके साथ ही राज्यों के विभिन्न कृषि विभागों में आपके लिए रोजगार की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं।

वर्तमान में कृषि महाविद्यालयों में एडमिशन पाने के लिए युवाओं के बीच मची होड़ से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन युवाओं के सिर पर कृषि क्षेत्र में करियर का जुनून किस कदर सवार है।

अगर आप भी कृषि क्षेत्र में करियर (agricultural sector) तलाश रहे हैं तो इसके लिए हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ बेहतरीन संस्थानों के बारे में, जहाँ से आप कृषि क्षेत्र के लिए ज़रूरी डिग्री या प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। आप हैदराबाद, पुणे, ग्वालियर, इंदौर और पालमपुर स्थित कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर से कृषि के क्षेत्र में प्रशिक्षण ले सकते हैं। कोलकाता और भुवनेश्वर के यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर (agricultural sector) से भी आप डिग्री हांसिल कर सकते हैं। उदयपुर के राजस्थान एग्रीकल्चर (agricultural sector) युनिवर्सिटी में कृषि के क्षेत्र में प्रशिक्षण के साथ डिग्री भी पा सकते हैं। इलाहाबाद स्थित इलाहाबाद एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट से प्रशिक्षण लेकर आप कृषि क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं। अलीगढ़ विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एग्रीकल्चर (agricultural sector) में दाखिला लेकर आप कृषि क्षेत्र की बारीकियों को समझ सकते हैं।

May 28, 2018 0 comment
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Indian Foreign Policy

भारत में लोकतांत्रिक सरकार है और यहाँ राष्ट्रपति का चुनाव होता है, इसलिए यह गणतंत्रात्मक व्यवस्था है। भारत हिंसात्मक विभाजन, फिर आजादी और अंततः गणतंत्र के रूप में वैश्विक पटल पर अपने सातवें दशक (वर्ष 2019) में प्रवेश करने की ओर अग्रसर है। निश्चित रूप से यह संविधान की प्रस्तावना में वर्णित प्रथम शब्द ‘वी द पीपुल’ (हम भारत के लोग) की शक्ति को मजबूती से दरसाता है, क्योंकि इस गणतंत्र को सही मायने में शक्ति भारत के आम लोगों से ही मिलती है, इसमे कोई संदेह नहीं कि दो वर्ष पूर्व मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से अब तक विदेशमंत्री सुषमा स्वराज और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सूझबूझ और कूटनीति से पूर्ण प्रयासों के मिश्रित फलस्वरूप भारतीय विदेश नीति (Indian Foreign Policy)को न केवल एक नई ऊंचाई और आयाम प्राप्त हुआ है, बल्कि बतौर वैश्विक इकाई भारत की स्थिति भी विश्व पटल और अधिक मजबूत तथा मुखर हुई है।

आज भारत अपने लोकतांत्रिक मूल्यों को अक्षुण्ण रखते हुए बदलती भू-सामरिक आर्थिकी और ऊर्जा सुरक्षा के त्रिकोण के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वांटम कंप्यूटर जैसे तमाम क्षेत्रों में वैश्विक पटल पर मजबूती से स्थापित हो रहा है। अब यह किसी की स्वीकार्यता का मोहताज नहीं रहा है। चंद्रमा से मंगल तक सफलतम यात्रा के साथ-साथ अंतरिक्ष में पीएसएलवी की सफलतम शतकीय भागीदारी हमें उच्चतर प्रतिमान पर स्थापित करती है |

विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विश्व भर के तमाम छोटे-बड़े देशों की यात्राओं से भारत की ये नवीन वैश्विक छवि गढ़ने में अत्यंत महत्त्वपूर्ण और अभूतपूर्व योगदान रहा है। हालांकि वैश्विक महाशक्ति अमेरिका से तो भारत के सम्बन्ध संप्रग-1 के कार्यकाल के समय से ही एक हद तक गतिशील हो गए थे, लेकिन बावजूद इसके संप्रग के कार्यकाल के अंतिम वर्षों तक उनमे अस्थिरता की स्थिति ही मौजूद रही साथ ही तत्कालीन सम्बंधों में भारत काफी हद तक अमेरिका के समक्ष याचक की भूमिका में ही रहा था। लेकिन मोदी सरकार के इन दो वर्षों में इस वैश्विक महाशक्ति से भारत के सम्बन्ध एकदम नए रूप में उभरकर सामने आते दिख रहे हैं और इसका बड़ा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है, जिन्होंने अपने कार्यकाल में ही अमेरिका की चार यात्राएँ की हैं।

दरअसल, ये यात्राएँ पूर्व प्रधानमंत्रियों की तरह सिर्फ़ व्यापारिक गतिविधियाँ बढ़ाने या भारत को सहायता दिलाने जैसी बातों पर आधारित नहीं रहीं, बल्कि प्रत्येक यात्रा का अपना एक अलग और ठोस महत्त्व रहा है। इस यात्रा के दौरान उन्होंने अमेरिकी संसद को सम्बोधित भी किया, जिसमे उनके द्वारा भारत समेत समूचे विश्व की तमाम चुनौतियों और संभावनाओं तथा इनके बीच भारत-अमेरिका सम्बंधों के महत्त्व को बेहद तार्किक ढंग से रेखांकित किया गया।

आज विश्व के तमाम मंचों पर भारत की खोज निश्चित रूप से होती है। चाहे वह अफगानिस्तान से सम्बंधित रणनीतिक मसला हो या आर्कटिक परिषद की सामरिक बैठक, दक्षिणी और पूर्वी चीन सागर में मुक्त एवं निर्बाध नौवहन हो या पूरे हिंद महासागर को शांति क्षेत्र (जोन ऑफ पीस) स्थापित करने की पहल। यह भारतीय सहयोग ‘कोई बंधन संलग्न नहीं’ जैसे अनूठे मॉडल के जरिये हमारे भागीदार देशों की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के आधार पर काम कर रहा है। इनके अलावा संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद में सुधारों की आवश्यकता हो या विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization) के व्यापार बैठकों में कृषि और बौद्धिक संपदा से जुड़े मसलों पर विकसित देशों की मनमानी और उनके कुत्सित मंसूबों पर पानी फेरना। कृषि सब्सिडी, खाद्य सामग्री की स्टॉक होल्डिंग और पीस क्लाउज जैसे मुद्दों पर विकासशील और अल्प विकसित देशों के व्यापार और वणिज्य से सम्बंधित मसलों और स्वयं सिद्ध हितों पर मुखर रूप से पक्ष रखने में भारत की भूमिका अहम रही है।

ये सभी बातें इस और इंगित करती है की वैश्विक पटल पर भारत की छवि निश्चित ही चमकदार और रौबदार हूई है , यह एक दमदार कूटनीति और विदेश नीति के कारण ही संभव हो पाया है ।

May 25, 2018 0 comment
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Purushottam Maas

शुभ समय के बारे में तो सभी जानते है लेकिन अशुभ समय के बारे में सभी को पता नहीं होता। लेकिन इस अशुभ समय का सभी के जीवन पर समान प्रभाव पड़ता है। ऐसा ही समय फिर प्रारंभ होने वाला है जब ग्रहों की चाल बदलने वाली है और वह समय है पुरुषोत्तम मास (Purushottam Maas) या अधिकमास (Adhik Maas)।

16 मई 2018 बुधवार से ज्येष्ठ महीने में अधिकमास जिसे आम भाषा में मलमास कहा जाता है प्रारंभ हो जाएगा। जिसके बाद सभी मांगलिक और शुभकार्य पूरे मलमास के लिए स्थगित कर दिए जाएंगे। मलमास के महीने को पुरुषोत्तम का महीना भी कहा जाता है इसलिए इसमें सभी को उत्तम से उत्तम धार्मिक कार्य करने चाहिए ।

हमारे भारतीय पंचांग की (खगोलीय गणना) के अनुसार प्रत्येक तीसरे वर्ष एक अधिक मास होता है। यह सौर और चंद्र मास को एक समान लाने की गणितीय प्रक्रिया है। शास्त्रों के अनुसार पुरुषोत्तम मास (Purushottam Maas) में किए गए जप, तप, दान से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है। सूर्य की बारह संक्रांति होती हैं और इसी आधार पर हमारे चंद्र पर आधारित 12 माह होते हैं। हर तीन वर्ष के अंतराल पर अधिक मास या मलमास आता है।

शास्त्रों के अनुसार जिस माह में सूर्य संक्रांति नहीं होती वह अधिक मास होता है। इसी प्रकार जिस माह में दो सूर्य संक्रांति होती है वह क्षय मास कहलाता है।

हिन्दू धर्म में इन दोनों ही मासों में मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते है, परंतु धर्म-कर्म के कार्य पुण्य फलदायी होते हैं। सौर वर्ष 365.2422 दिन का होता है जबकि चंद्र वर्ष 354.327 दिन का होता है। इस तरह दोनों के कैलेंडर वर्ष में 10.87 दिन का फ़र्क़ आ जाता है और तीन वर्ष में यह अंतर 1 माह का हो जाता है। इस असमानता को दूर करने के लिए अधिक मास एवं क्षय मास का नियम बनाया गया है।

इस माह में व्रत, दान, पूजा, हवन, ध्यान करने से पाप कर्म समाप्त हो जाते हैं और किए गए पुण्यों का फल कई गुणा प्राप्त होता है। देवी भागवत पुराण के अनुसार मल मास में किए गये सभी शुभ कर्मो का अनंत गुना फल प्राप्त होता है। इस माह में भागवत कथा श्रवण की भी विशेष महत्ता है। पुरुषोत्तम मास में तीर्थ स्थलों पर स्नान का भी महत्त्व है।

अधिक मास अपने स्वामी के ना होने पर विष्णुलोक पहुंचे और भगवान श्रीहरि से अनुरोध किया कि सभी माह अपने स्वामियों के आधिपत्य में हैं और उनसे प्राप्त अधिकारों के कारण वे स्वतंत्र एवं निर्भय रहते हैं। एक मैं ही भाग्यहीन हूँ जिसका कोई स्वामी नहीं है, अत: हे प्रभु मुझे इस पीड़ा से मुक्ति दिलाइए | अधिक मास की प्रार्थना को सुनकर श्री हरि ने कहा ‘हे मलमास मेरे अंदर जितने भी सद्गुण हैं वह मैं तुम्हें प्रदान कर रहा हूँ और मेरा विख्यात नाम’ पुरुषोत्तम’मैं तुम्हें दे रहा हूँ और तुम्हारा मैं ही स्वामी हूँ।’ तभी से मलमास का नाम पुरुषोत्तम मास (Purushottam Maas) हो गया और भगवान श्री हरि की कृपा से ही इस मास में भगवान का कीर्तन, भजन, दान-पुण्य करने वाले मृत्यु के पश्चात श्री हरि धाम को प्राप्त होते हैं।

पवित्र स्थान पर अक्षत से अष्ट दल बनाकर जल का कलश स्थापित करना चाहिए | भगवान श्री राधा-कृष्ण की प्रतिमा रखकर पोडरा विधि से पूजन करें और कथा श्रवण की जाए. संध्या समय दीपदान करना चाहिए | माह के अंत में धातु के पात्र में 30 की संख्या में मिष्ठान्न रखकर दान किया जाए.

पुरुषोत्तम मास (Purushottam Maas) में भक्त भाँति-भाँति का दान करके पुण्य फल प्राप्त करते हैं। मंदिरों में कथा-पुराण के आयोजन किए जाते हैं। दिवंगतों की शांति और कल्याण के लिए पूरे माह जल सेवा करने का संकल्प लिया जाता है। मिट्टी के कलश में जल भर कर दान किया जाता है। खरबूजा, आम, तरबूज सहित अन्य मौसमी फलों का दान करना चाहिए. माह में स्नान कर विधिपूर्वक पूजन-अर्चन कथा श्रवण करना चाहिए ।

May 17, 2018 0 comment
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Maruti Alto Model

सबसे चर्चित कार कंपनी मारुति सुजुकी जल्द ही अपने सस्ते सेगमेंट की कार को डीजल इंजन के साथ बाज़ार में उतारने की तैयारी कर रही है। मारुति सुजुकी अपनी कार आल्टो (Maruti Alto Model) को जल्द ही बाज़ार में उतारेगी। इसके लिए कंपनी ने न्यू अल्टो कार की टेस्टिंग भी शुरू कर दी है। पुराने अल्टो के मुकाबले न्यू जनरेशन वाली अल्टो में कई नए फीचर्स एड किए है।

मारुति ने इस हैचबैक की कार की कीमत का निर्धारण करते हुए बहुत सावधानी बरती है। कपंनी ने नई अल्टो कार (Maruti Alto Model) की कीमत उम्मीद से भी काफी कम रखी है। यह कार नए फीचर्स के साथ कम ईंधन खपत वाली भी होगी। आपको बता दें नई अल्टो कार नए प्लेटफॉर्म  पर तैयार होगी। साथ ही यह कार नार्मल वेरियंट के साथ-साथ टर्बो आर एस वेरियंट में भी ग्राहकों के लिए उपलब्ध होगी।

नई मारुती अल्टो (Maruti Alto Model) कार का नार्मल वेरिएंट 0.658 लीटर पेट्रोल इंजन वाला है जो 53bhp का है। साथ ही इसमें 5 स्पीड मैन्युअल ट्रांसमिशन दिया गया है। वहीं टर्बो आर एस वेरिएंट के साथ 0.658 लीटर का पेट्रोल इंजन मिलेगा जो 62bhp का होगा। इसके अलावा इसमें 5 स्पीड मैन्युअल के साथ टर्बो आर एस ट्रांसमिशन मिलेगा। यह कार बेहद फ्यूल एफिशिएंट वाली होगी।

कम बजट वाले अल्टो के बेस मॉडल की कीमत 2.6 लाख और टॉप मॉडल की कीमत 3.8 लाख के बीच एक्सपेट की जा रही है। माइलेज की अगर बात करें तो न्यू जनरेशन वाली अल्टो मारुति की अन्य कारों की तुलना में अच्छा माइलेज प्रदान करेगी। ऑटो एक्सपर्ट के मुताबिक यह कार 32 केएमपीएल का माइलेज देने में सक्षम होगी।

ऑटो एक्सपर्ट के मुताबिक नई मारुती अल्टो (Maruti Alto Model) कार भारतीय बाजार में अपनी साख बना सकती है । कयास लगाया जा रहा है कि कंपनी भारत में इस कार को 2018 की शुरूआत तक लॉन्च कर सकती है।

फीचर्स

-AC, पावर स्टीयरिंग, पावर विंडो

-सेंट्रल लॉकिंग,फेब्रिक सीट

-4 स्पीकर्स के साथ स्टीरियो सिस्टम

-ऑप्शनल एयरबैग्स और ऑप्शनल AMT

February 7, 2018 0 comment
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Chandra Grahan

चंद्रग्रहण (Chandra Grahan) उस खगोलीय स्थिति को कहते है जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में आ जाता है। ऐसा तभी हो सकता है जब सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा इस क्रम में लगभग एक सीधी रेखा में अवस्थित हों। इस ज्यामितीय प्रतिबंध के कारण चंद्रग्रहण (Chandra Grahan) केवल पूर्णिमा को घटित हो सकता है। चंद्रग्रहण का प्रकार एवं अवधि चंद्र आसंधियों के सापेक्ष चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करते हैं।

किसी सूर्यग्रहण के विपरीत, जो कि पृथ्वी के एक अपेक्षाकृत छोटे भाग से ही दिख पाता है, चंद्रग्रहण (Chandra Grahan) को पृथ्वी के रात्रि पक्ष के किसी भी भाग से देखा जा सकता है। जहाँ चंद्रमा की छाया की लघुता के कारण सूर्यग्रहण किसी भी स्थान से केवल कुछ मिनटों तक ही दिखता है, वहीं चंद्रग्रहण की अवधि कुछ घंटों की होती है। इसके अतिरिक्त चंद्रग्रहण (Chandra Grahan) को, सूर्यग्रहण के विपरीत, आँखों के लिए बिना किसी विशेष सुरक्षा के देखा जा सकता है, क्योंकि चंद्रग्रहण की उज्ज्वलता पूर्ण चंद्र से भी कम होती है।

इस साल यानी की 2018 का पहला चंद्रग्रहण (Chandra Grahan) 31 जनवरी को है। यह इसलिए खास है, क्योंकि इस बार ब्लू, ब्लड और सुपरमून (Super Moon) तीनों स्थितियां एकसाथ बन रही हैं। यह पूर्ण चंद्रग्रहण होगा, यानी इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी की छाया से कुछ देर के लिए पूरी तरह ढक जाएगा। यह पूरे देश में दिखाई देगा। इस दौरान चंद्रमा का रंग लाल, हल्का नीला या तांबे के रंग का दिखाई देगा। यह स्थिति लगभग 35 साल बाद बनी है।

भारतीय मानक समय के अनुसार इसका स्पर्श 05: 18 शाम को मध्य 07: 00 बजे मोक्ष 08: 42 बजे रात में होगा। इस चंद्रग्रहण (Chandra Grahan) में 176 वर्षों के बाद पुष्य नक्षत्र का विशेष संजोग बन रहा है। इस ग्रहण का स्पर्श तो पुष्य नक्षत्र में होगा जो श्लेषा नक्षत्र में समाप्त होगा। इस प्रकार पुष्य एवं श्लेषा दोनों नक्षत्रों के जातकों को और कर्क राशि वालों को प्रभावित करेगा। यह चंद्र ग्रहण कालसर्प योग की छाया में है साथ ही फरवरी माह में चतुर्ग्रही योग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार चार ग्रहों के मिलने की स्थिति को चतुर्ग्रही योग कहते हैं।

जब तीनों (सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा) एक सीध में होंगे तो यह पूर्ण चंद्रग्रहण होगा। हालांकि, इस दौरान सूर्य की कुछ किरणें पृथ्वी के एटमॉस्फेयर से होकर चंद्रमा पर पड़ती हैं। इस दौरान वह हल्का भूरे और लाल रंग में चमकता है। कुछ लोग इसे ब्लड मून भी कहते हैं। ”

यह चंद्रग्रहण (Chandra Grahan) शाम 5.20 बजे शुरू होगा। हालांकि, यह ठीक ढंग से सूर्यास्त के बाद 6: 25 बजे से नजर आएगा और 8.43 बजे तक रहेगा।

कल चंद्रग्रहण से किसे फायदा और किसे नुकसान

राशि के हिसाब से चंद्र ग्रहण का असर

मेष: नौकरी, व्यवसाय में सफलता, मान सम्मान बढ़ेगा

वृष: अचानक धन लाभ, मित्रो का सहयोग

मिथुन: धन व्यय, मानसिक तनाव

कर्क: घात, कष्ट, वाहन से सावधानी

सिंह: धन व्यय, परिवार में सामंजस्य की कमी

कन्या: छोटी यात्रा, भौतिक सुख बहुत कम

तुला: शारीरिक विकार, अज्ञात भय

वृश्चिक: विवाद से बचें, पढ़ाई में परेशानी

धनु: धन लाभ, शत्रु सक्रिय

मकर: साझेदारी में परेशानी, विरोधी से चुनौती

कुंभ: बिना वजह यात्रा

मीन: कार्य में देरी, परिश्रम से सफलता

चांद तीन रंगों में दिखाई देगा

31 जनवरी को चंद्रग्रहण देखने का मौका मिलेगा। यह एक दुर्लभ घटना होगी। इस दिन चांद तीन रंगों में दिखाई देगा। ऐसी घटना 36 वर्ष बाद देखने को मिलेगी, जिसमें सुपर मून, ब्लू मून (Blue Moon) और ब्लड मून (Blood moon) तीन रूपों के दीदार हो सकेंगे। ऐसी दुर्लभ घटना 30 दिसम्बर 1982 को हुई थी। 31 जनवरी के बाद भारत में 27 जुलाई को चंद्रग्रहण (Chandra Grahan) देखा जा सकेगा। लेकिन वह ब्लू मून (Blue Moon) या सुपर मून की तरह नहीं होगा।

ग्रहण के समय क्या करें, क्या ना करें

ग्रहण काल के दौरान कोई नया कार्य न करें। सूतक के दौरान भोजन बनाना और खाना वर्जित होता है। देवी देवताओं की मूर्ति और तुलसी के पौधे का स्पर्श नहीं करना चाहिए. दांतों की सफाई बालों में कंघी करना भी वर्जित माना गया है।

यह ज़रूर करें

ध्यान, भजन, ईश्वर की आराधना करें। सूर्य व चंद्र से सम्बंधित मंत्रों का उच्चारण करें। ग्रहण समाप्ति के बाद घर के शुद्धिकरण के लिए गंगाजल का छिड़काव करें। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान के बाद भगवान की मूर्तियों का स्नान कराएं तथा पूजा करें। सूतक काल समाप्त होने के बाद ही भोजन करें।

January 31, 2018 0 comment
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Budget

संसद के बजट (Budget 2018) सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ हुई. इसके बाद बजट सत्र के पहले दिन वित्तमंत्री अरुण जेटली ने आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट लोकसभा में पेश की। हिन्दी और अंग्रेज़ी में पेश किए गए इस सर्वे में भविष्य में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई गई है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2018 में जीडीपी ग्रोथ 6.75 फीसदी रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2019 में जीडीपी ग्रोथ 7-7.5 फीसदी रहने का अनुमान है। इस सर्वे में कच्चा तेल का बढ़ना चिंता का विषय है। बता दें कि यह रिपोर्ट देश की आर्थिक स्थिति की वर्तमान स्थिति और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से मिलने वाले परिणामों को दर्शाती है।

अगले वित्त वर्ष में इकोनॉमी में ग्रोथ की उम्मीद है। बेहतर एक्सपोर्ट के सहारे इकोनॉमी में ग्रोथ देखने को मिलेगी। मौजूदा वित्त वर्ष में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन का लक्ष्य हासिल होने की उम्मीद है। वहीं दूसरी तरफ सरकार निजी निवेश में तेजी लाने पर फोकस कर रही है। रोजगार, शिक्षा और कृषि पर सरकार का फोकस रहेगा। हालांकि, पेश किए गए सर्वे में भविष्य में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई गई है। पोर्ट के मुताबिक, जीएसटी, बैंकों के पुनर्पूंजीकरण, एफडीआई नियमों में ढील और ऊंचे निर्यात की वजह से चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था ने रफ्तार पकड़ी है। वित्त वर्ष 2017-18 में सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) की वृद्धि दर 6.1 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। 2016-17 में यह 6.6 प्रतिशत रही थी।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी बात ये है कि डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्सपेयर्स में बड़ा इजाफा हुआ है। नॉन एग्रीकल्चर पेरोल में उम्मीद से ज़्यादा तेजी रही। राज्यों के साथ सम्बंधों में और सुधार आया है और बड़े फैसलो में राज्यों ने केंद्र का साथ दिया है। सरकार का मानना है कि फाइनैंशियल इयर 2019 में आर्थिक प्रबंधन में थोड़ी मुश्किल होगी। इस साल चालू खाता घाटा 1.5 से लेकर 2 पर्सेंट तक रह सकता है। मौजूदा वित्त वर्ष में कृषि ग्रोथ 2.1 पर्सेंट रहने का अनुमान है।

फाइनैंशल इयर 2017-18 के लिए राजकोषीय घाटा 3.2 पर्सेंट रहने का अनुमान है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मौजूदा फाइनैंशल इयर में 3.3 पर्सेंट रहने का अनुमान है। थोक मूल्य सूचकांक के 2.9 पर्सेंट तक रहने की संभावना है। इस साल विदेशी मुद्रा भंडार में बड़े इजाफे की उम्मीद। 209.4 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचेगा आंकड़ा।

सरकार आगामी बजट में आयकर के स्तर तथा दरों में संशोधन कर सकती है, ताकि आम लोगों पर दबाव कम किया जा सके. वित्तीय परामर्श सेवा कंपनी ईवाय के एक बजट पूर्व सर्वेक्षण में 69 प्रतिशत लोगों की राय है कि कर छूट का स्तर बढ़ाना चाहिए ताकि लोगों के पास खर्च करने को ज़्यादा आय बचे। सर्वेक्षण में करीब 59 प्रतिशत ने कहा कि विभिन्न प्रकार की अब अप्रासंगिक हो चुकी कटौतियों की जगह एक मानक कटौती होनी चाहिए जिससे कर्मचारियों के ऊपर कर दबाव कम होगा।

इस सर्वेक्षण में 150 मुख्य वित्त अधिकारियों, कर प्रमुखों व वरिष्ठ वित्त पेशेवरों ने भाग लिया और यह जनवरी में हुआ। करीब 48 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि उन्हें वित्त मंत्री द्वारा कॉर्पोरेट कर कम किये जाने की उम्मीद है, लेकिन उन्हें लगता है के उपकर जारी रहेंगे। करीब 65 प्रतिशत लोगों का अनुमान है कि लाभांश पर कर व्यवस्था में बदलाव किए जा सकते हैं। ईवाय ने कहा, “बजट पूर्व सर्वेक्षण में पता चलता है कि कर नीतियां स्थिर एवं सतत होगी तथा कर ढांचे में सुधार होगा।”

मोदी सरकार के अगले बजट (Budget) में मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिल सकती है। वर्ष 2018-19 के आगामी आम बजट में सरकार कर छूट सीमा बढ़ाने के साथ-साथ कर स्लैब में भी बदलाव कर सकती है। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्रालय के समक्ष व्यक्तिगत आयकर छूट सीमा को मौजूदा ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर तीन लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। हालांकि, छूट सीमा को पांच लाख रुपये तक बढ़ाने की समय-समय पर मांग उठती रही है। वर्ष 2018-19 का आम बजट (Budget) मोदी सरकार के मौजूदा कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट होगा।

January 30, 2018 0 comment
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passport

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट(Passport) बनवाने की प्रक्रिया को आसान करने के लिए शुक्रवार को कई नए नियम जारी किए हैं। अब साधु-संन्यासी, विवाह के बाहर पैदा हुए बच्चे और सिंगल पेरेंट्स के बच्चों, अनाथ बच्चों का पासपोर्ट भी आसानी से बन सकेगा। साथ ही माता-पिता दोनों का नाम पासपोर्ट आवेदन के लिए देना अनिवार्य नहीं होगा।

अब आपका पासपोर्ट ऐड्रेस प्रूफ के काम नहीं आ सकेगा। जल्द ही पासपोर्ट(Passport) के नियमों में बदलाव होने जा रहे हैं। पासपोर्ट का कलर भी चेंज किया जाएगा। यंहा आप जानेगे की पासपोर्ट में कौन-से नए बदलाव हो सकते हैं।

विदेश मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के बाद यह निर्णय लिया गया है। विदेश मंत्रालय के स्टेटमेंट के मुताबिक, समिति की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया है। नए वर्जन में पासपोर्ट का लास्ट पेज खाली रखा जाएगा। इसी पेज में एड्रेस सहित लीगल गार्डियन का नाम, मां, पत्नी, पति का नाम और पुराने पासपोर्ट का नंबर आदि जानकारी दी गयी होती है। यह पेज अब नए पासपोर्ट के साथ नहीं होगा। इसी कारण एड्रेस प्रूफ के तौर पर अब पासपोर्ट काम में नहीं आ सकेगा।

पिछले साल अगस्त में क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम प्रोजेक्ट (CCTNS) को पासपोर्ट सर्विस के साथ लिंक कर दिया गया था। बहुत जल्द ही यह सिस्टम फिजिकल पुलिस वेरिफिकेशन को खत्म कर देगा। इस सिस्टम के लागू होते ही वेरिफिकेशन भी ऑनलाइन ही हो जाएगा। इससे पासपोर्ट बनने में लगने वाला टाइम और भी ज़्यादा कम हो जाएगा।

पासपोर्ट (Passport) में अब माता – पिता का नाम और पते वाला पेज नहीं होगा, आख़िरी पेज को अब खाली रखा जायेगा ।

जो लोग ECR कैटेगरी में आएंगे उन्हें अब ब्लू की जगह ऑरेंज कलर का पासपोर्ट मिलेगा ।

जो लोग नॉन  ECR कैटेगरी में आएंगे उन्हें पहले की तरह ब्लू  कलर का पासपोर्ट मिलेगा ।

वर्तमान में शासकीय अधिकारीयों को सफ़ेद रंग का तथा डिप्लोमैट्स को लाल रंग का तथा अन्य को ब्लू रंग का पासपोर्ट दिया जाता है ।

January 16, 2018 0 comment
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भारत  में 2017 की महत्व पूर्ण  घटनाएं समय का चक्र अपनी गति से चलता रहता है , देखते ही देखते 2017 का  साल अपने साथ कुछ अच्छी और कुछ बुरी यादें छोड़ कर  हमसे  विदा  हो रहा  है , अलविदा  2017. आइये  याद करें कुछ  2017 के यादगार  घटनाक्रम

भारत में राष्ट्रपति चुनाव  2017

रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति  हुवे । निर्वाचित होने के बाद उन्‍होंने कहा, ”अपने समाज एवं देश के लिए अथक सेवाभाव आज मुझे यहां तक ले आया है। इस पद पर रहते हुए संविधान की रक्षा करने और उसकी मर्यादा को बनाए रखना मेरा कर्त्‍तव्‍य होगा।” इससे पहले, उनकी जीत की आधिकारिक घोषणा की गई। नतीजों की घोषणा के बाद बीजेपी मुख्‍यालय में कोविंद के सम्‍मान में कार्यक्रम रखा गया। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह भी मौजूद थे। राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को सात लाख दो हजार 644 वोट मिले हैं। वहीं मीरा कुमार को तीन लाख 66 हजार 314 वोट मिले हैं। रामनाथ कोविंद को 65.35 प्रतिशत वोट मिले, मीरा कुमार को 34.35 प्रतिशत वोट मिले। सोमवार (17 जुलाई) 2017 को देश के 32 मतगणना स्थलों पर राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग हुई थी। मौजूदा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो गया था । देश के 14वें राष्ट्रपति  ने 25 जुलाई को पद की शपथ  ली । राष्‍ट्रपति पद पर मेरा चयन भारतीय लोकतंत्र की महानता का प्रतीक है’

उपराष्ट्रपति का चुनाव 5 अगस्त 2017 को हुआ था। वेंकैया नायडू को भारत के उपराष्ट्रपति चुना गया है।

राज्यसभा चुनाव

भारतीय राज्यसभा चुनाव, 2017

जुलाई और अगस्त 2017 में सेवानिवृत्त लोगों की जगह, राज्य सभा के दस सदस्यों का चुनाव करने के लिए 21 जुलाई और 8 अगस्त 2017 को भारत में राज्य सभा का आयोजन किया गया था।

राज्यों   की विधान सभा चुनाव

भारत में 2017 के चुनाव

अनुसूची के परिणाम

प्रारंभ दिनांक समाप्ति तिथि चुनाव क्षेत्राधिकार पार्टी परिणाम तारीख जीतना

4 फरवरी 2017    पंजाब विधान सभा चुनाव, 2017  पंजाब   भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस   11 मार्च 2017

4 फरवरी 2017 गोवा विधान सभा चुनाव, 2017 गोवा भारतीय जनता पार्टी

15 फरवरी 2017 उत्तराखंड विधान सभा चुनाव, 2017 उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी

11 फरवरी 2017 8 मार्च 2017 उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, 2017 उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी

4 मार्च 2017 8 मार्च 2017 मणिपुर विधान सभा चुनाव, 2017 मणिपुर भारतीय जनता पार्टी

9 नवंबर 2017 हिमाचल प्रदेश विधान सभा चुनाव, 2017 हिमाचल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी 18 दिसंबर

9 दिसंबर 2017 14 दिसंबर 2017 गुजरात विधान सभा चुनाव, 2017 गुजरात भारतीय जनता पार्टी

भारत में जी  .ऐस . टी . की शुरआत

गुड्स एंड सर्विसिज़ टैक्स या वस्तु एवं सेवा कर ( संक्षेप मे: वसेक या जीएसटी अंग्रेज़ी: GST, अंग्रेज़ी: Goods and Services Tax) भारत में १ जुलाई २०१७ से लागू एक महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था है जिसे सरकार व कई अर्थशास्त्रियों द्वारा इसे स्वतंत्रता के पश्चात् सबसे बड़ा आर्थिक सुधार बताया है।इससे केन्द्र एवम् विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा भिन्न भिन्न दरों पर लगाए जा रहे विभिन्न करों को हटाकर पूरे देश के लिए एक ही अप्रत्‍यक्ष कर प्रणाली लागू की जाएगी जिससे भारत को एकीकृत साझा बाजार बनाने में मदद मिलेगी। भारतीय संविधान में इस कर व्यवस्था को लागू करने के लिए संशोधन किया गया है।

1 जुलाई 2017 से पूर्व  किसी भी सामान पर केंद्र एवं राज्य सरकार के द्वारा कई तरह के अलग-अलग कर लगाती हैं लेकिन जीएसटी आने से सभी तरह के सामानों पर एक जैसा ही कर लगाया जाएगा पूर्व में  किसी भी सामान पर 30 से 35% तक कर देना पड़ता था  कुछ चीजों पर तो प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रुप से लगाया जाने वाला कर 50% से ज्यादा होता था  जीएसटी आने के बाद यह कर अधिकतम 28 प्रतिशत  हो जाएगा जिसमें कोई भी अप्रत्यक्ष कर नहीं होगा जीएसटी भारत की अर्थव्यवस्था को एक देश एक कर वाली अर्थव्यवस्था बना देगा।  फिलहाल भारतवासी 17 अलग-अलग तरह के कर  चुकाते हैं जबकि  जीएसटी लागू होने के बाद केवल एक ही तरह का कर दिया जाएगा इसके लागु होते ही एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, वैट, मनोरंजन कर,  लग्जरी कर जैसे बहुत सारे कर खत्म हो चुके |

जीएसटी लागू होने के बाद किसी भी सामान और  सेवा पर कर वहां लगता है  जहां वह बिकेगा |  जीएसटी अलग-अलग स्तर पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी, एडिशनल एक्साइज ड्यूटी,सेंट्रल सेल्स टैक्स, वैट, लक्ज़री टैक्स, सर्विस कर, इत्यादि  की जगह अब केवल जीएसटी लगेगा। जीएसटी परिषद ने 66 तरह के प्रोडक्ट्स पर टैक्स की दरें घटाई हैं |

महत्वपूर्ण हस्तियां  जिन्हे  2017 हमने  खोया

6 जनवरी – ओम पुरी, 66, अभिनेता, (जन्म 1950)

27 अप्रैल – विनोद खन्ना, 70, वयोवृद्ध अभिनेता, पूर्व राज्य मंत्री (जन्म 1 9 46), मूत्राशय कैंसर।

4 दिसंबर – शशि कपूर, 79, भारतीय ज्येष्ठ अभिनेता।

इस तरह  कुछ दुखी करने वाली तथा कुछ  दिल  को सकून देने वाली  यादो को हमारे  जेहन में छोड़ कर  जाता हुआ  , 2017 …..

अलविदा   2017  …………..

December 31, 2017 0 comment
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अभी आप बैंक में जो पैसा जमा करते हैं। बैंक के डूबने की स्थिति में आपके डिपाजिट का 1 लाख रुपए तक का इंश्योरेंस होता है। मतलब उस बैंक में अगर आपके 2 लाख रुपए जमा है तो आपके 1 लाख रुपए बैंक डूबने की स्थिति में सुरक्षित रहेंगे। अगर आपके बैंक में 1 लाख रुपए से कम डिपॉजिट है तो आपको पूरा पैसा मिल जाएगा। हाल ही में सरकार ने फाइनेंशियल रिज्योल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल 2017 (FRDI) का प्रस्ताव रखा है। नए बिल के प्रस्ताव के मुताबिक बैंक डूबने की स्थिति में आपके 1 लाख वाले डिपॉजिट इंश्योरेंस के पैसे में से बैंक के घाटे की पूर्ती की जा सकेगी। ध्यान रहे अभी ये प्रस्ताव है।

भविष्य  में ऐसा हो सकता है कि बैंक में आपका जो पैसा जमा है, उस पर ही आपका कंट्रोल न हो। यदि किसी कारणवश कोई बैंक दिवालिया होती है तो वह बगैर आपसे पूछे  आपके पैसे का इस्तेमाल कर सकता है। जी हां, कुछ ऐसे ही प्रावधान फाइनेंशियल रिजॉल्यूशन एंड डिपोजिट इंश्योरेंस (FRDI) बिल 2017 में किए गए हैं। यह डिपोजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) एक्ट की जगह लेगा। कहा जा रहा है कि इससे बैंक में जमाकर्ताओं का पैसा वापस मिलने की गारंटी नहीं रहेगी।

अगर कोई बैंक या वित्तीय कंपनी डूबने की स्थिति में आती है तो रिज्योल्यूशन कॉर्पोरेशन उस फर्म को टेकओवर कर लेगा। उसका रिज्योल्यूशन प्लान तैयार करेगी जो 12 महीने और बढ़ाया जा सकेगा। ‘बेल इन’ वाला प्रस्ताव बैंक को बचाने वाले कई विकल्प में एक है। दूसरे विकल्प में विलय और एसेट और लायबिलिटी का ट्रांसफर भी शामिल है। इसके अलावा नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के जरिए लिक्विडेशन भी शामिल है।

ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार नए बिल से जमाकर्ताओं के मन में बैंकों में जमा रकम डूबने का डर-सा समा गया है। कई बैंक मैनेजरों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि रोजाना दर्जनों लोग इस डर से पैसे निकाल रहे हैं।

जिस रकम का बीमा हो गया है, उसे छोड़ बाकी रकम बेल-इन प्रावधान के दायरे में आएगी। हालांकि इस रकम का इस्तेमाल करने के लिए बेल-इन क्लॉज को शामिल किया जा सकेगा। हालांकि, आज भी अगर आपका बैंक दिवालिया हो जाए तो सिर्फ़ एक लाख रुपये की रकम ही आपको बैंक से मिलती है। भले ही आपके खाते में इससे ज़्यादा पैसा जमा हो।

अभी घबराने की ज़रूरत नहीं है। इसकी वजह यह है कि पिछले 70 साल में देश में शायद ही कोई बैंक दिवालिया हुआ है। हालांकि, अलग-अलग बैंकों में अपना पैसा रखकर आप अपना जोखिम घटा सकते हैं।

एफआरडीआई बिल २०१७       FRDI 2017  

December 30, 2017 0 comment
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