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अमेरिकी सुपरहीरो की हिट फ़िल्म है, जो मार्वेल कॉमिक्स की सुपरहीरो टीम, अवेंजर्स पर आधारित है। इसका निर्माण मार्वल स्टूडियो ने किया है, इस मूवी की कहानी क्रिस्टोफर मार्कस और स्टीफन मैकफ़ेली ने लिखी है, और यह फिल्म एंथनी तथा जो रूसो द्वारा निर्देशित की गई है।

इस मूवी के कलाकार इस प्रकार है :-

रॉबर्ट डॉनी जुनियर – टोनी स्टार्क/आयरन मैन
एक स्वयं घोषित विद्वान, रइस, रोमियो और इंजिनियर जिसने खुद एक यांत्रिक सूट बनाया है। डॉनी को अपनी चार फ़िल्मों के समझौते के चलते इस फ़िल्म में लिया गया था जिनमे आयरन मैन २ और द अवेंजर्स शामिल है।
क्रिस इवांस – स्टीव रॉजर्स/कैप्टन अमेरिका
एक द्वितीय विश्वयुद्ध का सेनानी जिसे मानवता की शारीरिक चोटी पर प्रयोगात्मक द्रव्य से पहुँचाया गया था। कैप्टन अमेरिका और टोनी स्टार्क में लगातार मतभेद उत्पन्न होते रहते हैं क्योंकि दोनों ही अलग-अलग काल के है।
मार्क रफ़्लो – डॉ॰ ब्रुस बैनर/हल्क
एक विद्वान वैज्ञानिक जो गामा किरणों के प्रभाव में आने के चलते गुस्सा होने पर एक दानव में बदल जाता है। हल्क का अभिनय करने के लिए अवतार में उपयोग की गई तकनीक का प्रयोग किया गया है। लोउ फेरिग्नो ने हल्क को आवाज़ दी है।
क्रिस हैमस्वर्थ – थॉर
नॉर्स मृथक में वर्णित बिजली का देवता। अपने इस पात्र के लिए क्रिस हेम्स्वर्थ ने वज़न व शारीरक बल बढ़ाया था।
स्कार्लेट जोहानसन – नताशा रोमानोफ़/ब्लैक विडो
जेरेमी रेनर – क्लिंट बर्टन/हॉकाआय
सैम्युअल एल. जैक्सन – निक फ्यूरी
टॉम हिडल्स्टन – लोकी
कोबी स्मल्डर्स – मारिया हिल
स्टेलान स्कार्सगार्ड – डॉ॰ एरिक सेल्विग

April 25, 2019 0 comment
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Munkatcher Rebbe at wedding of his beloved nephew, Rabbi Dr. Nathan David Rabinowich

Munkatcher Rebbe,zt”l, at wedding of his beloved nephew, Rabbi Dr. Nathan David Rabinowich. To Dr.Rabinowich’s left sits a very dear friend, Rabbi Yisrael Meir Vogel of Baltimore, the Ketubaillustrator.

Nathan David Rabinowich is the Executive Director of Jewish Heritage Tours, a firm that organizes educational tours to Africa, Canada, and Western Europe & authored of 13 acclaimed books on Jews history and has been honored with numerous awards for his exceptional work on the subject.

Website:

http://nossonrabinowich.com/

October 22, 2018 0 comment
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Nathan David Rabinowich is a famous business personality. Nathan David Rabinowich served as the Executive Director at Jewish Heritage Tours, Brooklyn for more than ten years.

Rabbi Dr. Nosson Dovid Rabinowich’s Latest Publications and what is Forthcoming

The Responsa and Talmudic Novellae of Rav Sherira ben Rav Chanina Gaon, Two volumes, Jerusalem, 2012 (Hebrew) The first-ever collection of all the known writings of Rav Sherira Gaon, the Gadol Ha’Dor of the 10th- 11th centuries, of Baghdad.

Binat Nevonim, fascinating ground-breaking essays on the lessons of the Holocaust by the Munkatcher Rebbe, zt”l, Rebbe Baruch Yehoshua Yerachmiel Rabinowich; incl. a long introduction about the Rebbe’s life and his amazing “hatzalah” work ,saving thousands of Jewish lives in Budapest, Jerusalem, 2013

Chidushei Bais Av : A remarkable and original 3 part work, based on manuscript, from Ha’Gaon Rebbe Avraham Aaron Yudelevich, one of the greatest & most prolific Rabbanim in America(d.1930) and the first rabbi to ever visit the White House(1924), Jerusalem, 2013 (published by Rabbi Dr. Nosson Dovid Rabinowich with a long essay about Rav Yudelevich’s controversial life)

Upcoming :

An oversize , two volume collector’s edition of all the responsa of Ha’Gaon Rebbe Avraham Aaron Yudelevich dealing with all sections of the Shulchan Aruch.

A collection of all of the biographical monographs of the great scholar, Ha’Gaon Rebbe Reuvain Margolies.

A collection of all Rabbi Margolies’ notes on the four sections of Shulchan Aruch,on Rambam and some other important Medievalists (all from mss.)

Website:

http://nossonrabinowich.com/

October 17, 2018 0 comment
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Chandra Grahan

Chandra Grahan क्यों होता है

विज्ञानं  की दृष्टि से चंद्रग्रहण उस खगोलीय स्थिति को कहते है जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रतिछायां  में आ जाता है। तथा ऐसा तभी हो सकता है जब सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा इस क्रम में लगभग एक सीधी रेखा में  उपस्थित हों। इस भौगोलिक प्रतिबंध के कारण chandra grahan केवल पूर्णिमा को घटित हो सकता है। chandra grahan का स्वरूप  एवं अवधि चंद्र आसंधियों के सापेक्ष होने वाली चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करता है ।

साधारणतः chandra grahan को पृथ्वी के रात्रि पक्ष के किसी भी भाग से देखा जा सकता है। जहाँ चंद्रमा की छाया की लघुता के कारण सूर्यग्रहण किसी भी स्थान से केवल कुछ मिनटों तक ही दिखता है, वहीं चंद्रग्रहण की अवधि कुछ घंटों की होती है। चंद्रग्रहण को, आँखों के लिए बिना किसी विशेष सुरक्षा के देखा जा सकता है, क्योंकि चंद्रग्रहण की उज्ज्वलता पूर्ण चंद्र से भी कम होती है।

सदी का सबसे बड़ा चन्द्र ग्रहण

इस सदी का सबसे विशाल  चंद्रग्रहण (longest lunar eclipse) आज यानि  27 जुलाई 2018 को लग रहा है ।  महत्वपूर्ण बात यह है कि यह ग्रहण संपूर्ण भारतवर्ष में दिखाई देगा तथा आरम्भ से  एवं मोक्ष काल तक ग्रहण दिखाई देगा । यह खग्रास चंद्रग्रहण संपूर्ण यूरोप, अफ्रीका, एशिया तथा आस्ट्रेलिया महाद्वीप में  दिखाई देगा न्यूजीलैंड के अधिकांश भाग में, जापान, रूस, चीन, अफ्रीका तथा यूरोप के अधिकांश भागों में दिखाई होगा ।

27 जुलाई 2018 को पड़नेवाला चंद्रग्रहण वर्तमान सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण है। इस ग्रहण का समय लगभग 4 घंटे का है। यह चंद्रग्रहण इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि इस दिन कई ऐसा संयोग बन रहे हैं जो ज्योतिष की दृष्टि से बेहद ही खास हैं।इतिहास उठाकर यदि देखा जाये तो तकरीबन 18 साल के बाद गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को ग्रहण लगने जा रहा है। इससे पूर्व में 16 जुलाई 2000 को गुरु पूर्णिमा के दिन ऐसा चंद्रग्रहण लगा था।

इस चंद्रग्रहण के दौरान मंगल और केतु के बीच त्रिग्रही योग बनेगा। केतु के साथ मकर राशि में चंद्रमा के होने से भी ग्रहण योग बन रहा है। जब चंद्रमा और केतु किसी राशि में एकसाथ होते हैं तब ही ऐसा योग बनता है।

यह चंद्र ग्रहण पूर्ण खग्रास होगा अर्थात पूरा चंद्रग्रहण। यह चंद्रग्रहण इसलिए भी अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है क्योंकि एक ही साल में यह दूसरा ब्लडमून चंद्रग्रहण होगा।

गुरु पूर्णिमा को चंद्रग्रहण होने के कारण आपको गुरु पूजन सूतक लगने से पहले ही कर लेना चाहिए. क्योंकि चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक लगेगा इसलिए बेहतर होगा कि आप दोपहर ढाई बजे तक गुरु पूजन और मंदिर दर्शन कर लें। लगभग दोपहर बाद मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे।

July 27, 2018 0 comment
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Delhi lal kila

दिल्ली का महशूर लाल किला, (Delhi lal kila) पुरानी दिल्ली के इलाके में स्थित है, यह किला लाल रेत-पत्थर से निर्मित है। दिल्ली के इस ऐतिहासिक किले को पाँचवे मुग़ल बाद्शाह शाहजहाँ ने बनवाया था। इस किले को “लाल किला”  इसकी दीवारों के लाल रंग के कारण कहा जाता है। इस ऐतिहासिक किले को वर्ष 2007 में युनेस्को द्वारा एक विश्व धरोहर स्थल चयनित किया गया था।

प्राचीन इतिहास के अनुसार लाल किला मुगल बादशाह शाहजहाँ द्वारा ई स 1639 में बनवाया गया था। लाल किले का जीर्णोद्धार फिर से किया गया था, जिससे इसे सलीमगढ़ किले के साथ एक रूप किया जा सके | यह ऐतिहासिक किला एवं महल बादशाह शाहजहाँनाबाद की मध्यकालीन नगरी की राजनीती का महत्त्वपूर्ण केन्द्र-बिन्दु रहा है। लालकिले की परियोजना, एवं खूबसूरती एवं सौन्दर्य मुगल सृजनात्मकता का शिरोबिन्दु है, जो कि शाहजहाँ के काल में अपने चरम उत्कर्ष पर पहुँची थी। इस किले के निर्माण के बाद भी कई बड़े विकास कार्य स्वयं शाहजहाँ द्वारा किए गए | ब्रिटिश काल में यह किला मुख्यरूप से छावनी रूप में प्रयोग किया गया था। यही नहीं, स्वतंत्रता के बाद भी इसके कई महत्त्वपूर्ण भाग सेना के नियंत्रण में सन 2003 तक रहे।

लाल किले में विशिष्ट श्रेणी की कला एवं विभूषक कार्य का दर्शन होता है। यहाँ की सम्पूर्ण कलाकृतियाँ फारसी, यूरोपीय एवं भारतीय कला का मिला जुला रूप है, यह शैली रंग, अभिव्यंजना एवं रूप में उत्कृष्ट है। लालकिला (Delhi lal kila) दिल्ली की एक महत्त्वपूर्ण इमारत समूह है, जो भारतीय इतिहास एवं उसकी कलाओं को अपने में समेटे हुए हैं। इसका महत्त्व समय की सीमाओं से कंही बढ़कर है। दिल्ली का लालकिला वास्तुकला सम्बंधी प्रतिभा एवं शक्ति का जिवंत प्रतीक है। सन 1913में इसे राष्ट्रीय महत्त्व के स्मारक घोषित किया गया।

लाल किले की दीवारे (Delhi lal kila) बड़ी ही खूबसूरती से तराशी गईं हैं। ये दीवारें दो मुख्य द्वारों पर खुली हैं पहला दिल्ली दरवाज़ा एवं दूसरा लाहौर दरवाज़ा। लाहौर दरवाजा मुख्य प्रवेशद्वार है। इसके अन्दर एक लम्बा बाज़ार है, चट्टा चौक, जिसकी दीवारें दुकानों से कतारित हैं। इसके बाद थोड़ा बडा़ खुला स्थान है, जहाँ यह लम्बी उत्तर-दक्षिण सड़क को काटती हुई जाती है।

दिल्ली के महशूर लाल किले के आसपास का क्षेत्र

छाबरी बाजार  :-  यह लाल किले ठीक सामने स्थित है ।

लाहोरी दरवाजा :- यह दरवाजा लालकिले का मुख्य दरवाजा है इसे लाहोरी दरवाजा के नाम से जाना जाता है ।

दिल्ली दरवाजा  :-  यह दरवाजा दक्षिण की और स्थित है । इस दरवाजे के दोनों और विशाल हाथी बने हुवे हैं । इसे ओरंगजेब द्वारा तोड़ दिया गया था ।

पानी दरवाजा :- पानी दरवाजा काफी छोटा दरवाजा हैं , दक्षिण पूर्व में स्थित हैं ।

चट्टा चौक:- मुगल कल में यंहा पर हाट बाज़ार लगा करता था। लाहोरी गेट से अंदर जाने पर चट्टा चौक आता हैं।

नौबत खाना:– यंहा पर संगीतकार अपने अपनी संगीत कला का प्रदर्शन करते थे।

दीवान-ए-आम:-यह स्थान उस समय की कोर्ट हुवा करती थी, राजा, यही पर सुनवाई किया करते थे।

मुमताज महल:-यह राज की रानियों एवं उनकी दासियो के लिए स्थान था। वर्तमान में यंहा पर संग्रहालय हैं।

रंग महल :- यह भी मुमताज़ महल की तरह रानियों के लिए महल था । इस महल में एक नहर हुवा करती थी जिस पर पल बना हुवा था ।

दिवान-ए -खास :- यह बहुत ही खूबसूरत महल हुवा करता था । यह राजा का निजी महल था जिसे दिवान-ए – खास कहा जाता था ।

मोती मस्जिद :- इसे ओरंगजेब द्वारा बनाया गया था । यह बादशाह की निजी इबादतगाह हुवा करती थी ।

July 20, 2018 0 comment
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अगर पूछा जाए कि एक भारतीय होने के नाते आपको बिना वीजा (Visa) के किस देश में इंट्री मिल सकती है, तो आपको जवाब निश्चित तौर पर नेपाल और भूटान होगा। अगर हम कहें कि इसके अलावा भी बहुत से देश हैं, जहाँ आप बिना वीजा (Visa) के एंट्री कर सकते हैं, तो शायद आप चौंक जाएंगे। हालांकि यह सच है। नेपाल भूटान के अलावा दुनिया के ऐसे बहुत से देश हैं, जहाँ आप बिना वीजा (Visa) के जा सकते हैं।

हर किसी का सपना होता है कि कम से कम एक बार विदेश घूमने जाए लेकिन कभी पैसे कभी वीजा न मिलने के कारण अपने सपने को सपना ही बना देते है अब लोग बिना वीजा के और कम बजट में विदेश घूम कर आ सकते हैं हम आपको इस आलेख में बिना वीजा (Visa) और कम खर्च के इन देशों को घूमने (ट्रेवल) जा सकते है) बताने जा रहे हैं ऐसे 21 देश जहाँ पर भारतीय बिना वीजा और कम खर्च में आप इन देशों की यात्रा कर सकते हैं। अगर आपको विदेश घूमने जाना है और वीजा नहीं मिल रहा तो आपके लिए इससे अच्छी खबर कुछ भी नहीं। भारत सरकार के मुताबिक कोई भी भारतीय नागरिक जिनके पास पासपोर्ट है वह बिना किसी वीजा के इन 21 देशों की यात्रा कर सकते हैं। इन सभी देशों की लिस्ट निचे दी हुई है। इन सूचि में हमने सभी देशों के बारे में बताया है कि कहाँ पर आपको किसी भी वीजा की ज़रूरत नहीं है श्रीलंका के लिए किसी भी वीजा (Visa) की ज़रूरत नहीं है परन्तु स्पेशल परमिशन की आपको ज़रूरत होगी।

ग्लोबल फाइनेंस एडवाइजरी फर्म एंड कैपिटल ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी किया उनमे उन देशों की लिस्ट जारी की है, जिनके पासपोर्ट सबसे पावरफुल हैं। ऐसे देश जो दूसरे देशों में बिना वीजा के अपने नागरिकों को ट्रेवल करने की इजाजत देते हैं। इनमें सबसे पावरफुल पासपोर्ट स्वीडन देश का है,। जो अपने नागरिकों को 174 देशों में बिना वीजा के घूमने की इजाजत देता है दुनिया के सिर्फ़ 21 देश ऐसे हैं, जहाँ भारतीय पासपोर्ट रखने वाले बिना वीजा के ट्रैवल कर सकते हैं।

1 * हांगकांग

दिन: 14 दिन तक करेंसी रेट: 1 हांगकांग डॉलर = 8.59 भारतीय रु।

2 * ग्रेनाडा

दिन: 3 महीने तक करेंसी रेट: 1 ईस्ट कैरेबियन डॉलर = 24.67 रु।

3 * वनुआतु

दिन: 90 दिन तक करेंसी रेट: 1 वनुआतु वातु = 0.61 भारतीय रु।

4 * भूटान

दिन: 150 दिन तक करेंसी रेट: 1 भूटानी = 1 रु.

5 * मॉरीशस

दिन: 90 दिन तक

6* फिजी

दिन: 4 महीने  तक करेंसी रेट: 1 फिजी डॉलर = 31 रु.

7 * नेपाल

दिन: 150 दिन तक करेंसी रेट: 1 नेपाली रु. = 0.63 रु.

8 * इक्वाडोर

दिन: 90 दिन तक करेंसी रेट: 1 डॉलर = 66.60 रु.

9 *  हैती

दिन: 3 महीने तक करेंसी रेट: 1 हैतीयन गॉड्रे = 1.07 रु.

10 * एल सल्वाडोर

दिन: 90 दिन तक करेंसी रेट: 1 डॉलर = 66.66 रु.

11 * डॉमिनिका

दिन: 6 महीने  तक करेंसी रेट: 1 ईस्ट कैरेबियन डॉलर = 24.67 रु.

१२ * जमैका

दिन: 180 दिन तक करेंसी रेट: 1 डॉलर  = 0.54 रु.

उन देशों की सूचि जहाँ पर भारतीय को वीजा की जरुरत नहीं

1 * डोमिनिका – बिना वीजा

2 *   इकाडोर – बिना वीजा

3 *  अल सल्वाडोर – बिना वीजा

4 *   फिजी – बिना वीजा

5 * भूटान – बिना वीजा

6 *   ग्रेनाडा – बिना वीजा

7 *  हैती – बिना वीजा

8 *  जमैका – बिना वीजा

9 * मॉरीशस – बिना वीजा

10 *  माइक्रोनेशिया – बिना वीजा

11 *   सेंट किट्स और नेविस – बिना वीजा

12 *  नेपाल – बिना वीजा

13 *  त्रिनिदाद और टोबैगो – बिना वीजा

14 * वानुअतु – बिना वीजा

15 * भूटान – बिना वीजा

16 * हांगकांग – बिना वीजा

17 * दक्षिण कोरिया – बिना वीजा

18* एवाईआरओ मैसेडोनिया – बिना वीजा

19* स्वालबार्ड – बिना वीजा

20 * मोंटसेराट – बिना वीजा

21 *तुर्क और कैकोस द्वीप समूह – बिना वीजा

इस  तरह हम देखतें है की भारतीय होने के  नाते हम उपरोक्त देशों की यात्रा बिना वीजा के कर सकतें है । यदि आपके पास  पासपोर्ट है और आप विदेश घूमना चाहतें हैं तो उपरोक्त देशों की यात्रा बिना  वीजा के भी कर सकतें है ।

June 1, 2018 0 comment
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GST

लोग भले ही मान रहे हों कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी- GST) के दायरे में लाने से पेट्रोल-डीजल (Petrol & Diesel) की कीमतों में बड़ी कमी आ जाएगी, लेकिन बिहार के उप मुख्यमंत्री और जीएसटी (GST) नेटवर्क पैनल के प्रमुख सुशील मोदी की राय इससे अलग है। उनका कहना है कि इससे कीमतों पर कुछ खास असर नहीं पड़ेगा। देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए लगातार मांग उठ रही है कि इन्हें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाया जाए ।

मोदी ने कहा, ‘लोगों के बीच यह भ्रम है कि जीएसटी के दायरे में आने से पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बहुत कम हो जाएंगी। हालांकि कीमतों पर ऐसा कोई उल्लेखनीय प्रभाव नहीं पड़ेगा।’ उन्होंने टैक्स की ज़्यादा दरों पर अन्य देशों का हवाला भी दिया। उन्होंने कहा कि दुनियाभर के जिन देशों में जीएसटी की व्यवस्था लागू है, वहाँ भी राज्यों को इसकी सर्वोच्च स्लैब से ऊपर टैक्स लगाने का अधिकार मिला हुआ है।

आम लोगों को ऐसा लगता है कि अगर जीएसटी में पेट्रोल-डीजल (Petrol & Diesel) आ जाता तो सस्ता हो जाता। अब सरकार ने भी साफ कर दिया है कि जीएसटी में भी अगर पेट्रोल-डीजल आ गया फिर भी आपको सस्ता नहीं मिलेगा।

इस बार बजट में पेट्रोल-डीजल (Petrol & Diesel) के जीएसटी में आने की चर्चा थी। बजट में तो एलान नहीं हुआ लेकिन लोगों को ऐसा लगता है कि अगर जीएसटी में पेट्रोल-डीजल आ जाता तो सस्ता हो जाता। अब सरकार ने भी इशारा कर दिया है कि जीएसटी में भी अगर पेट्रोल-डीजल आ गया फिर भी आपको सस्ता नहीं मिलेगा।

मान लीजिए की आज डीलर को मुनाफा जोड़कर 38 रुपये 8 पैसे प्रति लीटर पेट्रोल पड़ता है। इस पर केंद्र सरकार 19.48 रुपये एक्साइज ड्यूटी लगाती है और दिल्ली में राज्य सरकार 15.54 रुपये वैट लगाती है। अगर ये दोनों टैक्स हटाकर सरकार जीएसटी की सर्वोच्च दर 28% भी लगा देती तो पेट्रोल पूरे देश में 48 रुपये 74 पैसे मिलने लगता। किन्तु इससे राज्य सरकार को मिलने वाला राजस्व प्रभावित होता है।

राज्यों की आपत्ति की वजह से पेट्रोल-डीजल जीएसटी में नहीं आया लेकिन कुछ समय पूर्व  वित्त सचिव हंसमुख अढिया ने साफ कर दिया कि राजस्व केंद्र और राज्य दोनों के लिए ज़रूरी है इसलिए 28 फीसदी जीएसटी लगाकर पेट्रोल-डीजल बेचना संभव नहीं है।

वर्तमान में पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतें सरकारी नियमन से पूरी तरह मुक्त हैं।

लेकिन जब क़ीमतें हर रोज़ बदलेंगी तो पेट्रोलियम कंपनियाँ नहीं चाहेंगी जीएसटी (GST) से पड़ने वाले भार को वह वहन करें। वह इस भार को ग्राहकों पर डालने की पूरी कोशिश करेंगी।

मौजूदा समय में पेट्रोल डीज़ल पर क़रीब 48 प्रतिशत तक टैक्स लगता है। जीएसटी (GST)के तहत टैक्स अधिकतम 28 प्रतिशत तक हो सकता है।

ये तो नहीं कहा जा सकता कि जीएसटी के दायरे में पेट्रोलियम पदार्थों को लाने से दामों में ज़्यादा फ़र्क पड़ता। लेकिन ये ज़रूर है कि इससे क़ीमतें नहीं बढ़तीं।

बिहार के वित्त मंत्री की भी जिम्मेदारी संभाल रहे सुशील मोदी ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने के बारे में जीएसटी परिषद विचार करेगी। उन्होंने कहा, ‘जीएसटी परिषद में इसको लेकर सहमति है कि जब तक जीएसटी व्यवस्था स्थिर नहीं हो जाती पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में नहीं लाया जाएगा।’ जीएसटी पिछले साल एक जुलाई से प्रभाव में आया है।

May 30, 2018 0 comment
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अब तक तो पढ़ाई लिखाई करके हर युवा डॉक्टरी, इंजीनियरिंग या एमबीए करने की सोचता था लेकिन बदलते वक्त के साथ-साथ अब करियर को लेकर युवाओं का रुझान भी बदलने लगा है। इस कृषि प्रधान देश में आज के युवाओं की रुचि कृषि क्षेत्र में करियर (agricultural sector) बनाने में ज़्यादा दिखाई दे रही है। आधुनिकता के इस दौर में कृषि के प्रति युवाओं का ये लगाव किसी चमत्कार से कम नहीं है और होना ही चाहिए क्योंकि भारत एक कृषिप्रधान देश है।

क्या है किसान बनने के लिए ज़रूरी योग्यता ?

यदि आप भी कृषि अनुसंधान के क्षेत्र से जुड़कर कृषि वैज्ञानिक (agricultural sector) या फिर एक बेहतर किसान बनना चाहते हैं तो फिर इसके लिए आपको 12वीं की परीक्षा अच्छे अंकों से पास कर बीएससी एग्रीकल्चर या फिर बीएससी एग्रीकल्चर ऑनर्स की डिग्री हांसिल करनी होगी। यह डिग्री एग्रीकल्चर, वेटनेरी साइंस, एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग, फॉरेस्टरी, हॉर्टीकल्चर, फूड साइंस और होम साइंस में से किसी भी एक विषय में ले सकते हैं। अपनी पढ़ाई पूरी करके आप सीधे खेती और इससे सम्बंधित गतिविधियों से जुड़कर कृषि क्षेत्र में देश के विकास में अपना अहम योगदान दे सकते हैं।

क्या हो सकती है कृषि क्षेत्र में करियर की संभावनाएँ ?

आज भी भारत की करीब 70 फीसदी जनसंख्या जीविका के लिए पूरी तरह से कृषि पर निर्भर है। ऐसे में कृषि क्षेत्र में पढ़े लिखे किसानों की सख्त ज़रूरत है। कृषि क्षेत्र में आप मार्केटिंग, एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग (agricultural sector) या मैनेजमेंट के क्षेत्र में जिसे चाहे अपना सुनहरा करियर बना सकते हैं। इसके अलावा आप नेशनेलाइज्ड बैंकों में बतौर कृषि विस्तार अधिकारी, ग्रामीण विकास अधिकारी, फील्ड ऑफिसर बनकर अपना शानदार करियर बना सकते हैं। इसके साथ ही राज्यों के विभिन्न कृषि विभागों में आपके लिए रोजगार की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं।

वर्तमान में कृषि महाविद्यालयों में एडमिशन पाने के लिए युवाओं के बीच मची होड़ से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन युवाओं के सिर पर कृषि क्षेत्र में करियर का जुनून किस कदर सवार है।

अगर आप भी कृषि क्षेत्र में करियर (agricultural sector) तलाश रहे हैं तो इसके लिए हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ बेहतरीन संस्थानों के बारे में, जहाँ से आप कृषि क्षेत्र के लिए ज़रूरी डिग्री या प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। आप हैदराबाद, पुणे, ग्वालियर, इंदौर और पालमपुर स्थित कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर से कृषि के क्षेत्र में प्रशिक्षण ले सकते हैं। कोलकाता और भुवनेश्वर के यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर (agricultural sector) से भी आप डिग्री हांसिल कर सकते हैं। उदयपुर के राजस्थान एग्रीकल्चर (agricultural sector) युनिवर्सिटी में कृषि के क्षेत्र में प्रशिक्षण के साथ डिग्री भी पा सकते हैं। इलाहाबाद स्थित इलाहाबाद एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट से प्रशिक्षण लेकर आप कृषि क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं। अलीगढ़ विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एग्रीकल्चर (agricultural sector) में दाखिला लेकर आप कृषि क्षेत्र की बारीकियों को समझ सकते हैं।

May 28, 2018 0 comment
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Indian Foreign Policy

भारत में लोकतांत्रिक सरकार है और यहाँ राष्ट्रपति का चुनाव होता है, इसलिए यह गणतंत्रात्मक व्यवस्था है। भारत हिंसात्मक विभाजन, फिर आजादी और अंततः गणतंत्र के रूप में वैश्विक पटल पर अपने सातवें दशक (वर्ष 2019) में प्रवेश करने की ओर अग्रसर है। निश्चित रूप से यह संविधान की प्रस्तावना में वर्णित प्रथम शब्द ‘वी द पीपुल’ (हम भारत के लोग) की शक्ति को मजबूती से दरसाता है, क्योंकि इस गणतंत्र को सही मायने में शक्ति भारत के आम लोगों से ही मिलती है, इसमे कोई संदेह नहीं कि दो वर्ष पूर्व मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से अब तक विदेशमंत्री सुषमा स्वराज और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सूझबूझ और कूटनीति से पूर्ण प्रयासों के मिश्रित फलस्वरूप भारतीय विदेश नीति (Indian Foreign Policy)को न केवल एक नई ऊंचाई और आयाम प्राप्त हुआ है, बल्कि बतौर वैश्विक इकाई भारत की स्थिति भी विश्व पटल और अधिक मजबूत तथा मुखर हुई है।

आज भारत अपने लोकतांत्रिक मूल्यों को अक्षुण्ण रखते हुए बदलती भू-सामरिक आर्थिकी और ऊर्जा सुरक्षा के त्रिकोण के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वांटम कंप्यूटर जैसे तमाम क्षेत्रों में वैश्विक पटल पर मजबूती से स्थापित हो रहा है। अब यह किसी की स्वीकार्यता का मोहताज नहीं रहा है। चंद्रमा से मंगल तक सफलतम यात्रा के साथ-साथ अंतरिक्ष में पीएसएलवी की सफलतम शतकीय भागीदारी हमें उच्चतर प्रतिमान पर स्थापित करती है |

विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विश्व भर के तमाम छोटे-बड़े देशों की यात्राओं से भारत की ये नवीन वैश्विक छवि गढ़ने में अत्यंत महत्त्वपूर्ण और अभूतपूर्व योगदान रहा है। हालांकि वैश्विक महाशक्ति अमेरिका से तो भारत के सम्बन्ध संप्रग-1 के कार्यकाल के समय से ही एक हद तक गतिशील हो गए थे, लेकिन बावजूद इसके संप्रग के कार्यकाल के अंतिम वर्षों तक उनमे अस्थिरता की स्थिति ही मौजूद रही साथ ही तत्कालीन सम्बंधों में भारत काफी हद तक अमेरिका के समक्ष याचक की भूमिका में ही रहा था। लेकिन मोदी सरकार के इन दो वर्षों में इस वैश्विक महाशक्ति से भारत के सम्बन्ध एकदम नए रूप में उभरकर सामने आते दिख रहे हैं और इसका बड़ा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है, जिन्होंने अपने कार्यकाल में ही अमेरिका की चार यात्राएँ की हैं।

दरअसल, ये यात्राएँ पूर्व प्रधानमंत्रियों की तरह सिर्फ़ व्यापारिक गतिविधियाँ बढ़ाने या भारत को सहायता दिलाने जैसी बातों पर आधारित नहीं रहीं, बल्कि प्रत्येक यात्रा का अपना एक अलग और ठोस महत्त्व रहा है। इस यात्रा के दौरान उन्होंने अमेरिकी संसद को सम्बोधित भी किया, जिसमे उनके द्वारा भारत समेत समूचे विश्व की तमाम चुनौतियों और संभावनाओं तथा इनके बीच भारत-अमेरिका सम्बंधों के महत्त्व को बेहद तार्किक ढंग से रेखांकित किया गया।

आज विश्व के तमाम मंचों पर भारत की खोज निश्चित रूप से होती है। चाहे वह अफगानिस्तान से सम्बंधित रणनीतिक मसला हो या आर्कटिक परिषद की सामरिक बैठक, दक्षिणी और पूर्वी चीन सागर में मुक्त एवं निर्बाध नौवहन हो या पूरे हिंद महासागर को शांति क्षेत्र (जोन ऑफ पीस) स्थापित करने की पहल। यह भारतीय सहयोग ‘कोई बंधन संलग्न नहीं’ जैसे अनूठे मॉडल के जरिये हमारे भागीदार देशों की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के आधार पर काम कर रहा है। इनके अलावा संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद में सुधारों की आवश्यकता हो या विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization) के व्यापार बैठकों में कृषि और बौद्धिक संपदा से जुड़े मसलों पर विकसित देशों की मनमानी और उनके कुत्सित मंसूबों पर पानी फेरना। कृषि सब्सिडी, खाद्य सामग्री की स्टॉक होल्डिंग और पीस क्लाउज जैसे मुद्दों पर विकासशील और अल्प विकसित देशों के व्यापार और वणिज्य से सम्बंधित मसलों और स्वयं सिद्ध हितों पर मुखर रूप से पक्ष रखने में भारत की भूमिका अहम रही है।

ये सभी बातें इस और इंगित करती है की वैश्विक पटल पर भारत की छवि निश्चित ही चमकदार और रौबदार हूई है , यह एक दमदार कूटनीति और विदेश नीति के कारण ही संभव हो पाया है ।

May 25, 2018 0 comment
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Purushottam Maas

शुभ समय के बारे में तो सभी जानते है लेकिन अशुभ समय के बारे में सभी को पता नहीं होता। लेकिन इस अशुभ समय का सभी के जीवन पर समान प्रभाव पड़ता है। ऐसा ही समय फिर प्रारंभ होने वाला है जब ग्रहों की चाल बदलने वाली है और वह समय है पुरुषोत्तम मास (Purushottam Maas) या अधिकमास (Adhik Maas)।

16 मई 2018 बुधवार से ज्येष्ठ महीने में अधिकमास जिसे आम भाषा में मलमास कहा जाता है प्रारंभ हो जाएगा। जिसके बाद सभी मांगलिक और शुभकार्य पूरे मलमास के लिए स्थगित कर दिए जाएंगे। मलमास के महीने को पुरुषोत्तम का महीना भी कहा जाता है इसलिए इसमें सभी को उत्तम से उत्तम धार्मिक कार्य करने चाहिए ।

हमारे भारतीय पंचांग की (खगोलीय गणना) के अनुसार प्रत्येक तीसरे वर्ष एक अधिक मास होता है। यह सौर और चंद्र मास को एक समान लाने की गणितीय प्रक्रिया है। शास्त्रों के अनुसार पुरुषोत्तम मास (Purushottam Maas) में किए गए जप, तप, दान से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है। सूर्य की बारह संक्रांति होती हैं और इसी आधार पर हमारे चंद्र पर आधारित 12 माह होते हैं। हर तीन वर्ष के अंतराल पर अधिक मास या मलमास आता है।

शास्त्रों के अनुसार जिस माह में सूर्य संक्रांति नहीं होती वह अधिक मास होता है। इसी प्रकार जिस माह में दो सूर्य संक्रांति होती है वह क्षय मास कहलाता है।

हिन्दू धर्म में इन दोनों ही मासों में मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते है, परंतु धर्म-कर्म के कार्य पुण्य फलदायी होते हैं। सौर वर्ष 365.2422 दिन का होता है जबकि चंद्र वर्ष 354.327 दिन का होता है। इस तरह दोनों के कैलेंडर वर्ष में 10.87 दिन का फ़र्क़ आ जाता है और तीन वर्ष में यह अंतर 1 माह का हो जाता है। इस असमानता को दूर करने के लिए अधिक मास एवं क्षय मास का नियम बनाया गया है।

इस माह में व्रत, दान, पूजा, हवन, ध्यान करने से पाप कर्म समाप्त हो जाते हैं और किए गए पुण्यों का फल कई गुणा प्राप्त होता है। देवी भागवत पुराण के अनुसार मल मास में किए गये सभी शुभ कर्मो का अनंत गुना फल प्राप्त होता है। इस माह में भागवत कथा श्रवण की भी विशेष महत्ता है। पुरुषोत्तम मास में तीर्थ स्थलों पर स्नान का भी महत्त्व है।

अधिक मास अपने स्वामी के ना होने पर विष्णुलोक पहुंचे और भगवान श्रीहरि से अनुरोध किया कि सभी माह अपने स्वामियों के आधिपत्य में हैं और उनसे प्राप्त अधिकारों के कारण वे स्वतंत्र एवं निर्भय रहते हैं। एक मैं ही भाग्यहीन हूँ जिसका कोई स्वामी नहीं है, अत: हे प्रभु मुझे इस पीड़ा से मुक्ति दिलाइए | अधिक मास की प्रार्थना को सुनकर श्री हरि ने कहा ‘हे मलमास मेरे अंदर जितने भी सद्गुण हैं वह मैं तुम्हें प्रदान कर रहा हूँ और मेरा विख्यात नाम’ पुरुषोत्तम’मैं तुम्हें दे रहा हूँ और तुम्हारा मैं ही स्वामी हूँ।’ तभी से मलमास का नाम पुरुषोत्तम मास (Purushottam Maas) हो गया और भगवान श्री हरि की कृपा से ही इस मास में भगवान का कीर्तन, भजन, दान-पुण्य करने वाले मृत्यु के पश्चात श्री हरि धाम को प्राप्त होते हैं।

पवित्र स्थान पर अक्षत से अष्ट दल बनाकर जल का कलश स्थापित करना चाहिए | भगवान श्री राधा-कृष्ण की प्रतिमा रखकर पोडरा विधि से पूजन करें और कथा श्रवण की जाए. संध्या समय दीपदान करना चाहिए | माह के अंत में धातु के पात्र में 30 की संख्या में मिष्ठान्न रखकर दान किया जाए.

पुरुषोत्तम मास (Purushottam Maas) में भक्त भाँति-भाँति का दान करके पुण्य फल प्राप्त करते हैं। मंदिरों में कथा-पुराण के आयोजन किए जाते हैं। दिवंगतों की शांति और कल्याण के लिए पूरे माह जल सेवा करने का संकल्प लिया जाता है। मिट्टी के कलश में जल भर कर दान किया जाता है। खरबूजा, आम, तरबूज सहित अन्य मौसमी फलों का दान करना चाहिए. माह में स्नान कर विधिपूर्वक पूजन-अर्चन कथा श्रवण करना चाहिए ।

May 17, 2018 0 comment
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