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हमारे देश में टैलेंट की कमी नहीं है। आए दिन हमें कुछ न कुछ ऐसी चीजें देखने को मिल ही जाती है, जिसके बारे में हम कभी भी कल्पना भी नहीं कर सकते। इसमें कोई संदेह नहीं कि इंटरनेट ने हमारे जीवन शैली में बहुत बड़ा प्रभाव डाला है। एक लड़का (Kaalu Guide) जिसने कभी स्कूल का मुंह तक नहीं देखा और जो पढ़ना-लिखना बिलकुल भी नहीं जानता है लेकिन वह अगर सात देशों की भाषाएं न सिर्फ़ बोले बल्कि उन देशों से आने वालों को भारतीय इतिहास बताए तो शायद आपको यकीन नहीं होगा।

वाकय में ऐसा एक लड़का (Kaalu Guide) ग्वालियर में है जिसने तालीम तो हासिल नहीं की, लेकिन सात देशों की भाषा का जानकार है और विदेशी सैलानियों को ग्वालियर किले सहित देश के इतिहास की जानकारी उन्ही की भाषा में सुनाता है।  हालांकि इसकी शक्ल देखकर आप यह अंदाजा भी नहीं लगा सकते कि यह लड़का जिसका नाम कालू (Kaalu Guide) है, वह विदेशी भाषाओं में बात कर सकता है।

अमेजिंग वीडियोस नामक एक यू-ट्यूब चैनल द्वारा अपलोड किया गया यह वीडियो इन दिनों काफी वायरल हो रहा है | इस वीडियो में कालू का एक इंटरव्यू दिखाया गया है, जो 7 भाषाओं में बात कर सकता है | दरअसल, यह कालू नाम का लड़का ग्वालियर फोर्ट की कहानियों को अंग्रेजी, स्पेनिश और इटालियन सहित 6 भाषाओं में सुना सकता  है ।

कालू के अनुसार वह ग्वालियर फोर्ट के बारे में बहुत ही अच्छे से जानता है और वह वहां का लोकल लड़का है  वह कहता है कि वह सिर्फ ग्वालियर फोर्ट ही नहीं बल्कि दिल्ली, चेन्नई और बेंगलुरु भी विजिट कर चुका है ।

हालांकि वीडियो में यह नहीं बताया गया है कि इसने ये भाषाएं कहां से सीखी है, लेकिन यह अनुमान लगाया जा सकता है कि एक गाइड के रूप में नजर आ रहे इस लड़के को टूरिस्टों के माध्यम से ही इन भाषाओं की ज्ञान हुई होगी ।

December 2, 2017 0 comment
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Taj Mahal

आगरा का Taj Mahal भारत की शान और प्रेम का प्रतीक चिह्न माना जाता है। उत्तरप्रदेश का तीसरा बड़ा जिला आगरा ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्त्वपूर्ण है। मुगलों का सबसे पसंदीदा शहर होने के कारण ही उन्होंने ‍दिल्ली से पहले आगरा को अपनी राजधानी बनाया। इतिहास के अनुसार इब्राहिम लोदी ने इस शहर को सन् 1504 में बसाया था। जिस समय इस शहर की स्थापना की गई, उस समय किसी ने यह कल्पना नहीं की होगी कि यह शहर पूरे विश्व में अपनी खूबसूरती के लिए परचम लहराएगा। जिसे आज भी दुनिया के सात अजूबों में शुमार किया जाता है।

Taj Mahal का इतिहास स्थापत्य कला की जीती-जागती तस्वीर आगरा शहर दिल्ली से करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जिसे बनाने के लिए बगदाद से एक कारीगर बुलवाया गया जो पत्थर पर घुमावदार अक्षरों को तराश सकता था। इसी तरह बुखारा शहर, जो मध्य एशिया में स्थित हैं, वहाँ से जिस कारीगर को बुलवाया गया वह संगमरमर के पत्थर पर फूलों को तराशने में दक्ष था। विराट कद के गुंबदों का निर्माण करने के लिए तुर्की के इस्तम्बुल में रहने वाले दक्ष कारीगर बुलाया गया तथा मिनारों का निर्माण करने के लिए समरकंद से दक्ष कारीगर को बुलवाया गया।

इस प्रकार Taj Mahal के निर्माण से पूर्व छ: महीनों में कुशल कारीगरों को तराश कर उनमें से 37 दक्ष कारीगर इकट्ठे किए गए, जिनके देखरेख में बीस हजार मजदूरों के साथ कार्य किया गया। इसी प्रकार ताज निर्माण में लगाई गई सामग्री संगमरमर पत्थर राजस्थान के मकराणा से, अन्य कई प्रकार के कीमती पत्थर एवं रत्न बगदाद, अफगानिस्तान, तिब्बत, इजिप्त, रूस, ईरान आदि कई देशों से इकट्‍ठा कर उन्हें भारी कीमतों पर खरीद कर ताजमहल का निर्माण करवाया गया।

ई. 1630 में शुरू हुआ इसका निर्माण कार्य करीब 22 वर्षों में पूर्ण हुआ, जिसमें लगभग बीस हजार मजदूरों का योगदान माना जाता है। इसका मुख्य गुंबद 60 फीट ऊंचा और 80 फीट चौड़ा है।

मुगल बादशाह की मुहब्बत और शिद्दत का परिणाम ही है, ‘ताजमहल’ जिसे खूबसूरती का नायाब हीरा ही कहा जाता है। गुंबदनुमा इस इमारत को जब आप सिर उठाकर ऊपर देखते हैं तो इसकी नक्काशीदार छतें और दीवारें किसी आश्चर्य से कभी भी कम नहीं लगतीं। इसका यह इतिहास तो बच्चे-बड़े सभी की जुबान पर है कि मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी दूसरी पत्नी मुमताज महल की याद में ताजमहल का निर्माण करवाया था।

यमुना नदी के किनारे सफेद पत्थरों से निर्मित अलौकिक सुंदरता की तस्वीर ‘Taj Mahal‘ न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में अपनी पहचान बना चुका है। प्यार की इस निशानी को देखने के लिए दूर देशों से हजारों सैलानी यहाँ आते हैं। दूधिया चांदनी में नहा रहे ताजमहल की खूबसूरती को निहारने के बाद आप कितनी भी उपमाएं दें, वह सारी फीकी ही लगती हैं। बच्चे-बड़े सभी की जुबान पर है कि मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी दूसरी पत्नी मुमताज महल की याद में ताजमहल का निर्माण करवाया था।

आगरा फोर्ट (रेड फोर्ट) । आगरा फोर्ट यहाँ के महत्‍वपूर्ण इमारतों में से एक मणि गई है। इसका निर्माण ई. 1565 में मुगल सम्राट अकबर ने करवाया था। स्थापत्य कला का यह बेजोड़ नमूना लाल पत्थरों से निर्मित हैं। इसमें जहांगीर महल (दीवाने-ए-खास) भी बना है, जो खूबसूरत शी‍शमहल के रूप में प्रचलित है। फतेहपुर सीकरी। आगरा से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित इस स्थान को अकबर ने अपनी राजधानी बनाया था, जो स्थापत्य की बेजोड़ कलाओं से परिपूर्ण है। मेहताब बाग। यमुना नदी की विपरीत दिशा में ताजमहल’ के पास ही बना हुआ है मेहताब बाग। कई तरह के फूलों और अनेक पेड़-पौधों से सुसज्जित होने के कारण विदेशी‍ सैला‍नियों को काफी लुभाता है। रामबाग। रामबाग को बाबर ने 1528 ई. में बनवाया था। यह Taj Mahal के उत्तरी भाग में ढाई किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसे मुगलों द्वारा निर्मि‍त सबसे पुराने बागों में से एक माना जाता है। जामा मस्जिद। शाहजहां की बेटी जहांआरा बेगम की याद में सन् 1648 ई. में बनाई गई थी यह जामा मस्जिद। बड़ी ही खूबसूरती से इसके गुंबद भी तराशे गए हैं। इतने वर्षों बाद भी इसकी खूबसूरती जस-की-तस बनी हुई है।

मुमताज महल और शाहजहां की कब्र ताजमहल के निचले हिस्से में आमने-सामने बनी हुई है। आज भी आगरा शहर देशी-विदेशी सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। खूबसूरत स्थापत्य कला में निर्मित होने की वजह यहाँ गर्मी हो या ठंड, हर मौसम में पर्यटकों की भीड़ देखी जा सकती है। पर्यटन विभाग की ओर से प्रतिवर्ष ‘ताज महोत्सव’ का आयोजन किया जाता है।

October 27, 2017 0 comment
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Manglik

जैसा की जानकारों ने कहा है की कुम्भ विवाह का सीधा सम्बन्ध Manglik योग से है। यदि मंगल जन्मकुंडली में 1, 4, 7, 8, 12वें स्थान में बैठा हो तो मंगल की दृष्टि कुंडली के सातवें घर पर पड़ती है। सातवाँ घर कुंडली में पत्नी या जीवनसाथी का होता है। मनुष्य के विवाह के लिए सातवें घर की स्थिति का आकलन किया जाता है। यदि मंगल का प्रभाव या स्थिति सातवें घर पर हो तो कुंडली में मांगलिक योग बनता है। यह योग चालीस प्रतिशत लोगों की कुंडलियों में मिल जाएगा और इसमें मंगल की क्षमता का गहराई से अध्ययन करने के बाद ही पता चलता है कि मांगलिक योग है या नहीं। और यह काम ज्तोतिष का जानकर ही कर सकता है। इस तरह से देखा जाए तो मांगलिक का प्रतिशत चालीस प्रतिशत से सीधा दस या बारह प्रतिशत पर आ जाएगा। इनमे से भी जो लोग बहुत ज़्यादा हद तक मंगल के बुरे प्रभाव से पीड़ित हैं या जिनका पहला विवाह Manglik Dosha या किसी अन्य योग के कारण टूटने का योग हो उन्हें ही कुम्भ विवाह की सलाह दी जाती है।

कुछ जानकर पंडितो के अनुसार अगर वर-वधु की उमर अगर 30 वर्ष से अधिक हो या जिस स्थान पर वर या वधु का मंगल स्थित हो उसी स्थान पर दुसरे के कुंडली में शनि-राहु-केतु या सूर्य हो तो भी मंगल-दोष विचारनीय नहीं रह जाता अगर दूसरी कुंडली मंगल-दोषयुक्त न भी हो तो। या वर-वधु के गुण-मिलान में गुंणों की संख्या ३० से उपर आती है तो भी Mangal Dosha विचारनीय नहीं रह जाता है।

जानकारों के अनुसार कुम्भ विवाह करने के पीछे बहुत ही औचित्य पूर्ण तर्क मिलता है कि यदि किसी कन्या की दो शादियों का योग हो तो शादी से पहले विधि विधान से जिस प्रकार किसी व्यक्ति के साथ विवाह किया जाता है उसी प्रकार निर्जीव वस्तु यानी घड़े से विवाह कराकर उस घड़े को तोड़ दिया जाता है | इस तरह से कन्या की जब शादी होगी तो उसे पहली न मानकर दूसरी शादी माना जाएगा |

जानकारों की यदि माने तो Kumbh Vivah किसे करना चाहिए या किसे नहीं करना चाहिए यह जानना भी आवश्यक है क्योंकि ऐसे कितने ही झोलाछाप पंडित भी हैं जो अधकचरे ज्ञान के चलते केवल यह देखकर कि लड़की Manglik है कुम्भ विवाह की सलाह दे देते हैं। वे नहीं जानते की अपने थोड़े से पैसों के लाभ के लिए जो लोग ऐसा करते हैं उसका ख़ामियाज़ा किसी मासूम को भुगतना पड़ सकता है। कुम्भ विवाह भी वास्तव में विवाह ही है और इसके बाद होने वाले विवाह को कुंडली के दूसरे घर से देखा जाएगा। यदि सभी Manglik लोगों का कुम्भ विवाह ज़रूरी है तो तलाक या पुनर्विवाह के मामले कम से कम चालीस प्रतिशत केवल मांगलिक लोगों की वजह से होते। इसलिए केवल मांगलिक देखकर जो लोग अनाप शनाप भविष्यवाणी करते हैं उनसे बचना चाहिए | Kumbh Vivah तभी करना चाहिए जब दो विवाह का योग कुंडली में बना रहा हो। नीचे दी गई कुंडली में Kumbh Vivah की सलाह दी जा सकती है।

सबसे पहली बात तो यह है कि उपर्युक्त कुंडली में जातिका मांगलिक नहीं है। इसमें शुक्र और शनी सातवें घर में काफी अच्छे होते हैं परन्तु एक साथ नहीं। इस कुंडली में दो विवाह का योग है जिसकी वजह यह है कि शुक्र चित्र नक्षत्र में है जो कि मंगल का है। मंगल इस कुंडली में छठे स्थान से सम्बन्ध रखता है। छठे स्थान से सातवें स्थान का सम्बन्ध ही पहले विवाह को असफल करना के लिए काफी है। शनि भी स्वाति नक्षत्र में है जो कि राहू का है। इस तरह सातवें घर का सम्बन्ध मंगल, राहू और शनि से है। शनि इस कुंडली में उतना बुरा प्रभाव नहीं रखता है क्योंकि उच्च राशि में है इसलिए मंगल और राहू से दो विवाह का योग बनता है।

इसके आलावा अर्क विवाह या वट विवाह का भी वही उद्देश्य होता है जो कुम्भ विवाह का है। स्थान और देश के अनुसार सब जगह अपनी-अपनी तरह से लोग Kumbh Vivah या अर्क विवाह करते हैं। वट वृक्ष से विवाह करवाना वट विवाह कहलाता है। आक का पौधा होता है आक के पौधे से विवाह अर्क विवाह कहलाता है और भी कई चीजें हो सकती हैं परन्तु उपर्युक्त जो कुछ मुझे ज्ञात है मैंने वही लिखा है। अर्क का पौधा शनि से सम्बन्धित है जहाँ शादी में देर के लिए शनी जिम्मेदार हो वहाँ अर्क विवाह किया जा सकता है। मंगल के लिए कुम्भ विवाह ही होता है। यदि कन्या की कुंडली में वैधव्य योग हो तो उत्तर भारत में विष्णु की प्रतिमा से विवाह किया जाता है।

जातक को  यदि जरूरी हो तो Kumbh Vivah, अर्क विवाह या वट विवाह जो भी कहा गया है करवाने में कोई नुक्सान नहीं है | यह क्रिया पूर्ण  श्रद्धा और विशवास के साथ ही की जानी चाहिए |  जंहा तक  हो सके इस क्रिया को गुप्त रूप से करना चाहिए | यदि लड़की के मामा की मदद ली जाए तो बहुत ही  उत्तम  है | वट विवाह, पीपल विवाह आदि से बचना चाहिए क्योंकि कहते हैं  वृक्षों पर ऊपरी   शक्तियों का प्रकोप हो सकता है |

हमारे पाठको  की जानकारी के लिए  उक्त समस्त जानकरी का हमने संकलन मात्र  किया है, हम  कोई ज्योतिष या पंडित नहीं है । अतः इस प्रकार  की  कोई समस्या के लिए आप किसी अच्छे जानकार की सलाह और निर्देशन में ही कोई कार्य करे तो बेहतर होगा ।

October 14, 2017 0 comment
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शमी

हिंदू सभ्यता में मान्यता है कि कुछ पेड़-पौधों को घर में लगाने या उनकी उपासना करने से घर में हमेशा  खुशहाली रहती है या घर में सदैव लक्ष्मी का वास रहता है। पीपल, केला और शमी का वृक्ष आदि ऐसे पेड़ हैं जो घर में समृद्धि प्रदान करते हैं। इसी तरह मान्यता है कि शमी का पेड़ घर में लगाने से देवी-देवताओं की कृपा अनवरत  बनी रहती है।

शमी के पेड़ की पूजा करने से घर में शनि देव का प्रकोप कम होता है। यूं तो शास्त्रों में शनि के प्रकोप को कम करने के लिए कई उपाय बताएं गए हैं। लेकिन इन सभी उपायों में से प्रमुख उपाय है शमी के पेड़ की पूजा सर्वोत्तम है। घर में शमी का पौधा लगाकर पूजा करने से आपके कामों में आने वाली समस्त रुकावट दूर होगी।

शमी वृक्ष की लकड़ी को यज्ञ की वेदी के लिए बहुत ही पवित्र माना जाता है। शनिवार को करने वाले यज्ञ में शमी की लकड़ी से बनी वेदी का विशेष महत्त्व है। एक मान्यता के अनुसार कवि कालिदास को शमी के वृक्ष के नीचे बैठकर तपस्या करने से ही ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।

उत्तर भारत के बिहार और झारखंड में सुबह के समय उठने के बाद शमी के वृक्ष के दर्शन को बहुत ही शुभ माना जाता है। बिहार और झारखंड में यह वृक्ष अधिकतर घरों के दरवाजे के बाहर लगा हुआ मिलता है। ताकि लोग किसी भी काम पर जाने से पहले इसके दर्शन करते और इसे माथे से लगाते हैं, ऐसे करने से उन्हें उस काम में कामयाबी मिलती है।

पीपल और शमी दो ऐसे वृक्ष हैं, जिन पर शनि का प्रभाव होता है। पीपल का वृक्ष बहुत बड़ा होता है, इसलिए इसे घर में लगाना संभव नहीं हो पाता। वास्तु शास्त्र के मुताबिक नियमित रूप से शमी की पूजा करने और उसके नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि दोष और उसके कुप्रभावों से बचा जा सकता है।

दशहरे पर खास तौर से सोना-चांदी के रूप में बांटी जाने वाली शमी की पत्त‍ियां, जिन्हें सफेद कीकर, खेजडो, समडी, शाई, बाबली, बली, चेत्त आदि भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म की परंपरा में शामिल है। आयुर्वेद में भी शमी के वृक्ष का काफी महत्त्व बताया गया है।

शस्त्र पूजन

क्षत्रियों का यह बहुत बड़ा पर्व है। इस दिन ब्राह्मण सरस्वती पूजन और क्षत्रिय शस्त्र पूजन करते हैं।

आश्विन शुक्ल पक्ष दशमी को शस्त्र पूजन का विधान है। 9 दिनों की शक्ति उपासना के बाद 10वें दिन जीवन के हर क्षेत्र में विजय की कामना के साथ चंद्रिका का स्मरण करते हुए शस्त्रों का पूजन करना चाहिए. विजयादशमी के शुभ अवसर पर शक्तिरूपा दुर्गा, काली की आराधना के साथ-साथ शस्त्र पूजा की परंपरा भी है।

हमारे देश में विजयादशमी पर शस्त्र पूजा की परंपरा काफी पुरानी है। कहते हैं कि हजारों साल से चली आ रही इस परंपरा का निर्वाह समाज की रक्षा के लिए किया जाता है।

महाराष्ट्र  के नीलोखेडी का पूजम गांव महाभारत की यादें समेटे हुए है। यह  वही  ऐतिहासिक गांव है जहां महाभारत युद्ध से पहले पांडवों ने कौरवों पर विजय हासिल करने के लिए शस्त्रों की पूजा की थी। इसी पूजा से ही इस स्थान का नामकरण पूजम हुआ।

महाभारत काल की स्मृतियों से जुडा होने के कारण गांव के मंदिर में स्थापित शिवलिंग के प्रति लोगों की गहरी आस्था है। यहां पर प्राचीन तालाब ने आधुनिक रूप ले लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस गांव की धरती पर कुरुक्षेत्र में कौरवों और पांडवों का युद्ध शुरू होने से पहले पांडवों ने शस्त्रों की पूजा की थी।

शस्त्र पूजन की परंपरा का आयोजन रियासतों में आज भी बहुत धूमधाम के साथ होता है। राजा विक्रमादित्य ने दशहरा के दिन देवी हरसिद्धि की आराधना की थी। क्षत्रपति शिवाजी ने भी इसी दिन देवी दुर्गा को प्रसन्न करके भवानी तलवार प्राप्त की थी और एक स्वतंत्र हिन्दू राज्य की स्थापना की थी। राजपूतों में सीमोल्लंघन प्रथा प्रचलित थी। हमारे देश में सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षाबल जिनके पास भी हथियार होते हैं, उनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है।

भारतीय सेना में कार्यरत राजपूत, जाट, मराठा, कुमाऊं और गोरखा रेजिमेंट्स में आज भी शस्त्र पूजन धूमधाम से किया जाता है।

* दशहरा पर्व के अवसर पर अपने शस्त्र को पूजने से पहले सावधानी बरतना न भूलें। हथियार के प्रति जरा-सी लापरवाही बड़ी भूल साबित हो सकती है।

* घर में रखे अस्त्र-शस्त्र को अपने बच्चों एवं नाबालिगों की पहुंच से दूर रखें। घर में हथियार तक पहुंच किसी भी स्थिति में न हो।

* हथियार को खिलौना समझने की भूल करने वालों के दुर्घटना के शिकार होने के कई मामले सामने आ चुके हैं।

* सबसे अहम यही है कि पूजा के दौरान बच्चों को हथियार न छूने दें और किसी भी तरह का प्रोत्साहन बच्चों को न मिले।

हथियार खतरनाक होते हैं इसलिए इनकी साफ-सफाई में बेहद सावधानी की ज़रूरत होती है। 12 बोर और पिस्टल में सतर्कता रखनी पड़ती है। अपने-अपने घरों में जो भी हथियार साफ करें, बिलकुल संभलकर करें।

हमारे सभी पाठको को  विजया दशमी बहुत बहुत की शुभ कामनाएं

September 30, 2017 0 comment
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Nidhivan

आइये आज हम देखतें है भारत के कुछ रहस्यमय स्थानो को जिन्हे जानकर आप भी दांतो तले ऊँगली दबाने को मजबर हो जायेंगे।

कमरुनाग झील

सबसे पहले हम आपको एक ऐसी झील के बारे में बताने जा रहे है जिसके बारे में कहा जाता है कि उसमे अरबो रुपए का खजाना दफन है, हिमाचल प्रदेश के पहाड़ो में स्थित kamrunag lake पुरे साल में 14 और 15 जून को यानी देसी महीने के हिसाब से एक तारीख और हिमाचली भाषा में साजा, गर्मियों के इन दो दिनों में बाबा कमरुनाग पूरी दुनिया को दर्शन देते है। इसलिए लोगों का यहाँ जन सेलाव पहले ही उमड पड़ता है। क्योंकि बाबा घाटी के सबसे बड़े देवता हैं और हर मन्नत पुरी करते हैं। हिमाचल प्रदेश के मण्डी से लगभग 60 किलोमीटर दूर आता है रोहांडा, यहीं से पैदल यात्रा शुरु होती है। कठिन पहाड़ चड़कर घने जंगल से होकर गुजरना पड़ता है। इस तरह लगभग 8 किलोमीटर चलना पड़ता है।

मंदिर के नजदीक ही बड़ी एक झील है, जिसे kamrunag lake के नाम से जाना जाता है। यहाँ पर लगने वाले मेले में हर साल भक्तों की काफी भीड़ जुटती है और पुरानी मान्यताओं के अनुसार भक्त झील में सोने-चांदी के गहनें तथा पैसे डालते हैं। सदियों से चली आ रही इस परम्परा के आधार पर यह माना जाता है कि इस झील के गर्त में अरबों का खजाना दबा पड़ा है।

कमरुनाग जी का नाम महाभारत में भी आता है। इन्हें बबरुभान जी के नाम से भी जाना जाता था। ये धरती के सबसे शक्तिशाली योद्या थे। लेकिन कृष्ण की नीति से हार गए | इन्होने कहा था कि कोरवों और पांडवों का युद्ध देखेंगे और जो सेना हारने लगेगी में उसका साथ दुंगा। लेकिन यंहा पर भगवान् कृष्ण स्वयं भी डर गए कि इस तरह अगर इन्होने कोरवों का साथ दे दिया तो पाण्डव जीत नहीं पायेंगे। कृष्ण जी ने एक शर्त लगा कर इन्हे हरा दिया और बदले में इनका सिर मांग लिया। लेकिन कमरुनाग जी ने एक खवाइश जाहिर की कि वे महाभारत का युद्ध देखेंगे। इसलिए भगवान् कृष्ण ने इनके काटे हुए सिर को हिमालय के एक उंचे शिखर पर पहुंचा दिया। लेकिन जिस तर्फ इनका सिर घूमता वह सेना जीत की ओर बढ्ने लगती। तब भगवान कृष्ण जी ने सिर को एक पत्थर से बाँध कर इन्हे पांडवों की तरफ घुमा दिया। इन्हें पानी की दिक्कत न हो इसलिए भीम ने यहाँ अपनी हथेली को गाड कर एक झील बना दी।

ऐसी मान्यता है कि यहाँ से कोई भी इस खज़ाने को चुरा नहीं सकता। क्योंकि माना जाता है कि कमरुनाग के खामोश प्रहरी इसकी रक्षा करते हैं। एक नाग की तरह दिखने बाला पेड इस पहाड के चारों ओर है। जिसके बारे में कहते हैं कि ये नाग देवता अपने असली रूप में आ जाता है। अगर कोई इस झील के खजाने को हाथ भी लगाए ।  अतः कोई भी इस खजाने को हथियाने के बारे में व्यर्थ में न विचार करें।

रहस्यमयी और अलौकिक निधिवन

भारत में कई ऐसी जगह है जो अपने दामन में अनेको रहस्यों को समेटे हुए है ऐसी ही एक जगह है वृंदावन में स्थित Nidhivan जिसके बारे में मान्यता है कि यहाँ आज भी हर रात कृष्ण-गोपियों संग रास रचाते है। यही कारण है कि सुबह खुलने वाले Nidhivan को संध्या आरती के पश्चात बंद कर दिया जाता है। उसके बाद वहाँ कोई नहीं रहता है यहाँ तक की निधिवन में दिन में रहने वाले पशु-पक्षी भी संध्या होते ही निधि वन को छोड़कर चले जाते है।

जो भी छुप कर देखता है रासलीला हो जाता है पागल

वैसे तो रोज शाम होते ही Nidhivan बंद हो जाता है और सब लोग यहाँ से चले जाते है। लेकिन फिर भी यदि कोई छुपकर रासलीला देखने की कोशिश करता है तो वह पागल हो जाता है। ऐसा ही एक वाक़या करीब 10 वर्ष पूर्व हुआ था जब जयपुर से आया एक कृष्ण भक्त रास लीला देखने के लिए Nidhivan में छुपकर बैठ गया था। जब सुबह निधि वन के गेट खुले तो वह बेहोश अवस्था में मिला, उसका मानसिक संतुलन बिगड़ चूका था वह पागल हो चूका था। ऐसे अनेक किस्से यहाँ के लोग बताते है। ऐसे ही एक अन्य वयक्ति थे पागल बाबा जिनकी समाधि भी निधि वन में बनी हुई है। उनके बारे में भी कहा जाता है कि उन्होंने भी एक बार निधि वन में छुपकर रास लीला देखने की कोशिश की थी। जिससे की वह पागल हो गए थे। चुकी वह कृष्ण के अनन्य भक्त थे इसलिए उनकी मृत्यु के पश्चात मंदिर कमेटी ने निधि वन में ही उनकी समाधि बनवा दी।

निधि वन के अंदर ही है ‘रंग महल’ है जिसके बारे में मान्यता है कि रोज़ रात यहाँ पर राधा और कन्हैया आते है। रंग महल में राधा और कन्हैया के लिए रखे गए चंदन की पलंग को शाम सात बजे के पहले सजा दिया जाता है। पलंग के बगल में एक लोटा पानी, राधाजी के शृंगार का सामान और दातुन संग पान रख दिया जाता है। आपको जानकर आश्चर्य होगा की सुबह पांच बजे जब ‘रंग महल’ का पट खुलता है तो बिस्तर अस्त-व्यस्त, लोटे का पानी खाली, दातुन कुची हुई और पान खाया हुआ मिलता है। रंगमहल में भक्त केवल शृंगार का सामान ही चढ़ाते है और प्रसाद स्वरुप उन्हें भी शृंगार का सामान मिलता है।

Nidhivan के पेड़ भी बड़े अजीब है जहाँ हर पेड़ की शाखाएं ऊपर की और बढ़ती है वही Nidhivan के पेड़ो की शाखाएं नीचे की और बढ़ती है। हालात यह है कि रास्ता बनाने के लिए इन पेड़ों को डंडों के सहारे रोक गया है।

Nidhivan की एक अन्य खासियत है यहाँ के तुलसी के पेड़ है। Nidhivan में तुलसी का हर पेड़ जोड़े में है। इसके पीछे यह मान्यता है कि जब राधा संग कृष्ण वन में रास रचाते हैं तब यही जोड़ेदार पेड़ गोपियां बन जाती हैं। जैसे ही सुबह होती है तो सब फिर तुलसी के पेड़ में बदल जाती हैं। साथ ही एक अन्य मान्यता यह भी है कि इस वन में लगे जोड़े की वन तुलसी की कोई भी एक डंडी नहीं ले जा सकता है। लोग बताते हैं कि‍ जो लोग भी ले गए वह किसी न किसी आपदा का शिकार हो गए । इसलिए कोई भी इन्हें नहीं छूता।

Nidhivan में ही बंसी चोर राधा रानी का बहुत ही सुंदर मंदिर भी है। यहाँ के महंत लोग बताते हैं कि जब राधा जी को लगने लगा कि कन्हैया हर समय बंसी ही बजाते रहते हैं, उनकी तरफ ध्यान नहीं देते, तो उन्होंने कान्हा की बंसी चुरा ली थी। इस मंदिर में कृष्ण जी की सबसे प्रिय गोपी ललिता जी की भी मूर्ति राधा जी के साथ है।

Nidhivan में स्थित विशाखा कुंड के बारे में कहा जाता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण सखियों के साथ रास रचा रहे थे, तभी एक सखी विशाखा को प्यास लगी। कोई व्यवस्था न देख कृष्ण ने अपनी बंसी से इस कुंड की खुदाई कर दी, जिसमें से निकले पानी को पीकर विशाखा सखी ने अपनी प्यास बुझायी। इस कुंड का नाम तभी से विशाखा कुंड पड़ गया।

विशाखा कुंड के पास ही ठाकुर बिहारी जी महाराज का प्राकट्य स्थल भी है। ऐसा कहा जाता है कि संगीत सम्राट एवं धु्रपद के जनक स्वामी हरिदास जी महाराज ने अपने स्वरचित पदों का वीणा के माध्यम से मधुर गायन करते थे, जिसमें स्वामी जी इस प्रकार तन्मय हो जाते कि उन्हें अपने तन-मन की सुध नहीं रहती थी। बांके बिहारी जी ने उनके भक्ति संगीत से प्रसन्न होकर उन्हें एक दिन स्वप्न दिया और बताया कि मैं तो तुम्हारी साधना स्थली में ही विशाखा कुंड के समीप जमीन में छिपा हुआ हूँ। स्वप्न के आधार पर हरिदास जी ने अपने शिष्यों की सहायता से बिहारी जी को वहा से निकलवाया और उनकी सेवा पूजा करने लगे। ठाकुर बिहारी जी का प्राकट्य स्थल आज भी उसी स्थान पर बना हुआ है।

समयाभाव के कारन हम आपको आज ये दो रहस्मय स्थान ही दिखा पा रहे है  हम अपने अगले ब्लॉग में बाकी के रहस्मय स्थानो का वर्णन करेंगे ।

September 29, 2017 0 comment
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Situated in Bermuda, South Florida and Puerto Rico, Bermuda swath is named as ghost area. A triangular deadly swath make disappearance of people, ships and air-crafts. Human or man-made matter become out of control when passed near or from above ghost region. All disappear in between air or under the water in the region.

Mystery place is situated in the Western side of North Atlantic Ocean, enclosed with Bermuda Island to Miami (South Florida) and San Juan (Puerto Rico). The area is well known for disappearance of human, air-crafts or ship’s existence and covers sea area 440,000 miles. Many ships and planes and people traveling along not found in life span of the last hundred years.

People still love to live in the nearby cities and well known to the happenings. They hear the news of missing yachts, but hardly anyone came back to say he has come alive from deadly triangle. Most supernatural happening are in between Puerto Rico and Florida, but the effect can be seen outside of the area too.

Scientist have been researching to solve the mystery since they came up with its existence. Hardly a single can say that one has come alive from there. Scientist found existing matter in the deadly region as human error, pilot disorientation, undefined weather, magnetic fields, north Atlantic Ocean, UFOs, aliens, methane hydrates, pirates and submerge of 11 thousand year old comet. It is the only region on the earth where compass not points towards North.

Well known name, Christopher Columbus, wrote in his journal, found that watercraft compass stops responding, lightnings and fireballs come from the sky. One sense to turn back from the route of the deep sea.

Research findings say terrestrial aliens had vanished, but US navy is in no condition to believe in mysterious region. US government made Atlantic Undersea Test and Evaluation Center at Andros Island for testing the regional mystery.

The biggest accident happened in 1945, when five US Navy Avenger torpedo bombers took flight over the region to Bimini island and get vanish only after when they alert to the controller of misleading compass. The rescued team of 3 crafts also not able to provide alive or deadly news.

Research says, it happens due to formation of electronic charged hexagonal clouds. According to Dr Steve Miller, a satellite meteorologist, clouds found in the area are of random formation.Scientifically testing of satellite images states, air flows with 170 miles per hour between clouds and the sea in the region. It generates air bombs to make waves of 45 feet high. Speed and the waves are more then what make ships and air-crafts to drown. Gulf stream flows from near the region, which eliminates craters with its flow.

According to the Indian mythology, Rig Veda, planet Mars born from the Earth. Separation made injury in the triangular region. It too defines the fact for the inclination of the Earth by 23 and half degree that too similar to the inclination of triangular swath. Triangular injury named Bermuda Triangle as it situated near Bermuda. Due to injury, a lot of iron deposited in the region and makes fact of disappearance of objects.

Last year in Serbia, several craters were discovered. Examination of craters found large holes on the ground surface of the ships. The holes might be created due to release of gas in the process of methane hydrates. Large amount of gas breaks into small bubbles on and over the sea. These small bubbles are very large in size and shape. It pushes the ship up and ship comes down due to gravitation. It comes out to be the reason for missing of air and water vessels in the region.

Scientists and Sailors synthesized the detective tale with scientific, natural and geographical reasons and found such interesting facts to decode the ghostly tale. The mystery of drowning ship has solved to a limit, but what makes airplanes to vanish is still a mystery unknown.

April 28, 2017 0 comment
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