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एनडीए द्वारा राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार की घोषणा

written by Aniket Gujrathi June 22, 2017

लम्बे समय से चल रही राष्ट्रपति उम्मीदवार के नाम कि अटकलों को दूर करते हुए एनडीए सरकार ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए आपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है, रामनाथ कोविंद जी के नाम का प्रस्ताव सर्व सहमती से लिया गया | वही दूसरी तरफ राज्यपाल रामनाथ कोविंद जी को उम्मीदवार बनाने की घोषणा की तो पूरा विपक्ष काफी देर तक यह समझने में असमर्थ रहा कि इस फैसले का विरोध कैसे करें और इस निर्णय पर विपक्ष चुपी साध गया |

रामनाथ कोविन्द जी का जन्म 1 अक्टूबर 1945 को उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की, तहसील डेरापुर के एक छोटे से गांव परौंख में हुआ था। कोविन्द का सम्बन्ध कोरी या कोली जाति से है जो उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आती है। रामनाथ कोविंद का जीवन सहज व सरल रहा है। दलगत {पार्टी वाद } राजनीति में सक्रिय रहने के बावजूद वे सबके प्रिय रहे तथा कभी विवादों में नहीं आएं। इस का 1 उदहारण है कि कोविंद जी को व्यक्तिगत रूप से जानने वाले यह तक बताते हैं कि सांसद होने के बावजूद वे वर्षों तक किराये के मकान में रहे। अब तक उनका पूरा जीवन दलित, शोषित,पीड़ितों की आवाज उठाने तथा उनके हितों की पूर्ति के लिए संघर्ष करते हुए बीता है। पेशे से वकील होने के कारण उन्हें कानून तथा संविधान के साथ राजनीति का भी लंबा अनुभव है।

रामनाथ कोविन्द जी द्वारा वकालत की उपाधि प्राप्त करने के पश्चात उन्होने दिल्ली उच्च न्यायालय में वकालत प्रारम्भ की। वह 1977 से 1979 तक दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे। वर्ष 1991 में भारतीय जनता पार्टी में सम्मिलित हो गये तथा वर्ष 1994 में उत्तर प्रदेश राज्य से राज्य सभा के निर्वाचित हुए। वर्ष 2000 में पुनः उत्तरप्रदेश राज्य से राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुए। इस प्रकार कोविन्द लगातार 12 वर्ष तक राज्य सभा के सदस्य रहे। वह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रहे।

रामनाथ कोविन्द जी बिहार के होने के कारन मोदी के धुर विरोधी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तो कोविंद के नाम की घोषणा होते ही राजभवन पहुंचकर उन्हें बधाई दी। मुलायम कह चुके हैं कि वे एनडीए का साथ दे सकते है। टीआरएस, अन्नाद्रमुक और बीजद ने पहले ही समर्थन देने की घोषणा कर दी है। इन सबके बावजूद यह कहना मुश्किल है कि रामनाथ कोविंद के नाम पर आम राय बनेगी। कांग्रेस और वामपंथियों ने 22 जून को होने वाली विपक्षी दलों की बैठक में फैसला लेने की बात कही है। बिहार से लगे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का यह कहना कि वह कोविंद को नहीं जानती, इसी से पता चलता है कि विपक्ष के मन मे कितना नकारात्मक भाव भरा है जो कि विपक्ष की मानसिकता दर्शाता है।

विपक्षी दलों की बैठक के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि उनका संयुक्त उम्मीदवार कौन है। भाजपा ने इस निर्णय के साथ देश को यह संदेश देने का काम किया है कि उसके एजेंडे में वर्षों से उपेक्षित दलित समाज का विशेष महत्व है। यह भी लगभग तय हो चुका है कि कोविंद ही भारत के अगले राष्ट्रपति होंगे। विपक्ष इस बात को जानता है कि सभी दावों के बाद भी वह अपनी पसंद का राष्ट्रपति नहीं बना सकता है लेकिन, इसी बहाने वह अपनी राजनीतिक शक्ति दिखाने की रस्मअदायगी जरूर कर सकता है।

इस लेख के द्वारा हम रामनाथ कोविन्द जी के जीवन पर प्रकाश डालना चाहते है, हमारा किसी भी पार्टी , संघ , सभा और व्यक्ति से सीधा सम्बन्ध नहीं है |

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